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जेलेंस्की ने पुतिन को बताया ‘युद्ध का गुलाम’, हथियारों की डिलीवरी पर क्या बोले यूक्रेनी राष्ट्रपति?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को युद्ध का गुलाम करार देते हुए उनकी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि रूसी हमलों ने यूक्रेन के हर बिजली संयंत्र को नुकसान पहुंचाया है। जानें और उन्होंने क्या कहा…

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर तीखा हमला बोला और उन्हें ‘युद्ध का गुलाम’ करार दिया। इस दौरान उन्होंने खुलासा किया कि रूसी हमलों ने यूक्रेन के एक भी बिजली संयंत्र को नहीं छोड़ा, सभी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। युद्ध की चौथी वर्षगांठ नजदीक आते ही जेलेंस्की ने 1938 के म्यूनिख समझौते से तुलना करते हुए चेतावनी दी कि क्षेत्रीय रियायतें देने से शांति नहीं आएगी, बल्कि यह इतिहास की पुरानी गलती को दोहराने जैसा होगा। पश्चिम से हवाई रक्षा प्रणालियों की तेज डिलीवरी की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है, लेकिन मजबूत सुरक्षा गारंटी के बिना कोई समझौता भरोसेमंद नहीं होगा।

जेलेंस्की ने पुतिन पर बोला हमला

यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को ‘युद्ध का गुलाम’ करार देते हुए उनकी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि रूसी हमलों ने यूक्रेन के हर बिजली संयंत्र को नुकसान पहुंचाया है। जेलेंस्की ने वर्तमान में रूस और यूक्रेन के बीच क्षेत्रीय रियायतों को लेकर चल रही बातचीत की तुलना 1938 के म्यूनिख समझौते से की, जब हिटलर ने द्वितीय विश्व युद्ध शुरू होने से एक साल पहले यूरोपीय शक्तियों से क्षेत्रीय रियायतें हासिल करने के लिए दबाव डाला था।

जेलेंस्की ने आगे कहा कि इस युद्ध में सैकड़ों हजारों लोग मारे गए हैं, पूर्वी यूक्रेन तबाह हो चुका है और लाखों लोग अपना घर छोड़कर भागने को मजबूर हुए हैं। मॉस्को के हमलों ने यूक्रेन के बिजली ढांचे को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे लाखों लोग ठंड में बेहाल हो गए हैं। कीव और उसके पश्चिमी सहयोगी मॉस्को पर आरोप लगाते हैं कि वह जानबूझकर ऊर्जा ग्रिड पर हमले करके यूक्रेन की आबादी को ठंड में ठप करने की कोशिश कर रहा है। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन में एक भी ऐसा बिजली संयंत्र नहीं बचा है जो रूसी हमलों से क्षतिग्रस्त न हुआ हो। एक भी नहीं।

युद्ध खत्म करने के लिए हर संभव प्रयास

बता दें कि रूस और यूक्रेन अगले सप्ताह अमेरिका की मध्यस्थता में बातचीत करेंगे। जेलेंस्की ने कहा कि कीव युद्ध खत्म करने के लिए ‘हर संभव प्रयास’ कर रहा है। गौरतलब है कि रूस ने यूक्रेन से डोनेट्स्क क्षेत्र से पीछे हटने की मांग की है और चाहता है कि कीव उन क्षेत्रों पर उसके दावे को मान्यता दे, जिन पर रूस का कब्जा है। यूक्रेन ने अपने पूर्वी क्षेत्रों को सौंपने से इनकार कर दिया है। अब तक की बातचीत के बारे में जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिकी अक्सर रियायतों के मुद्दे पर लौट आते हैं, और ज्यादातर चर्चा केवल यूक्रेन के संदर्भ में ही होती है। उन्होंने मौजूदा वार्ता और 1938 के म्यूनिख समझौते के बीच समानताएं बताईं, जब यूरोपीय शक्तियों ने हिटलर को चेकोस्लोवाकिया का हिस्सा लेने दिया, जिसके एक साल बाद द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ गया।

चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि यह मानना भ्रम होगा कि यूक्रेन को विभाजित करके इस युद्ध को भरोसेमंद तरीके से खत्म किया जा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे यह भ्रम था कि चेकोस्लोवाकिया का बलिदान यूरोप को बड़े युद्ध से बचा लेगा। उन्होंने कहा कि कीव युद्ध समाप्त करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है, लेकिन व्यवहार्य सुरक्षा गारंटी ही समझौते तक पहुंचने और भविष्य में रूसी आक्रामकता को रोकने का एकमात्र तरीका है।

पश्चिमी सहयोगियों से राजनीतिक फैसले लेने का आह्वान

जेलेंस्की ने कहा कि रूस के साथ कोई भी ऐसी खामी नहीं छोड़नी चाहिए जिसका इस्तेमाल वह फिर से युद्ध शुरू करने के लिए कर सके। उन्होंने दोहराया कि अगर यूरोपीय देशों को बातचीत की मेज पर जगह मिले तो युद्ध खत्म होने की संभावना ज्यादा होगी, जिसका रूस विरोध कर रहा है। वहीं, कूटनीतिक क्षेत्र में कोई खास सफलता न दिखने पर जेलेंस्की ने पश्चिमी सहयोगियों से तेजी से राजनीतिक फैसले लेने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि हथियारों का विकास राजनीतिक निर्णयों से कहीं ज्यादा तेजी से हो रहा है। उन्होंने बताया कि रूस द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ईरान निर्मित शाहेद ड्रोन अब कहीं अधिक घातक हो चुके हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN