Source :- LIVE HINDUSTAN
संक्षेप:
JUI-F नेता ने कहा कि देश की विदेश नीति इतनी बुरी तरह फैल हो चुकी है जहां आज स्थिति यह है कि भारत पाक का दुश्मन है, अफगानिस्तान दुश्मन है और यहां तक कि ईरान और चीन को भी पाक पर भरोसा नहीं है।
पाकिस्तान में आर्थिक बदहाली और फेल होती विदेश नीति को लेकर शहबाज शरीफ की सरकार को अपने देश में ही फजीहत झेलनी पड़ रही है। खास कर भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ट्रेड डील के बाद लोग सवाल उठा रहे हैं कि सैन्य प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की इतनी जी हुजूरी के बाद भी अंत में पाक के हाथ कोई डील ना आई, जबकि भारत ने अमेरिका के साथ एक फायदे का सौदा कर लिया। लोग इसे लेकर पाकिस्तानी सरकार को खूब ट्रोल कर रहे हैं। इस बीच अब पाक के जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने शहबाज शरीफ को तार तार कर दिया है।
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मौलाना फजलुर रहमान ने शहबाज सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि दशकों की खराब विदेश नीति और आंतरिक विरोधाभासों के कारण पाकिस्तान ने अफगानिस्तान और चीन सहित अपने सभी दोस्त खो दिए हैं। एक कार्यक्रम में बोलते हुए, फजलुर रहमान ने पिछले 78 सालों में पाकिस्तान की रणनीतिक सोच पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “इन सभी दशकों में हमने कभी रुककर यह नहीं पूछा कि हमारी अफगान नीति इतनी बुरी तरह क्यों फेल हो गई।”
ईरान और चीन भी हुए खफा
JUI-F नेता ने कहा कि देश की विदेश नीति विफलता के ऐसे बिंदु पर पहुंच गई है जहां भारत हमारा दुश्मन है, अफगानिस्तान हमारा दुश्मन है, और यहां तक कि ईरान और चीन भी हमसे नाराज हैं।” फजलुर रहमान ने कहा, “पाकिस्तान के लोगों को जवाब मिलना चाहिए। कोई भी देश तब तक जिंदा नहीं रह सकता जब उसकी नीतियां सिर्फ अलगाव, अविश्वास और असुरक्षा पैदा करती हैं।”
CPEC पर भी घेरा
फजलुर रहमान ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को संभालने के तरीके पर भी सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि शहबाज शरीफ सरकार चीन का विश्वास लौटाकर नए निवेश हासिल करने में भी फेल ही रही है। उन्होंने कहा, “इस CPEC में कोई वास्तविक प्रगति नहीं हुई है क्योंकि चीन अब हम पर भरोसा नहीं करता है।”
बता दें कि पाकिस्तान में बलोच विद्रोहियों के साथ सैन्य झड़प की खबरें आम हो गई हैं। विद्रोहियों ने बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए CPEC का विरोध किया है और क्षेत्र में कई चीनी अधिकारियों को भी निशाना बनाया है। लगातार बोलने के बाद भी पाकिस्तान चीनी अधिकारियों को सुरक्षा मुहैया नहीं करवा पा रहा है, जिसके बाद अब चीन का पाक से भरोसा खत्म होता जा रहा है।
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