Source :- LIVE HINDUSTAN
जानिए ऑपरेशन नेपच्यून स्पीयर की वह रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी, जब ओसामा बिन लादेन को मारने के बाद अमेरिकी नेवी सील्स को पाकिस्तान के एबटाबाद में अपना ही टॉप-सीक्रेट ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर बम से उड़ाना पड़ा था।
हाल ही में अमेरिका ने ईरान में अपने सैनिक का बेहद ही खतरनाक रेस्क्यू ऑपरेशन किया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य अमेरिकी अधिकारियों ने इस मिशन को किसी फिल्म की कहानी जैसा बताया जहां बचाव दल को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इनमें दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों पर हमला होना और दो ट्रांसपोर्ट विमानों में आईं समस्याएं शामिल थीं, जिसके कारण अमेरिकी सेना को उन्हें नष्ट करना पड़ा। इस कार्रवाई ने इतिहास के एक और बेहद खौफनाक और रोमांचक पन्ने को पलट दिया है। यह कहानी किसी हॉलीवुड थ्रिलर से कम नहीं है, जब दुनिया की सबसे ताकतवर सेना को अपना ही एक टॉप-सीक्रेट हेलीकॉप्टर पाकिस्तान की जमीन पर जलाकर राख करना पड़ा था। यह कहानी है ऑपरेशन नेपच्यून स्पीयर की, वह रात जब अमेरिका के नंबर वन दुश्मन ओसामा बिन लादेन का खात्मा हुआ था।
ऑपरेशन नेपच्यून स्पीयर
तारीख: 1-2 मई, 2011
जगह: एबटाबाद, पाकिस्तान (इस्लामाबाद से महज 120 किमी दूर)
टारगेट: जेरोनिमो – ओसामा बिन लादेन का कोडनेम
रात का घुप्प अंधेरा और आसमान में सन्नाटा था। अफगानिस्तान के जलालाबाद एयरबेस से दो खामोश परिंदों ने उड़ान भरी। ये कोई आम हेलीकॉप्टर नहीं थे। ये संशोधित स्टील्थ MH-60 ब्लैक हॉक थे। इन पर रडार को सोख जाने वाला पेंट लगा था, इनकी डिजाइन को तीखे एंगल्स दिए गए थे ताकि ये रडार की तरंगों को चकमा दे सकें और इनके रोटर ब्लेड्स को इस तरह डिजाइन किया गया था कि उड़ने पर आवाज न के बराबर हो। पाकिस्तानी रडार सिस्टम सोता रहा और ये दोनों स्टील्थ हेलीकॉप्टर मौत के दूत बनकर एबटाबाद में ओसामा के सुरक्षित माने जाने वाले किले तक पहुंच गए। वाशिंगटन डीसी के ‘सिचुएशन रूम’ में बैठे राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी टीम की सांसें अटकी हुई थीं।
जब हवा ने दिया धोखा: द हार्ड लैंडिंग
मिशन बिल्कुल योजना के मुताबिक चल रहा था, जब तक कि पहला हेलीकॉप्टर (Chalk 1) ओसामा के कंपाउंड के ऊपर नहीं पहुंचा। हॉलीवुड की किसी फिल्म के क्लाइमेक्स की तरह, अचानक चीजें बिगड़ने लगीं। कंपाउंड की ऊंची दीवारों के कारण हेलीकॉप्टर के रोटर ब्लेड्स द्वारा फेंकी जा रही हवा वापस ऊपर की तरफ उठी। इसे एविएशन की भाषा में ‘वोर्टेक्स रिंग स्टेट’ कहते हैं। हेलीकॉप्टर अचानक अपना लिफ्ट यानी हवा में टिके रहने की क्षमता खो बैठा।
अलार्म बजने लगे। हेलीकॉप्टर तेजी से जमीन की तरफ गिरने लगा। पायलट ने असाधारण सूझबूझ दिखाते हुए एक भयानक क्रैश को ‘हार्ड लैंडिंग’ में बदल दिया। हेलीकॉप्टर का पिछला हिस्सा कंपाउंड की दीवार से जा टकराया और उसका टेल रोटर (पीछे का पंखा) टूटकर गिर गया। एक जोरदार झटके के साथ हेलीकॉप्टर जमीन पर धंस गया। वाशिंगटन में लाइव फीड देख रहे अधिकारियों के दिल की धड़कनें एक पल के लिए रुक गईं। ऐसा लगा जैसे 1993 का ‘ब्लैक हॉक डाउन’ हादसा फिर से दोहराया जा रहा हो।
मिशन फर्स्ट: जेरोनिमो KIA
हेलीकॉप्टर क्रैश हो चुका था, लेकिन नेवी सील के कमांडोज को रुकने की इजाजत नहीं थी। उन्होंने तुरंत धूल और मलबे के बीच से निकलकर कंपाउंड पर धावा बोल दिया। SEALs कमांडो दीवार फांदकर, फास्ट-रोपिंग करके कंपाउंड में उतरे। अंधेरे में गोलियां चल रही थीं। पहला फ्लोर, दूसरा… तीसरे फ्लोर पर- ओसामा था। वो बिना हथियार के बाहर निकला। SEALs ने उसे पहचाना और गोली मार दी। रेडियो पर सील कमांडर की आवाज गूंजी- For God and country- Geronimo, Geronimo, Geronimo… Enemy KIA (Killed in Action). यानी ओसामा मारा जा चुका था। बॉडी की पहचान की और उसे अपने साथ लाने के लिए बांधा। इंटेलिजेंस दस्तावेज, कंप्यूटर, हार्ड ड्राइव, सब कुछ बटोरा गया। सिर्फ 38 मिनट में ऑपरेशन पूरा हो गया। लेकिन अब एक और बड़ी मुसीबत खड़ी थी।
प्रोटोकॉल: कोई निशान मत छोड़ो
कंपाउंड में फंसा स्टील्थ ब्लैक हॉक अब उड़ान भरने के लायक नहीं था। यह हेलीकॉप्टर अमेरिकी एविएशन की सबसे गुप्त और महंगी तकनीक का हिस्सा था। अमेरिका किसी भी कीमत पर यह नहीं चाहता था कि यह तकनीक पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) या चीन के इंजीनियरों के हाथ लगे।
निर्णय लिया गया- इसे उड़ा दो।
पायलट हेलीकॉप्टर के कॉकपिट में वापस गया। उसने एक भारी हथौड़े से गुप्त इंस्ट्रूमेंट पैनल, रेडियो, और एवियोनिक्स को चकनाचूर कर दिया। इस बीच, सील कमांडोज ने हेलीकॉप्टर के इंजन, रोटर और केबिन में थर्माइट ग्रेनेड और भारी विस्फोटक लगा दिए। थर्माइट इतने उच्च तापमान पर जलता है कि वह धातु को पिघलाकर लावा बना देता है।
धमाका और एबटाबाद से फरारी
सब कुछ तैयार था। सील कमांडोज ने ओसामा के शव और वहां से मिली हार्ड ड्राइव्स को बैकअप के लिए बुलाए गए CH-47 चिनूक हेलीकॉप्टर में लादा। जैसे ही चिनूक ने उड़ान भरी, पीछे छूटे ब्लैक हॉक में एक कानफोडू धमाका हुआ। आग की लपटें एबटाबाद के आसमान को चीरती हुई कई फीट ऊपर तक उठीं। पूरा हेलीकॉप्टर भयंकर आग का गोला बन चुका था। इसके स्टील्थ पैनल्स, रडार-विरोधी कोटिंग और टॉप-सीक्रेट पुर्जे पल भर में पिघलकर राख में बदल रहे थे।
इस धमाके ने पूरे एबटाबाद को जगा दिया था। पाकिस्तानी वायुसेना के F-16 लड़ाकू विमानों को भी उड़ान भरने पर मजबूर कर दिया। यह एक रेस अगेंस्ट टाइम थी। इससे पहले कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमान वहां पहुंच पाते, अमेरिकी चिनूक हेलीकॉप्टर रडार के नीचे-नीचे उड़ान भरते हुए वापस अफगान सीमा में दाखिल हो गए।
पीछे छूट गया था सिर्फ उस अत्याधुनिक ब्लैक हॉक का जला हुआ मलबा और उसका वह टेल रोटर, जो दीवार के बाहर गिरा था और जिस पर अमेरिका की वह टॉप-सीक्रेट स्टील्थ तकनीक दुनिया के सामने पहली बार बेनकाब हो गई थी। अमेरिका ने अपनी तकनीक बचाने के लिए अपना ही करोड़ों का हेलीकॉप्टर राख कर दिया था, ठीक वैसे ही जैसे हाल ही में ईरान में देखने को मिला।
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