Source :- LIVE HINDUSTAN
सेंट्रल माइन प्लानिंग एवं डिजाइन इंस्टीट्यूट का IPO तीसरे दिन 1.05 गुना सब्सक्राइब हुआ, लेकिन यह सिर्फ QIB निवेशकों की मजबूत मांग की वजह से संभव हो पाया। रिटेल और NII कैटेगरी में कमजोर रिस्पॉन्स देखने को मिला। GMP भी गिरकर ₹0 हो गया है, जिससे संकेत मिलते हैं कि लिस्टिंग फ्लैट रह सकती है।
सेंट्रल माइन प्लानिंग एवं डिजाइन इंस्टीट्यूट (Central Mine Planning & Design Institute) का IPO तीसरे दिन जाकर किसी तरह पूरा सब्सक्राइब हो पाया। हालांकि, निवेशकों का रिस्पॉन्स थोड़ा कमजोर रहा और आखिरी दिन सिर्फ बड़े निवेशकों (QIB) की वजह से यह इश्यू पार हुआ। IPO को कुल मिलाकर 1.05 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है। इसका कुल शेयर 7.97 करोड़ रहा और 8.37 करोड़ शेयर की बोली लगी, यानी इश्यू बस थोड़ा-सा ओवरसब्सक्राइब हुआ। आइए इसकी अन्य डिटेल्स जानते हैं।
किस कैटेगरी में कितना रिस्पॉन्स?
इस IPO को बड़े निवेशक (QIB-Qualified Institutional Buyer) ने इसको 3.48 गुना (फुल सब्सक्राइब) और रिटेल निवेशक ने सिर्फ 33% सब्सक्राइब किया है। वहीं, NII (Non-Institutional Investors) की बात करें तो इसमें इनकी भागीदारी 35% रही है। वहीं, 21% एम्प्लॉयी और 36% शेयरहोल्डर हैं। इससे साफ है कि आम निवेशकों की दिलचस्पी काफी कम रही।
GMP (Grey Market Premium) का हाल
इस IPO का GMP अभी ₹0 पर है, जो पहले ₹24 तक गया था। इसका मतलब है कि लिस्टिंग पर शेयर इश्यू प्राइस के आसपास ही खुल सकता है।
IPO की अहम डिटेल
इसकी ओपनिंग डेट 20 मार्च 2026 थी और इसकी क्लोजिंग डेट 24 मार्च 2026 थी, यानी ये IPO आज क्लोज हो गया है। इसका प्राइस बैंड ₹163 से ₹172 है। इसका इश्यू साइज ₹1,842 करोड़ का है। निवेशकों को इसका एक लॉट (80 शेयर)₹13,760 में मिला है। यह IPO पूरी तरह OFS (Offer for Sale) है, यानी कंपनी को इसमें नया पैसा नहीं मिलेगा।
कंपनी क्या करती है?
केंद्रीय खान योजना एवं डिजाइन संस्थान (Central Mine Planning & Design Institute) मुख्य रूप से कोयला और खनिज खोज का काम करती है। इसके साथ कंपनी का कारोबार माइन प्लानिंग और डिजाइनिंग का भी है। साथ ही ये कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर और एनवायरनमेंट मैनेजमेंट जैसी सेवाएं भी देती है।
आगे क्या होगा?
इसकी अलॉटमेंट डेट 25 मार्च 2026 (संभावित) है और इसकी लिस्टिंग अगले हफ्ते BSE और NSE पर हो सकती है।
यह IPO सिर्फ QIB निवेशकों के दम पर पूरा हुआ, जबकि रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी कम रही। GMP भी कमजोर है, जिससे लिस्टिंग पर ज्यादा बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद कम है।
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