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न्यू स्टार्ट संधि का पालन तभी जब अमेरिका करेगा; परमाणु समझौते पर रूस की दो टूक

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Source :- LIVE HINDUSTAN

संक्षेप:

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि अमेरिका ने पुतिन के प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, फिर भी रूस न्यू स्टार्ट संधि की सीमाओं का सम्मान करता रहेगा, जब तक अमेरिका भी इनका उल्लंघन नहीं करता।

रूस ने स्पष्ट किया है कि न्यू स्टार्ट संधि की समाप्ति के बाद भी वह परमाणु हथियारों की सीमाओं का सम्मान जारी रखेगा, बशर्ते अमेरिका भी ऐसा ही करता रहे। यह बयान संधि के 5 फरवरी 2026 को समाप्त होने के ठीक बाद आया है, जिससे दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु शस्त्रागारों पर पहली बार आधी सदी से अधिक समय में कोई कानूनी बंधन नहीं रह गया है। इससे अनियंत्रित परमाणु हथियारों की दौड़ शुरू होने का खतरा बढ़ गया है।

संसद में क्या बोले रूसी विदेश मंत्री

बुधवार को रूसी संसद के निचले सदन (स्टेट ड्यूमा) को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि अमेरिका ने पुतिन के प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, फिर भी रूस न्यू स्टार्ट संधि की सीमाओं का सम्मान करता रहेगा, जब तक अमेरिका भी इनका उल्लंघन नहीं करता। लावरोव ने सांसदों से कहा कि राष्ट्रपति द्वारा घोषित यह रोक (मोरेटोरियम) तब तक लागू रहेगी, जब तक अमेरिका इन सीमाओं का उल्लंघन नहीं करता। हम अमेरिकी सैन्य नीतियों के विश्लेषण के आधार पर जिम्मेदारीपूर्ण और संतुलित तरीके से कदम उठाएंगे।

लावरोव का यह बयान एक्सियोस की उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया था कि पिछले सप्ताह अबू धाबी में हुई बातचीत के दौरान रूसी और अमेरिकी वार्ताकारों ने कम से कम छह महीने तक संधि की सीमाओं का पालन करने के लिए एक संभावित अनौपचारिक समझौते पर चर्चा की थी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने शुक्रवार को इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस क्षेत्र में कोई अनौपचारिक विस्तार संभव नहीं है और कोई भी विस्तार केवल औपचारिक रूप से ही हो सकता है।

इस बीच, पेस्कोव ने पुष्टि की कि रूसी और अमेरिकी वार्ताकारों ने अबू धाबी में भविष्य में परमाणु हथियार नियंत्रण को लेकर चर्चा की थी। वहां मॉस्को, कीव और वाशिंगटन के प्रतिनिधिमंडलों ने यूक्रेन में शांति समझौते पर दो दिवसीय वार्ता भी की थी। बता दें कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले साल घोषणा की थी कि अगर वाशिंगटन संधि का पालन करता है, तो रूस एक और साल तक संधि की सीमाओं का पालन करने को तैयार है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि वे चाहते हैं कि चीन भी नई संधि में शामिल हो, जिसे बीजिंग ने ठुकरा दिया है।

2010 में हुआ था समझौता

गौरतलब है कि ‘न्यू स्टार्ट’ संधि पर 2010 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने हस्ताक्षर किए थे। यह मॉस्को और वाशिंगटन के बीच परमाणु हथियारों को सीमित करने वाली समझौतों लंबी श्रृंखला का अंतिम समझौता था, जिसकी शुरुआत 1972 के SALT-I समझौते से हुई थी। संधि के तहत दोनों पक्षों को अधिकतम 700 मिसाइलों और बमवर्षक विमानों पर 1550 परमाणु हथियार तैनात रखने की अनुमति थी। यह समझौता मूल रूप से 2021 में समाप्त होने वाला था, लेकिन इसे पांच साल के लिए बढ़ा दिया गया था।

संधि में अनुपालन की पुष्टि के लिए व्यापक निरीक्षण की व्यवस्था थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण 2020 में ये निरीक्षण रोक दिए गए और उसके बाद कभी शुरू नहीं हुए। फरवरी 2023 में पुतिन ने मॉस्को की भागीदारी को निलंबित कर दिया था, यह कहते हुए कि रूस अपने परमाणु स्थलों पर अमेरिकी निरीक्षण की अनुमति नहीं दे सकता, खासकर जब वाशिंगटन और उसके नाटो सहयोगी खुले तौर पर यूक्रेन में रूस की हार चाहते हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN