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नुकसान करती है लाल मिर्च, वैद्य ने बताया 400-500 साल पहले भारतीय क्या करते थे इस्तेमाल!

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Source :- LIVE HINDUSTAN

लाल मिर्च पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे जलन और एसिडिटी का कारण बनती है, साथ ही कई तरह की एलर्जी की वजह भी बन सकती है। अब सवाल है कि लाल मिर्च नहीं तो फिर इसकी जगह क्या खाना चाहिए? इसी से जुड़ा एक अच्छा विकल्प साझा किया है वैद्य (डॉ) प्रेरणा बहरी ने।

भारतीय मसाले पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। इनके कई फायदे भी बताए जाते हैं लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि हम भारतीय रोज मसालों का सेवन करते हैं, फिर भी इतनी एसिडिटी और ब्लोटिंग की समस्या क्यों होती है? इसके पीछे की वजह है तेज मसालेदार भोजन। खासतौर से लाल मिर्च का इस्तेमाल हमारी रसोई में काफी होता है, जिसका सेहत के लिए कोई भी फायदा नजर नहीं आता। ये पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे जलन और एसिडिटी का कारण बनती है, साथ ही कई तरह की एलर्जी की वजह भी बन सकती है। अब सवाल है कि लाल मिर्च नहीं तो फिर इसकी जगह क्या खाना चाहिए? क्योंकि बिना तीखेपन के तो भारतीय डिशेज का स्वाद ही अधूरा लगता है। इसी से जुड़ा एक अच्छा विकल्प साझा किया है वैद्य (डॉ) प्रेरणा बहरी ने।

400-500 साल पहले से ही शुरू हुआ लाल मिर्च का इस्तेमाल

वैद्य प्रेरणा बताती हैं कि आजकल घरों में एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं इसलिए भी कॉमन होती जा रही हैं, क्योंकि लाल मिर्च का इस्तेमाल काफी ज्यादा होने लगा है। दरअसल आज से 400-500 साल पहले लाल मिर्च का इस्तेमाल नहीं किया जाता था। जब पुर्तगाली 16वीं सदी में भारत आए तो अपने साथ लाल मिर्च ले कर आए। अब सवाल है कि इससे पहले भारतीय घरों में क्या इस्तेमाल किया जाता था? आइए जानते हैं।

लाल मिर्च की जगह क्या इस्तेमाल करें?

डॉ प्रेरणा बताती हैं कि लाल मिर्च से पहले भारतीय घरों में त्रिकटु का इस्तेमाल किया जाता था। त्रिकटु तीन मसालों को मिलाकर बनाया जाता है, जिसमें बराबर मात्रा में सौंठ, काली मिर्च और पिप्पली को मिलाया जाता है। अगर आपको त्रिकटु नहीं मिल रहा है, तो पंसारी की दुकान से इन तीनों मसालों को बराबर मात्रा में ले आएं। फिर धूप में इन्हें 2 दिनों के लिए सुखाएं ताकि सारी नमी निकल जाए और इन्हें बारीक पाउडर बनाकर रख लें। लाल मिर्च की जगह आप इसे इस्तेमाल कर सकते हैं।

त्रिकटु के फायदे क्या-क्या हैं?

वैद्य बताती हैं कि जब आप लाल मिर्च की जगह त्रिकटु का इस्तेमाल करना काफी फायदेमंद है। ये खाने को सिर्फ तीखा करने का ही काम नहीं करता बल्कि शरीर की अग्नि को भी बैलेंस और इग्नाइट करता है। वहीं लाल मिर्च अगर आप ज्यादा इस्तेमाल कर लेते हैं तो ये गट लाइनिंग को इरिटेट करती है और एसिडिटी को ट्रिगर करती है।

इतना ही नहीं त्रिकटु पाचन को मजबूत बनाता है, एकस्ट्रा कफ को हमारी बॉडी से रिमूव करता है और अग्नि को बैलेंस करता है। आयुर्वेद के मुताबिक अग्नि का कमजोर होना ही सभी बीमारियों की जड़ है। इसलिए जब हम अग्नि को ठीक कर लेते थे, तो सभी रोगों को भी ठीक कर लेते थे और बीमार भी कम पड़ते थे। लेकिन जब से भारतीयों ने त्रिकटु की जगह लाल मिर्च को अपनाया है, तब से हेल्थ में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

त्रिकटु को इस्तेमाल करने की सही मात्रा

त्रिकटु को आप ठीक लाल मिर्च की तरह ही इस्तेमाल कर सकते हैं। किसी भी चीज में आप जितनी लाल मिर्च डालना पसंद करते हैं, उतना ही त्रिकटु भी डाल सकते हैं। तीखापन सेम ही रहता है। हालांकि त्रिकटु का स्वाद थोड़ा सा अलग होता है, लेकिन अगर आप 2-3 दिन लगातार इसका इस्तेमाल करेंगे तो टेस्ट अच्छा लगना शुरू हो जाएगा।

नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या मेडिकल कंडीशन से जुड़े सवालों के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN