Source :- LIVE HINDUSTAN
Assocham ने बताया कि भारत का आधिकारिक सोने का रिजर्व 880.3 टन है। इस मामले में भारत दुनिया में आठवें स्थान पर है। हालांकि, भारत के घरों और मंदिरों में निजी तौर पर जमा सोने का भंडार किसी भी एक देश के आधिकारिक सोने के भंडार से कहीं अधिक है।
भारत के लगभग हर परिवार में सोना को लेकर दीवानगी है। यही वजह है कि भारत के घरों में अब दुनिया के टॉप 10 सेंट्रल बैंकों के कुल रिजर्व से भी ज्यादा सोना हो गया है। इंडस्ट्री बॉडी Assocham ने एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। Assocham के मुताबिक 2024-25 और 2026 की शुरुआत में सोने की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी के बाद भारत के घरों में रखे सोने की कीमत में भारी उछाल आया है। इसकी वजह से भारत के घरों में रखा सोना, अमेरिका, जर्मनी और चीन जैसे सबसे ज्यादा रिजर्व रखने वाले सेंट्रल बैंकों के सोने के भंडार से भी आगे निकल गया है।
भारत के पास कितना सोना?
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के डेटा का हवाला देते हुए Assocham ने बताया कि भारत का आधिकारिक सोने का रिजर्व 880.3 टन है। इस मामले में भारत दुनिया में आठवें स्थान पर है। हालांकि, यह अमेरिका के 8,133.5 टन सोने के रिजर्व का दसवां हिस्सा भी नहीं है लेकिन भारत के घरों और मंदिरों में निजी तौर पर जमा सोने का भंडार किसी भी एक देश के आधिकारिक सोने के भंडार से कहीं अधिक है। हालांकि, फिजिकली सोना के साथ ही अब लोग डिजिटल सोना की ओर भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
Assocham के मुताबिक भारत के घरों में रखे सोने की कीमत अब कई ट्रिलियन डॉलर के दायरे में मानी जा रही है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का अनुमान है कि भारतीय घरों और मंदिरों के पास लगभग 25,000 टन सोना है, जिसकी अनुमानित कीमत 2.4 ट्रिलियन डॉलर है। यह 2026 में भारत की अनुमानित नॉमिनल GDP का लगभग 56 प्रतिशत है।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का अनुमान है कि सोने की कीमतों में आई तेजी की वजह से जनवरी 2026 तक घरों में रखे सोने की कीमत बढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक हो गई है। यह भारत की GDP का लगभग 125 प्रतिशत है।
वित्त वर्ष 2026-27 में सोने की कीमतों को लेकर अनुमान
घरेलू बाजारों में सोने की कीमतें वित्त वर्ष 2026-27 में मध्यम रूप से तेज रहने की उम्मीद है क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार युद्ध का डर और वैश्विक स्तर पर मंदी का बढ़ता जोखिम सेफ-हेवन (सुरक्षित निवेश) की मांग को बढ़ा सकता है।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान चांदी में 142 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई, जबकि सोने में लगभग 67 प्रतिशत की तेजी आई। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी प्रशासन का शुल्क युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों द्वारा भारी खरीदारी, आपूर्ति की तंग स्थिति और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता रही।
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