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पेट्रोल और डीजल होगा महंगा? सरकार की है नजर, रिकॉर्ड हाई पर कच्चे तेल के भाव

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अलग-अलग देशों से तेल की सप्लाई सुनिश्चित करने के कारण भारत अपने भंडार को स्थिर रखने में सफल रहा है और सप्लाई बाधित होने का जोखिम भी काफी हद तक कम हो गया है।

Petrol Diesel Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसके बावजूद भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने की कोई तत्काल जरूरत नहीं दिखाई दे रही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सरकार अभी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी या एक्साइज ड्यूटी घटाने जैसे किसी कदम पर विचार नहीं किया जा रहा है।

क्या है डिटेल

सूत्रों का कहना है कि ईंधन की उपलब्धता और भंडार के मामले में भारत फिलहाल काफी मजबूत स्थिति में है। देश के पास पर्याप्त तेल भंडार मौजूद हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में आई तेज उछाल का असर घरेलू बाजार पर तुरंत पड़ने की संभावना कम है। अधिकारियों का कहना है कि अभी देश में ईंधन की सप्लाई को लेकर कोई चिंता की बात नहीं है।

जानकारों के मुताबिक, जब वैश्विक स्तर पर तेल संकट की स्थिति बनने लगी थी, तभी भारत ने समय रहते कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख कर लिया था। इसी रणनीति का फायदा अब मिल रहा है। अलग-अलग देशों से तेल की सप्लाई सुनिश्चित करने के कारण भारत अपने भंडार को स्थिर रखने में सफल रहा है और सप्लाई बाधित होने का जोखिम भी काफी हद तक कम हो गया है।

सरकारी अधिकारियों ने क्या कहा

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में होने वाले हर बदलाव पर लगातार नजर रख रही है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति को ध्यान में रखते हुए स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है। लेकिन मौजूदा हालात में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने की कोई तात्कालिक योजना नहीं है।

दरअसल, कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से दुनिया भर में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। तेल महंगा होने का असर आमतौर पर ट्रांसपोर्ट लागत और अन्य जरूरी चीजों की कीमतों पर भी पड़ता है। इसलिए कई देशों में सरकारें इस पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि, फिलहाल भारत के लिए स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि पर्याप्त भंडार और स्थिर सप्लाई के चलते घरेलू बाजार में तुरंत किसी बड़े कदम की जरूरत नहीं है। ऐसे में आने वाले समय में अगर वैश्विक बाजार में हालात और ज्यादा बिगड़ते हैं, तभी सरकार किसी नई नीति या कीमतों में बदलाव पर फैसला ले सकती है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN