Source :- LIVE HINDUSTAN
फरवरी के आंकड़ों में उछाल असहज करने वाला है। बाजार शांत हैं, लेकिन आंकड़े चिंता की लकीरें खींच रहे हैं। सूचकांक बता रहा है कि दुनियाभर में व्यापार नीति में अस्थिरता, भू-राजनीतिक संकट, मौद्रिक नीति में दरारें और संस्थाओं में अविश्वास काफी हद तक बढ़ गया है।
दुनियाभर में अनिश्चितता को मापने वाला सूचकांक फरवरी 2026 में 106,862 अंक के अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंच चुका है। तीन दशक में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचे सूचकांक के आंकड़ों में न केवल तेज उछाल है, बल्कि यह 2001 के वर्ड ट्रेड टावर हमले, 2003 के इराक युद्ध, 2008 के आर्थिक संकट और 2020 के कोरोना महामारी संकट से कहीं ऊपर निकल चुका है।
यह सूचकांक 143 अर्थव्यवस्थाओं का अध्ययन करने वाली इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट के तिमाही रिपोर्टों में अनिश्चितता के विभिन्न पहलुओं का अनुसरण करता है। इसमें सोशल मीडिया के शोर-गुल पर ध्यान नहीं दिया जाता और न ही उपभोक्ताओं की खपत के ढर्रे पर नजर रखी जाती है। इसमें जमीनी स्तर पर मौजूदा आर्थिक, राजनीतिक और वित्तीय जोखिमों को लेकर प्रोफेशनल्स की विश्लेषणात्मक रिपोर्टों का आकलन किया जाता है।
फरवरी का उछाल असहज करने वाला
फरवरी के आंकड़ों में उछाल असहज करने वाला है। बाजार शांत हैं, लेकिन आंकड़े चिंता की लकीरें खींच रहे हैं। सूचकांक बता रहा है कि दुनियाभर में व्यापार नीति में अस्थिरता, भू-राजनीतिक संकट, मौद्रिक नीति में दरारें और संस्थाओं में अविश्वास काफी हद तक बढ़ गया है।
इसके साथ ही हैरान करने वाली स्थिति यह बन रही हैं कि दुनियाभर के वित्तीय बाजार इन संकेतकों से अछूते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी नैस्डेक, एसएंडपी और डॉओ जोन्स नए शिखर बना रहे हैं। सोना 5000 डॉलर पार कर चुका है, अमेरिकी डॉलर सूचकांक कई साल के निचले स्तर यानी 95 पर आ गिरा है।
टैरिफ अब आर्थिक हथियार
विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ अब केवल व्यापार संतुलन का साधन नहीं रहे, बल्कि भू-राजनीतिक दबाव का जरिया बन गए हैं। वर्ष 2025 में वैश्विक स्तर पर टैरिफ दरों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें अमेरिका द्वारा लगाए गए उपाय प्रमुख रहे। इन कदमों का सबसे अधिक असर विनिर्माण क्षेत्र पर पड़ा।
ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक उपकरण जैसे सेक्टरों को ऊंचे आयात शुल्क का सामना करना पड़ा। छोटे और निर्यात-निर्भर देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर इसका प्रभाव अधिक गंभीर रहा, क्योंकि उनकी विकास दर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर अधिक निर्भर करती है।
नीति बदलावों से बढ़ी कारोबारी अनिश्चितता
बार-बार बदलती व्यापार नीतियां कंपनियों के लिए दीर्घकालिक निवेश योजनाएं बनाना कठिन बना रही हैं। जब टैरिफ व्यवस्था राजनीतिक चक्रों के साथ बदलती रहती है, तो पूंजी निवेश, उत्पादन विस्तार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की रणनीति प्रभावित होती है।
कोविड-19 महामारी के बाद कंपनियों ने सप्लाई चेन का पुनर्गठन किया था, लेकिन अब नए टैरिफ और प्रतिबंधों के चलते उन्हें फिर से आपूर्ति नेटवर्क में बदलाव करना पड़ रहा है। इससे लागत बढ़ रही है और उत्पादन में देरी हो रही है।
2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि धीमी, अनिश्चितता से बढ़ी चिंता
संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार 2026 में वैश्विक जीडीपी वृद्धि दर केवल 2.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो महामारी-पूर्व औसत 3.2 प्रतिशत से काफी कम है। यूरोपीय संघ की वृद्धि दर 1.3 प्रतिशत और जापान की 0.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। धीमी वृद्धि का अर्थ है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के पास झटकों से निपटने के लिए कम गुंजाइश बचेगी। यदि कोई नया संकट उभरता है, तो सरकारों के पास राजकोषीय प्रोत्साहन के सीमित साधन होंगे।
अमेरिका में सतही तौर पर वृद्धि बेहतर दिख रही है, लेकिन संरचनात्मक चिंताएं उभर रही हैं। खपत वृद्धि मुख्य रूप से उच्च आय वर्ग तक सीमित है, भर्ती की रफ्तार धीमी है और टैरिफ के कारण आयातित वस्तुओं में महंगाई का दबाव बढ़ रहा है।
बीते तीन दशक के संकटों की वजह
2001 में आतंकवाद का झटका
2008 में वैश्विक वित्तीय तंत्र का संकट
2020 में महामारी थी प्रमुख कारण
2026 कई जोखिम एक साथ उभर रहे
सूचकांक अवधि
106,862 फरवरी 2026
79,904.3 जनवरी 2026
122,422.5 सिंतबर 2025
41,383.2 जनवरी 2025
56,223.6 मार्च 2020
57,518 मई 2019
SOURCE : LIVE HINDUSTAN



