Source :- LIVE HINDUSTAN
मोबाइल ब्लास्ट के नए केस ने साफ कर दिया है कि अगर डिवाइस में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट हो तो कंपनी को मुआवजा देना ही पड़ेगा। हालांकि, यूजर की लापरवाही सामने आने पर कोई क्लेम नहीं मिलेगा।
चार साल पहले एक UPSC अभ्यर्थी के साथ हुआ मोबाइल ब्लास्ट अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर राइट्स की बड़ी मिसाल बन गया है। Union Public Service Commission (UPSC) की परीक्षा देने से ठीक एक दिन पहले उसके फोन में ब्लास्ट हुआ, जिससे वह परीक्षा नहीं दे सका। मामले की सुनवाई के बाद कंज्यूमर फोरम ने स्मार्टफोन कंपनी Realme को ‘sub-standard product’ के लिए जिम्मेदार ठहराया और पीड़ित को 1.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
कोर्ट का फैसला साफ करता है कि अगर किसी स्मार्टफोन या डिवाइस में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट साबित हो तो कंपनियों की जिम्मेदारी मानी जाएगी और उन्हें हर्जाना भरना ही होगा। यहां एक बड़ा सवाल उठता है कि क्या हर फोन ब्लास्ट के केस में आपको मुआवजा मिलेगा? इसका जवाब है, बिल्कुल नहीं। अगर आपने कुछ गलतियां कीं और आप खुद फोन को पहुंचे नुकसान के लिए जिम्मेदार हैं तो एक रुपये का भी भुगतान कंपनी की ओर से नहीं किया जाएगा। आइए आपको इस बारे में बताएं।
इन परिस्थितियों में नहीं मिलेगा एक भी रुपया
फोन ब्लास्ट के मामलों में स्मार्टफोन कंपनी जांच करती है कि गलती कहां हुई, साथ ही खुद को बचाने की कोशिश भी करती है। अगर यूजर की ओर से की गई लापरवाही सामने आती है, तो उसे जिम्मेदार मानते हुए किसी भी तरह का मुआवजा नहीं दिया जाता और कंपनी की बाध्यता नहीं रहती। इन गलतियों की लिस्ट आप नीचे देख सकते हैं।
- सस्ते चार्जर का इस्तेमाल
अगर आप कंपनी के ओरिजिनल चार्जर की बजाय सस्ता, लोकल या डुप्लिकेट चार्जर इस्तेमाल करते हैं, तो यह सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर बन जाता है। ऐसे चार्जर अक्सर सही वोल्टेज और करंट सपोर्ट नहीं करते, जिससे बैटरी ओवरहीट हो सकती है। लगातार ऐसा होने पर बैटरी फूलने लगती है और ब्लास्ट का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में कंपनी आसानी से यह दावा कर सकती है कि डिवाइस का गलत इस्तेमाल किया गया, इसलिए मुआवजा नहीं मिलेगा।
2. बैटरी या फोन में छेड़छाड़
अगर फोन या बैटरी में किसी तरह की छेड़छाड़ की गई हो, तो भी जिम्मेदारी यूजर पर आ जाती है। कई लोग पैसे बचाने के लिए अनऑथराइज्ड दुकानों से बैटरी बदलवाते हैं या फोन की रिपेयरिंग कराते हैं, जहां नकली या खराब क्वॉलिटी के पार्ट्स लगाए जाते हैं। फोन खोलकर अंदर की वायरिंग से छेड़छाड़ करना भी खतरनाक है। ऐसे मामलों को सीधे-सीधे ‘user negligence’ माना जाता है और कंपनी अपनी जिम्मेदारी से बच जाती है।
3. ज्यादा गर्मी में फोन रख देना
फोन को ज्यादा गर्मी या सीधी धूप में रखना भी एक बड़ी गलती है। जैसे कार के डैशबोर्ड पर फोन छोड़ देना या बहुत गर्म जगह पर रखना, बैटरी के अंदर के केमिकल रिएक्शन को बिगाड़ सकता है। इससे ‘थर्मल रनअवे’ जैसी खतरनाक स्थिति पैदा हो सकती है, जिसमें बैटरी तेजी से गर्म होकर फट सकती है। ऐसे मामलों में भी इसे यूजर की लापरवाही माना जाता है।
4. चार्जिंग के दौरान हैवी यूजेस
चार्जिंग के दौरान फोन का हैवी इस्तेमाल करना (जैसे- गेम खेलना, वीडियो एडिटिंग करना या लंबे समय तक कॉल पर रहना) भी जोखिम बढ़ाता है। इससे फोन और बैटरी दोनों तेजी से गर्म होते हैं, और ओवरहीटिंग ब्लास्ट की संभावना को बढ़ा देती है। कंपनी ऐसे पैटर्न को ‘improper usage’ मानकर जिम्मेदारी लेने से इनकार कर सकती है।
5. लगातार या ओवरनाइट चार्जिंग
इसके अलावा, फोन को ओवरनाइट या लंबे समय तक लगातार चार्ज पर लगाकर छोड़ देना भी सही नहीं है। हालांकि आजकल के स्मार्टफोन में सेफ्टी फीचर्स होते हैं, लेकिन अगर चार्जर या केबल खराब हो तो बैटरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। जांच में अगर यह सामने आता है, तो जिम्मेदारी यूजर पर डाली जा सकती है।
6. पानी में गिरने या नमी के बाद इस्तेमाल
अगर फोन पानी में गिर गया हो या उसमें नमी आ गई हो और फिर भी उसे इस्तेमाल या चार्ज किया जाए, तो शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है। यह स्थिति सीधे तौर पर ब्लास्ट की वजह बन सकती है, और ऐसे मामलों में इसे यूजर की गलती मानी जा सकती है।
7. फिजिकल डैमेज के बाद लापरवाही
अगर फोन गिर गया हो, दब गया हो या मुड़ गया हो और फिर भी यूजर उसे लगातार इस्तेमाल करता रहे, तो अंदर की बैटरी डैमेज हो सकती है। यह डैमेज तुरंत दिखाई नहीं देता, लेकिन बाद में अचानक ब्लास्ट की वज बन सकता है। ऐसे केस में भी कंपनी जिम्मेदारी लेने से बच जाती है और मुआवजा मिलने की संभावना खत्म हो जाती है।
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