Home  लाइफस्टाइल समाचार डिटॉक्स जूस का सच: वजन घटाने का जादुई शॉर्टकट या सेहत से...

डिटॉक्स जूस का सच: वजन घटाने का जादुई शॉर्टकट या सेहत से खिलवाड़? एक्सपर्ट ने तोड़े बड़े मिथक

5
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

हम शरीर को अंदर से साफ करके पतला होने की चाहत में जिस डिटॉक्स जूस को पी रहे हैं, हकीकत में वह आपके शरीर को फायदा कम और नुकसान ज्यादा पहुंचा सकता है। आइए जानते हैं कि वजन घटाने के इस ‘लिक्विड शॉर्टकट’ के पीछे छिपा असली साइंस क्या कहता है।

क्या डिटॉक्स जूस रातों-रात वजन घटाने वाली कोई जादुई छड़ी है? अगर आप भी सुबह उठकर कड़वे और बेस्वाद जूस के गिलास को ‘फैट कटर’ मानकर डाइट का हिस्सा बना रहे हैं, तो जरा रुकिए। बेंगलुरु के एक फेमस पोषण विशेषज्ञ ने जूस क्लींजिंग (Juice Cleansing) के नाम पर चल रहे इस ट्रेंड की कलई खोलते हुए कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। अक्सर हम शरीर को अंदर से साफ करके पतला होने की चाहत में जिस डिटॉक्स जूस को पी रहे हैं, हकीकत में वह आपके शरीर को फायदा कम और नुकसान ज्यादा पहुंचा सकता है। आइए जानते हैं कि वजन घटाने के इस ‘लिक्विड शॉर्टकट’ के पीछे छिपा असली साइंस क्या कहता है और एक्सपर्ट्स इसे लेकर इतने फिक्रमंद क्यों हैं।

क्या कहती है एक्सपर्ट

शारदाकेयर-हेल्थसिटी की पोषण विशेषज्ञ डॉ. गरिमा तिवारी कहती हैं कि आजकल सोशल मीडिया पर ‘डिटॉक्स जूस’ को वजन घटाने, शरीर से टॉक्सिन निकालने और पाचन सुधारने के दावे के साथ जादुई उपाय की तरह पेश किया जाता है। । लेकिन वास्तविकता इससे काफी अलग होती है। इस तरह के जूस का कोई ठोस वैज्ञानिक सबूत नहीं है जो यह साबित करता हो कि केवल जूस पीने से शरीर में जमा ‘टॉक्सिन’ बाहर निकलते हैं या वजन स्थायी रूप से कम हो सकता है। हमारा शरीर पहले से ही लिवर, किडनी, फेफड़े और पाचन तंत्र के माध्यम से खुद को स्वाभाविक रूप से डिटॉक्स करता है। उसे इसके लिए किसी तरह के जूस की जरूरत नहीं होती है।

डिटॉक्स जूस क्लींजिंग से वजन क्यों घटता है?

जूस डाइट से कम हुआ वजन असल में ‘फैट लॉस’ नहीं, बल्कि शरीर से पानी (Water weight) और जमा ऊर्जा (Glycogen) का कम होना होता है। केवल जूस पीने से शरीर को पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर नहीं मिलते, जिससे मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है। नतीजा, जैसे ही आप सामान्य भोजन पर लौटते हैं, खोया हुआ वजन तेजी से वापस आ जाता है। यह स्थायी समाधान नहीं, बल्कि शरीर को थकाने वाला एक ‘लिक्विड शॉर्टकट’ है।

डिटॉक्स जूस से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई

डिटॉक्स जूस को लेकर किए जा रहे दावों की असल सच्चाई बताने के लिए बेंगलुरु के एस्टर आरवी अस्पताल में वरिष्ठ ​​पोषण विशेषज्ञ अदिति प्रसाद आप्टे ने कुछ मिथकों की सच्चाई से पर्दा हटा दिया है।

मिथक 1: जूस से पोषक तत्व बेहतर सोखते हैं

ताजे फलों और सब्जियों के रस से पोषक तत्वों का अवशोषण फाइबर युक्त साबुत फलों और सब्जियों की तुलना में शरीर के लिए आसान होता है।

सच्चाई- इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। बिना फाइबर के पाचन तंत्र धीमा हो जाता है और आंतों (Gut) का स्वास्थ्य बिगड़ता है।

मिथक 2: जूस फास्ट से बीमारियां ठीक होती हैं

सच्चाई- यह खतरनाक हो सकता है। जूस क्लींज डायबिटीज या किडनी की बीमारियों को बदतर बना सकता है। जूस दवा का विकल्प नहीं है। किसी पुरानी बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर से सलाह लें, जूस को दवा न समझें।

मिथक 3: जूस क्लींजिंग डीएनए (DNA) को रीसेट करता है

सच्चाई- यह पूरी तरह छद्म विज्ञान (Pseudoscience) है। कोई भी जूस आपके जीन को रीसेट या कोशिकाओं को ‘ठीक’ नहीं कर सकता। यह एक मिथक है, जिसका कोई चिकित्सीय आधार नहीं है।

डिटॉक्स जूस शरीर को कई तरह के विटामिन्स देता है

सब्जियों और फलों के जूस लेने से कई विटामिन मिलते हैं, पर उनमें मौजूद फाइबर निकल जाते हैं, जो पाचन और ब्लड शुगर नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दरअसल, जूस निकालने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण फाइबर बाहर निकल जाता है। फाइबर पाचन सुधारने और ब्लड शुगर को स्थिर रखने के लिए अनिवार्य है। फाइबर के बिना जूस पीने से पेट भरा हुआ महसूस नहीं होता, जिससे आपको जल्दी भूख लग सकती है। केवल जूस पर निर्भर रहने से शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। जूस विटामिन का अच्छा स्रोत तो है, लेकिन यह साबुत फल और सब्जियों का विकल्प नहीं हो सकता। बेहतर स्वास्थ्य के लिए इन्हें चबाकर खाना ही सबसे फायदेमंद है।

डिटॉक्स जूस के साइड इफेक्ट्स

डिटॉक्स जूस में कम कैलोरी, कम प्रोटीन और फाइबर न होने के कारण खून में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ने के साथ कमजोरी, चक्कर आना जैसे लक्षण दिख सकते हैं। कुछ मामलों में, विशेषकर डायबिटीज और किडनी जैसी स्थितियों वाले लोगों के लिए, यह जोखिम और बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में बिना डॉक्टर की सलाह के डिटॉक्स प्लान अपनाना नुकसानदायक भी हो सकता है।

जूस कब और कैसे है उपयोगी?

जूस को ‘भोजन’ नहीं बल्कि विटामिन और एंटीऑक्सिडेंट्स का एक अतिरिक्त स्रोत मानकर साबुत अनाज, प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स के साथ ही लें। इसके अलावा सिर्फ फ्रेश जूस ही पिएं ना कि पैकेज्ड जूस, ताजा जूस ही , शरीर को पोषक तत्व प्रदान करता है।

बेहतर और सुरक्षित विकल्प

-अपनी डाइट में साबुत अनाज, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स को प्राथमिकता दें।

-पर्याप्त पानी और ताजे फल-सब्जियां आपके लिवर और किडनी को प्राकृतिक रूप से साफ (Cleanse) करने में मदद करते हैं।

-नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधि वजन प्रबंधन के लिए किसी भी ‘शॉर्टकट’ से बेहतर है।

सलाह

शरीर को बाहरी ‘डिटॉक्स’ की जरूरत नहीं होती; एक संतुलित थाली और नियमित वर्कआउट ही सबसे सुरक्षित और स्थायी समाधान है। यह सिर्फ वजन घटाने में मदद नहीं करता, बल्कि लिवर और किडनी जैसे डिटॉक्स सिस्टम को भी प्राकृतिक रूप से सपोर्ट करता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN