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डॉक्टर ने समझाया क्या दिनभर चीखने-चिल्लाने वाले बच्चे को है हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Does my child have ADHD: बच्चे के उछल-कूद और दिनभर चीखने-चिल्लाने से परेशान हो चुके हैं। रिश्तेदार अक्सर बोल देते हैं कि बच्चे को हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर की समस्या है तो पीडियाट्रिशन से जानें आखिर बच्चे को एडीएचडी की समस्या है या नहीं।

ADHD यानि कि अटेंशन डिफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर, जिसमे बच्चा किसी एक चीज पर अपना ध्यान नहीं लगा पाता और पूरे टाइम हाइपर एक्टिव रहता है। एक जगह ना बैठना, लगातार हिलते रहना या फिर इधर-उधर भागना, दौड़ना, चीखना, चिल्लाना, इमोशन पर कंट्रोल ना कर पाना इस समस्या के लक्षण होते हैं। काफी सारे पैरेंट्स अपने बच्चों के बिहेवियर को देखकर कंफ्यूज हो जाते हैं कि उनका बच्चा एडीएचडी का शिकार तो नहीं। बच्चा दो से तीन साल का है और बहुत ज्यादा शरारती है तो किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले इस सूरत के इस पीडियाट्रिशन की बात जरूर सुन लें। जिन्होंने बताया कि मात्र 2 सवालों के जवाब की मदद से आप जान सकते हैं कि आपके बच्चे को एडीएचडी की समस्या है या फिर बच्चा केवल अपनी ग्रोथ स्टेज से जुड़ी हरकतों को कर रहा है।

पीडियाट्रिशन ने पूछा पैरेंट्स से 2 सवाल

पीडियाट्रिशन डॉक्टर संतोष ने बताया कि जब भी अपने एक्टिव और चीखने-चिल्लाने वाले बच्चे को लेकर मन में कंफ्यूजन हो कि कहीं ये हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर का शिकार तो नहीं? फौरन इन 2 सवालों को जानने की कोशिश करें।

बच्चा घर में पैरेंट्स के साथ या कंफर्ट जोन में कैसा बिहेव करता है

ज्यादातर पैरेंट्स शिकायत करते हैं कि उनका बच्चा हर वक्त शरारत करता है, उछल-कूद, डांस करना, चीखना-चिल्लाना, ये सब करता है। बच्चा एक जगह कुछ देर शांति से बैठता ही नहीं। ऐसे में काफी सारे पैरेंट्स के मन में सवाल आता है कि क्या उनके बच्चे को हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर की प्रॉब्लम तो नहीं। ऐसे में डॉक्टर का ये सवाल उनकी मदद कर सकता है।

डॉक्टर ने बताया ऐसे समझें बच्चे को एडीएचडी है या नहीं?

बच्चा घर के अलावा स्कूल में या ऐसी जगह जो उसके लिए नई हो, जहां पर बच्चा पहले कभी ना गया हो क्या वहां पर भी वैसी ही हरकतें करता है। अगर जवाब है नहीं तो पैरेंट्स को समझना होगा कि ये हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर की प्रॉब्लम नहीं है।

ये बच्चे का इमोशनल इंटैलिजेंस है

डॉक्टर ने बताया कि बच्चे जब बाहर जाकर या स्कूल में वेल बिहेव करते हैं, सारे टास्क, होमवर्क पूरे करते हैं और वेल मैनर्ड बने रहते हैं तो ये बच्चे का इमोशनल इंटैलिजैंस है। बच्चे जब डेवलपमेंट स्टेज पर होते हैं तो ये उसका एक फेज होता है। जिसमे बच्चे अपनी लिमिट जानने की कोशिश करते हैं और हर चीज एक्सप्लोर करते हैं। बच्चे को जब घर में सेफ एनवायरमेंट मिलता है तो बच्चे ज्यादा से ज्यादा चीजें एक्सप्लोर करते हैं। कुछ बच्चे एनवायरमेंट और चीजों को एक्सप्लोर करने के बाद ही एक्सप्रेस करते हैं।

बच्चे को कैसे सुधारें

डॉक्टर ने बताया कि जो बच्चे काफी ज्यादा एक्टिव होते हैं और आपकी बातों को नहीं सुनते तो उन्हें सही-गलत सिखाने के लिए काफी धैर्य की जरूरत होती है। ऐसे बच्चे जब एक्टिव होंगे तो नहीं सुनेंगे। इसलिए बच्चों से नाइट टॉक करें। बच्चे के साथ इमोशनल कनेक्ट होने के लिए रात को सोते वक्त बच्चे से बात करें।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN