Source :- LIVE HINDUSTAN
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि वह ईरान युद्ध खत्म होने की वह कोई तारीख नहीं बताना चाहते हैं। उन्होंने इतना जरूरत कहा कि अपने लक्ष्य का आधे से ज्यादा रास्ता तय कर चुके हैं।
ईरान युद्ध को लेकर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि वह युद्ध खत्म होने की कोई तारीख नहीं बताना चाहते है्ं। उन्होंने कहा, इतना जरूर कहा जा सकता है कि हम आधे से ज्यादा सफर तय कर चुके हैं। थोड़े ही दिनों में ईरान अंदर से धराशायी हो जाएगा। दूसरी ओर वाइट हाउस का कहना है कि ईरान के साथ बातचीत जारी है और यह सकारात्मक दिशा में जा रही है। बात करें ईरान की तो उसने कभी बातचीत की बात स्वीकार ही नहीं की।
वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में उसकी मिसाइल, ड्रोन और नौसैनिक उत्पादन क्षमता का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा, ‘यह आश्चर्य की बात नहीं है कि शासन के शेष तत्व अब विनाश को रोकने और समय रहते वार्ता की मेज पर आने के लिए अधिक उत्सुक हो रहे हैं।’
लीविट ने दावा किया, “सार्वजनिक रूप से जो बयान दिए जा रहे हैं और भ्रामक रिपोर्टिंग के बावजूद बातचीत जारी है और अच्छी तरह आगे बढ़ रही है।” उन्होंने कहा कि सार्वजनिक तौर पर जो कहा जा रहा है, वह निजी तौर पर व्यक्त किए गए रुख से अलग है।
अमेरिका इन वार्ताओं को प्रत्यक्ष बातचीत के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, लेकिन मध्यस्थता से जुड़े दो अरब अधिकारियों के अनुसार संपर्क मुख्य रूप से तीसरे देशों के माध्यम से संदेशों के आदान-प्रदान तक सीमित है। गौरतलब है कि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को कहा कि ईरान ने अब तक अमेरिका के साथ कोई “प्रत्यक्ष” वार्ता नहीं की, हालांकि मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिकी संदेश उसे प्राप्त हुए हैं।
बघाई ने सोमवार को साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा, “जब अमेरिका वार्ता और कूटनीति की बात करता है तो संवेदनशीलता बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि स्वयं अमेरिका के भीतर भी इन दावों को कितनी गंभीरता से लिया जाता है।” उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भी अमेरिका के कूटनीतिक दावों पर भरोसा सीमित है।
बघाई ने कहा कि ईरान का रुख स्पष्ट और स्थिर रहा है, जबकि “दूसरी तरफ” दूसरा पक्ष बार-बार अपना रुख बदलता रहा है और विरोधाभासी बयान देता रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान तक जो प्रस्ताव पहुंचे हैं, चाहे उन्हें 15 सूत्रीय योजना कहा जाए या किसी अन्य नाम से पुकारा जाये, उनमें “अत्यधिक, अव्यावहारिक और तर्कहीन” मांगें शामिल हैं।
अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से कुछ तेल टैंकरों को गुजरने देने को ईरान की गंभीरता का संकेत बताया है, जबकि सूत्रों का कहना है कि ईरान युद्ध से पहले जिन अमेरिकी मांगों को मानने से इनकार कर चुका था, उन्हें स्वीकार करने की संभावना कम है। (एजेंसी से इनपुट्स के साथ)
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