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तेल की कीमतों का ‘धार’ देख टेंशन में अमेरिका, अब बड़ा फैसला लेंगे डोनाल्ड ट्रंप?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बढ़ती ईंधन कीमतों को काबू में करने के लिए कई आपातकालीन उपायों की समीक्षा कर सकते हैं।

ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बढ़ती ईंधन कीमतों को काबू में करने के लिए कई आपातकालीन उपायों की समीक्षा कर सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वाइट हाउस के अधिकारी तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी से निपटने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। बढ़ती ईंधन लागत से अमेरिकी उपभोक्ताओं और कारोबार पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता बढ़ गई है, खासकर ऐसे समय में जब नवंबर में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं।

चर्चा में शामिल प्रमुख प्रस्तावों में जी7 देशों के रणनीतिक तेल भंडार से संयुक्त रूप से कच्चा तेल जारी करने का विकल्प भी शामिल है। अमेरिकी अधिकारी वैश्विक आपूर्ति पर दबाव कम करने के लिए अपने जी7 साझेदारों के साथ इस मुद्दे पर बातचीत कर रहे हैं। इसके अलावा अमेरिकी तेल निर्यात पर अस्थायी रोक, तेल वायदा बाजारों में हस्तक्षेप, कुछ संघीय ईंधन करों में छूट और जोन्स अधिनियम के प्रावधानों को अस्थायी रूप से निलंबित करने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। जोन्स अधिनियम के तहत घरेलू ईंधन शिपमेंट केवल अमेरिकी ध्वज वाले जहाजों से ही भेजा जा सकता है।

तेल कीमतों में तेज उछाल

ईरान पर 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा शुरू किए गए हमलों के बाद वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जो 2022 के मध्य के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। इसके कारण गैसोलीन और अन्य ईंधनों की कीमतों में भी वृद्धि दर्ज की गई है।

वाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने कहा कि प्रशासन ऊर्जा बाजारों में हो रहे घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी ऊर्जा टीम के पास बाजार को स्थिर रखने के लिए पहले से एक कार्य योजना मौजूद है और सभी विश्वसनीय विकल्पों की समीक्षा जारी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ी चिंता

बताया जा रहा है कि तेल कीमतों में तेजी की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता जोखिम है। ईरान और ओमान के बीच स्थित यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति के लिए अहम है। बताया जा रहा है कि जब तक इस क्षेत्र में सैन्य तनाव बना रहेगा और तेल टैंकरों की आवाजाही पर खतरा मंडराता रहेगा, तब तक अमेरिकी नीतिगत कदमों का वैश्विक बाजार पर सीमित असर ही पड़ सकता है।

चुनावी साल में बढ़ी चुनौती

ऊर्जा बाजारों में उथल-पुथल ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका में मध्यावधि चुनाव करीब हैं। ट्रंप लंबे समय से कम ईंधन कीमतों को अपनी आर्थिक नीति का अहम हिस्सा बताते रहे हैं। ऐसे में तेल और गैसोलीन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से परिवहन लागत और उपभोक्ता महंगाई दोनों पर असर पड़ सकता है।

गौरतलब है कि वाइट हाउस ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों के लिए नौसैनिक सुरक्षा और बीमा सहायता देने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया है। हालांकि अब तक इस कदम से इस महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग में जहाजों की आवाजाही पर खास असर नहीं पड़ा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN