Source :- LIVE HINDUSTAN
भारतीय बच्चे 5 साल की उम्र तक मां पर निर्भर रहते हैं और उनसे ही चिपके रहते हैं, जबकि जापानी बच्चे स्मार्ट और आत्मनिर्भर बन जाते हैं। जापानी लोगों का पेरेंटिंग करने का तरीका अलग है, जो हर माता-पिता को फॉलो करना चाहिए।
भारतीय बच्चे 5 साल तक मां से चिपके रहते हैं और हर काम के लिए माता-पिता पर निर्भर रहते हैं लेकिन जापान और चाइना के बच्चे 2-3 साल की उम्र से ही अपने कामों को करने लगते हैं और स्मार्ट हो जाते हैं। कभी आपने सोचा है ऐसा क्यों है। भारतीय पेरेंट्स परवरिश में कोई कमी नहीं छोड़ते लेकिन कुछ चीजों में गलतियां कर जाते हैं, जिसके कारण बच्चे उन पर ही निर्भर रहते हैं। जापानी पेरेंटिंग में कई ऐसी चीजें हैं, जो बच्चे को आत्मनिर्भर और तेज बनाते हैं। अगर आप भी अपने बच्चे को बचपन से ही तेज तर्रार और आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं, तो जापानी पेरेंटिंग से 5 जरूरी टिप्स जरूर सीख लें।
जापानी पेरेंटिंग के 5 खास टिप्स-
1- जिम्मेदारी सिखाओ
छोटे-मोटे काम बच्चे को खुद करने दो और सीखने दो। ऐसे बच्चा अपने काम खुद करना शुरू करेगा। जैसे अपनी प्लेट उठाकर किचन में रखकर आना, पानी खुद लेकर पीना, हाथ धोना, कपड़े पहनना वगैरह बेसिक काम करने दो। जिम्मेदारी वाले काम कॉन्फिडेंस भी बढ़ाती है।
2- आजादी दो
छोटी-मोटी प्रॉब्लम्स बच्चे को खुद सॉल्व करने दो। हर चीज में दखलअंदाजी करने से बच्चा आप पर ही निर्भर रहेगा और कोई भी परेशानी आने पर अपना दिमाग नहीं लगाएगा। बल्कि भागकर पेरेंट्स के पास आएगा। हर मुश्किल से उसे बचाकर रखना प्यार नहीं होता।
3- डेली फिक्स रूटीन
बच्चे का हर चीज का सही रूटीन तय करो। सोना, खाना, पीना, खेलना, आउटिंग सब चीजों को फिक्स समय होना चाहिए। रूटीन तय करने से बच्चा उसी में ढल जाता है और फिर उसी हिसाब से चीजें करता है। इससे बच्चे नखरे कम करते हैं।
4- इमोशन्स सिखाओ
बच्चे को इमोशन्स भी सिखाने की कोशिश करें। अगर बच्चा रो रहा है, तो उसे समझाओ और बताओ कि तुम अपसेट हो किस बात पर हो और क्या हो सकता है। ऐसे बच्चा खुशी और दुख के बीच अंतर समझ सकेगा।
5- चिल्लाना नहीं है सिखाना है
बच्चे की किसी भी गलती पर चिल्लाने से बेहतर है कि आप उसे प्यार से समझाते हुए सिखाएं। अगर बच्चे ने पानी गिराया है, तो उसे ही साफ करने के लिए दें। इससे बच्चा काबिल बनेगा और अपने सभी कामों को खुद करेगा। भारतीय पेरेंट्स हर बात पर बच्चे पर चिल्ला देते हैं और ऐसे में बच्चा गलती करने से भी डरने लगता है। कई जगहों पर बच्चे अपने माता-पिता के गुस्से से ही डरने लग जाते हैं।
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