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खाने-पीने की दुकानों के लिए नए नियम लागू करने की तैयारी, जद में आएंगे कितने कारोबारी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत लाइसेंस प्राप्त सभी दुकानों पर यह नियम लागू होगा। देश में एक करोड़ से अधिक खाद्य कारोबारों को लाइसेंस जारी किए गए हैं, जिनमें से लगभग 46 लाख से ज्यादा सक्रिय हैं।

देश में खाद्य सुरक्षा को और मजबूत बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने प्रस्ताव रखा है कि अब खाद्य कारोबारियों को अपने प्रोडक्शन और स्टोरेज का डेली रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। इससे इनकी निगरानी करना आसान हो जाएगा। मामले से जुड़े एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

उनके मुताबिक, नियामक ने अभी इन नए नियमों के लागू होने की तारीख तय नहीं की है और 5 अप्रैल 2026 तक इस प्रस्ताव पर सुझाव आमंत्रित किए हैं। इन नई व्यवस्था से देश के लगभग 50 लाख सक्रिय खाद्य कारोबारियों पर नए नियम लागू हो जाएंगे। नए प्रस्ताव के तहत खाद्य व्यवसाय संचालकों को कच्चे माल, इस्तेमाल की गई सामग्री, बन रही वस्तुओं और तैयार उत्पादों का दैनिक हिसाब रखना होगा।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता, स्रोत और भंडारण की जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सके। सरकार का मानना है कि इससे खाद्य सुरक्षा निगरानी मजबूत होगी और यदि किसी उत्पाद में गड़बड़ी पाई जाती है तो उसका स्रोत जल्दी पता लगाया जा सकेगा।

सभी लाइसेंसियों पर लागू होगा नियम

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत लाइसेंस प्राप्त सभी इकाइयों पर यह नियम लागू होगा। देश में एक करोड़ से अधिक खाद्य कारोबारों को लाइसेंस जारी किए गए हैं, जिनमें से लगभग 46 लाख से ज्यादा सक्रिय हैं। वहीं, उद्योग संगठनों का कहना है कि बड़े संगठित कारोबार पहले से ही ऐसे रिकॉर्ड रखते हैं, इसलिए उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं होगी, लेकिन छोटे दुकानदारों, ढाबों और लघु इकाइयों के लिए यह अतिरिक्त बोझ बन सकता है।

उन्हें नए तरीके अपनाने, कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने और संभवतः डिजिटल व्यवस्था पर खर्च करना पड़ सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय में यह कदम फायदेमंद साबित होगा। इससे भारत की खाद्य व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगी और निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी।

आम लोगों को क्या होगा फायदा

– इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा।

– बाजार में मिलने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा बेहतर होगी।

– मिलावट या खराब सामान मिलने की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना आसान होगा।

– बीमारियों और खाद्य विषाक्तता की घटनाएं कम हो सकती हैं।

– सरकार खाद्य से जुड़े विवादों और शिकायतों का जल्दी समाधान कर सकेगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN