Source :- LIVE HINDUSTAN
अब्बास अराघची ने आज की शत्रुता की जड़ों को 1979 की इस्लामी क्रांति से जोड़ा, जिसने अमेरिका-समर्थित शाह को सत्ता से हटा दिया और पश्चिमी देशों के साथ गठबंधन वाली राजशाही को इस्लामी गणराज्य से बदल दिया। इससे वाशिंगटन और उसके सहयोगियों के साथ ईरान के संबंध मौलिक रूप से बदल गए।
अमेरिका और ईरान की बीच तनाव जारी है। समय के साथ अमेरिका ईरान के प्रति अधिक आक्रामक रुख अपना रहा है। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या यह शत्रुता हमेशा से मौजूद रही है? इस पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने देश के प्रति दशकों से चली आ रही अमेरिकी शत्रुता का स्पष्ट स्पष्टीकरण देते हुए इसे 1979 की इस्लामी क्रांति और इजरायली लॉबियों द्वारा पोषित अविश्वास के निरंतर चक्र से जोड़ा है। इंडिया टुडे से बातचीत में ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान का मानना है कि अमेरिकी नीति, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली नीति भी शामिल है। ईरानी समाज के साथ सीधे जुड़ाव के बजाय गलतफहमियों और बाहरी प्रभावों से बनी हुई है।
अब्बास अराघची ने आज की शत्रुता की जड़ों को 1979 की इस्लामी क्रांति से जोड़ा, जिसने अमेरिका-समर्थित शाह को सत्ता से हटा दिया और पश्चिमी देशों के साथ गठबंधन वाली राजशाही को इस्लामी गणराज्य से बदल दिया। इससे वाशिंगटन और उसके सहयोगियों के साथ ईरान के संबंध मौलिक रूप से बदल गए। उन्होंने कहा कि सब कुछ ईरान में इस्लामी क्रांति से शुरू हुआ। मुझे लगता है कि अमेरिकियों ने यह समझने में विफलता दिखाई कि ऐसा क्यों हुआ। इसलिए उन्होंने इसके खिलाफ शत्रुता शुरू कर दी। उन्होंने तख्तापलट, युद्ध और प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान को तब से प्रतिस्पर्धी दबाव का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि पिछले 47 वर्षों में हम उनके शत्रुतापूर्ण रवैये के शिकार रहे हैं। उन्होंने हर संभव प्रयास किया। कई बार तख्तापलट की कोशिश की। सद्दाम हुसैन को हमारे खिलाफ आठ साल का युद्ध थोपने में मदद की। पिछले साल एक और युद्ध छेड़ा गया। हर तरह के प्रतिबंध लगाए गए। अधिक से अधिक दबाव डाला गया। और वे असफल रहे।
ईरान ने गलत सूचना फैलाने के लिए इजरायली लॉबियों को जिम्मेदार ठहराया। ईरानी मंत्री ने कहा कि अमेरिका में ईरान के बारे में धारणा प्रत्यक्ष समझ के बजाय बाहरी कथनों से बनी है। उन्होंने कहा, क्योंकि उनके पास ईरान और ईरानी लोगों के बारे में कोई वास्तविक जानकारी नहीं है। और उन्हें ज्यादातर इजरायली लॉबियों द्वारा चलाए जा रहे गलत सूचना अभियानों से गुमराह किया जाता है। अराघची ने कहा कि अगर अमेरिका अपनी नीति बदलता है तो ईरान संबंधों में अलग दिशा के लिए खुला है। बातचीत के क्रम में उन्होंने कहा कि उम्मीद करते हैं कि हम अपने दृष्टिकोण को बदल सकते हैं और एक-दूसरे के साथ व्यवहार करने का बेहतर तरीका ढूंढ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर वाशिंगटन सम्मानजनक दृष्टिकोण अपनाता है तो संबंध सुधर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि बातचीत का एकमात्र समाधान ईरानी लोगों से सम्मान की भाषा में बात करना है। अगर वे उस भाषा का प्रयोग करेंगे, तो उन्हें परिणाम दिखेंगे। उन्होंने आगे कहा कि हम भी उनसे उसी भाषा में बात करेंगे। इस दौरान चेतावनी देते हुए कहा कि दमनकारी नीतियों से टकराव बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर वे दबाव और बल प्रयोग की भाषा का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो परिणाम वही होगा जो हम देख रहे हैं।
ईरानी विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब तेहरान और वाशिंगटन जिनेवा में ओमान की मध्यस्थता से अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता के तीसरे दौर की तैयारी कर रहे हैं, और सैन्य तनाव फिर से बढ़ गया है।
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