Home  लाइफस्टाइल समाचार डॉक्टर की चेतावनी: पेट भरा होने का मतलब पोषण नहीं! जानें कैसे...

डॉक्टर की चेतावनी: पेट भरा होने का मतलब पोषण नहीं! जानें कैसे ‘अदृश्य भूख’ शिशु के मानसिक- शारीरिक विकास पर डालती है असर

14
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

गर्भावस्था का समय शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, जिसमें हर एक पोषक तत्व एक अहम भूमिका निभाता है। शरीर में इन विटामिन और मिनरल्स की कमी होने पर शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास पर गहरा असर पड़ सकता है।

मां की कोख में पल रहा शिशु अपनी हर सांस और हर कोशिका के निर्माण के लिए पूरी तरह मां के शरीर पर निर्भर होता है। गर्भावस्था केवल ‘दो लोगों के लिए खाने’ का नाम नहीं है, बल्कि यह शरीर में सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micro-nutrients) के एक सटीक संतुलन का समय है। जब हम कैलोरी तो भरपूर लेते हैं लेकिन विटामिन और मिनरल्स को भूल जाते हैं, तो जन्म लेती है ‘अप्रत्यक्ष भूख’ (Hidden Hunger)-एक ऐसी अदृश्य कमी जो शिशु के भविष्य की नींव कमजोर कर सकती है। बता दें, गर्भावस्था का समय शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, जिसमें हर एक पोषक तत्व एक अहम भूमिका निभाता है। शरीर में इन विटामिन और मिनरल्स की कमी होने पर शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास पर गहरा असर पड़ सकता है।

गायनेकोलॉजिस्ट एवं ऑब्सटेट्रिशियन डॉ. श्वेता गर्ग कहती हैं कि बढ़ते बच्चे के लिए विटामिन, मिनरल्स, प्रोटीन और हेल्दी फैट बहुत जरूरी होते हैं। जो अंगों के निर्माण, मस्तिष्क के विकास और मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली बनाने में मदद करते हैं। लेकिन अकसर देखा जाता है कि कई महिलाएं उस समय गर्भधारण करती हैं, जब उनके शरीर में पहले से ही कई तरह के पोषक तत्वों की कमी होती है। आंकड़ों के अनुसार दुनियाभर की महिलाओं में एनीमिया की शिकायत सबसे ज्यादा देखी जाती है। इसके अलावा विटामिन डी और बी12 की कमी भी बहुत से लोगों को है। अगर गर्भधारण के समय ये कमियां पहले से ही शरीर में मौजूद हों, तो गर्भ में पल रहे शिशु को विकास के लिए जरूरी पोषक तत्व पूरी तरह नहीं मिल पाते हैं, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास पूरी तरह से नहीं हो पाता है।

शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास पर पोषक तत्वों का असर

बच्चे को महत्वपूर्ण पोषक तत्व न मिलने पर शिशु के विकास में रुकावटें आती हैं, जिससे उसके शारीरिक और मानसिक विकास पर विपरीत एवं गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। आइए जानते हैं कैसे-

आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी12: ये विटामिन और मिनरल्स मां को एनीमिया और थकान से बचाकर रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाते हैं, जो शिशु तक ऑक्सीजन पहुंचाती हैं। फोलिक एसिड और बी12 शिशु को न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट से बचाने के लिए बहुत जरूरी होते हैं। ये उनके शुरुआती न्यूरोलॉजिकल विकास में मदद करते हैं। इनकी कमी से बच्चों का मानसिक विकास प्रभावित होता है।

विटामिन डी और कैल्शियम: शिशु की हड्डियों के विकास में इन दोनों की अहम भूमिका है। इनकी कमी होने पर शिशु की हड्डियों का विकास ठीक से नहीं हो पाता है और हड्डियां स्थायी रूप से कमजोर हो सकती हैं। मां को विटामिन डी की कमी हो, तो गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे शिशु के विकास पर असर पड़ सकता है।

ओमेगा-3 फैटी एसिट (डी.एच.ए) और कोलीनः ये शिशु के मस्तिष्क और आंखों के विकास के लिए जरूरी होते हैं। डी.एच.ए मानसिक और देखने की क्षमता के लिए जरूरी होता है, वहीं कोलीन याददाश्त और सीखने की क्षमता का विकास करता है, जिससे न्यूरोलॉजिकल संरचनाओं को मदद मिलती है।

आयोडीनः शिशु के विकसित होते हुए दिमाग और नर्वस सिस्टम के लिए आयोडीन बहुत आवश्यक है। यह थायरॉयड हार्मोन के उत्पादन में मुख्य भूमिका निभाता है। आयोडीन की कमी से न्यूरोलॉजिकल विकास पर गहरा असर पड़ सकता है।

जिंक और प्रोटीनः जिंक कोशिकाओं के निर्माण, प्रतिरक्षा, और डीएनए सिंथेसिस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो शिशु के विकास के लिए बहुत जरूरी हैं। प्रोटीन शरीर का बिल्डिंग ब्लॉक है, जो सभी टिश्यू और अंगों के निर्माण के लिए आवश्यक है।

अगर गर्भ के दौरान इन पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, तो उसके बहुत गंभीर परिणाम हो सकते हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों में यह सामने आया है कि इन पोषक तत्वों की कमी होने पर शिशु के शारीरिक विकास, प्रतिरक्षा प्रणाली और मानसिक विकास में दिक्कतें आती हैं। गर्भ के दौरान होने वाली पोषण की कमी ऐसी स्थायी समस्याएं उत्पन्न कर सकती है, जिससे बच्चे का स्वास्थ्य आजीवन प्रभावित रहता है, वह ठीक से वृद्धि नहीं कर पाता है और अपनी पूरी क्षमता का विकास नहीं कर पाता है। ऐसे में संतुलित और पोषण से भरपूर आहार मां को देने से पोषण की कमी को रोका जा सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN