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तेल सप्लाई नहीं रुकेगी: होर्मुज संकट के बीच सऊदी अरब ने एक्टिव किया खास रास्ता

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान में जारी युद्ध की वजह से होर्मुज पर संकट बना हुआ है। इसी बीच सऊदी अरब ने अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया है। वर्तमान में यह पाइपलाइन करीब 70 लाख बैरल प्रति दिन की क्षमता से काम कर रही है।

पश्चिम एशिया में जारी जंग की वजह से पूरी दुनिया ऊर्जा संकट के मुहाने पर जाकर खडी हो गई है। होर्मुज के बंद होने से न केवल अन्य देशों को नुकसान हो रहा है, बल्कि खाड़ी देशों को भी अपना कच्चा तेल और गैस बेचने में परेशानी आ रही है। इसी बीच सऊदी अरब ने अपने एक पुराने रास्ते को पूरी क्षमता के साथ सक्रिय कर दिया है। अब उसकी महत्वपूर्ण पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन पूरी क्षमता के साथ प्रतिदिन 70 लाख बैरल तेल सप्लाई कर रही है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज पर ईरान के खतरे को देखते हुए यह पाइपलाइन सऊदी अरब और अन्य देशों के लिए थोड़ा सहारा बनी है। बता दें, यह पाइपलाइन खाड़ी क्षेत्र के सबसे रणनीतिक तेल इन्फ्रास्ट्रक्चर में से एक है। यह सऊदी अरब के पूर्वी तेल उत्पादन क्षेत्र से लेकर लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक जाती है। इससे सऊदी अरब को होर्मुज में जारी संकट को बायपास करने में मदद मिलती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज में जारी खतरे को देखते हुए कई देशों के जहाजों को यनबू की ओर मोड़ा गया है। अब यह देश खाड़ी की बजाय लाल सागर से तेल लोड़ कर सकेंगे। शिपिंग डेटा के मुताबिक यनबू में कच्चे तेल के निर्यात में तेजी देखी गई है। सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी आरामको इसका उपयोग कर रही है।

इस पाइपलाइन को ऐसे समय के लिए ही बनाया गया था। सऊदी अरब होर्मुज पर ईरान के प्रभाव को हमेशा से ही नापसंद करता रहा है। ऐसे में होर्मुज का विकल्प खोजने के लिए ही उसने इस पाइपलाइन का निर्माण किया था। इस पाइपलाइन को पेट्रोलाइन भी कहा जाता है। इसके जरिए सऊदी तेल को होर्मुज से न होकर दूसरे रास्ते से वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जा सके।

सप्लाई जारी, लेकिन होर्मुज का विकल्प नहीं

सऊदी अरब ने आपात स्थिति को देखते हुए इस पाइपलाइन को पूरी तरह से सक्रिय तो कर दिया है। लेकिन यह होर्मुज का विकल्प बनने की स्थिति में नहीं है। विशेषज्ञों की मानें, तो पाइपलाइन की क्षमता केवल 70 लाख बैरल प्रति दिन की है। लेकिन इसका तेल तुरंत ही निर्यात नहीं किया जा सकता है। क्योंकि यनबू बंदरगाह की निर्यात क्षमता अभी सीमित है। इसके अलावा होर्मुज पर जहां ईरान का संकट है, वहीं दूसरी तरफ यमन के हूती विद्रोही भी अब इस युद्ध में कूद चुके हैं। ऐसे में वह भी लाल सागर की तरफ से आने वाले जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर सकते हैं। ऐसे में भले ही यह पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए एक हालिया राहत का जरिया बनी हो, लेकिन लंबे समय तक इसके सक्रिय रहने पर सवालिया निशान लगा हुआ है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN