Source :- LIVE HINDUSTAN
ईसाई धर्म का पालन कर रहे लोगों के लिए ईस्टर संडे काफी खास होता है। इस दिन लोग चर्च में मोमबत्ती जलाने के साथ अपने लोगों के साथ मिल कर खाना खाते हैं। जिसमें अंडे जरूर होते हैं। जानिए इस त्योहार का अंडो से कनेक्शन।
ईस्टर संडे ईसाई धर्म का पालन कर रहे लोगों के लिए बेहद खास है। ऐसा इसलिए क्याोंकि मान्यताओं के अनुसार गुड फ्राइडे के दिन प्रभु यीशु को सूली पर चढ़ाया गया था और उसके तीसरे दिन यानी रविवार को वे अपनी कब्र से जीवित वापस लौट आए थे। तभी से गुड फ्राइडे के बाद आने वाले रविवार को यीशु के पुनर्जन्म की खुशी में ईस्टर मनाया जाता है। ईस्टर के दिन अंडे का होना एक परंपरा है। आइए जानते हैं ईस्टर और अंडे का कनेक्शन।
ईस्टर और अंडे का कनेक्शन
पुराने समय में लेंट यानी ईस्टर से पहले के 40 दिन के नियम आज की तुलना में कहीं ज्यादा सख्त थे। लोगों को न केवल मांस बल्कि अंडे और दूध से बनी चीजों को खाने की भी मनाही होती थी। हालांकि, इस समय पर भी मुर्गियां अंडे देना बंद नहीं करती थीं। ऐसे में अंडों को बर्बाद होने से बचाने के लिए लोग उन्हें उबालकर सुरक्षित रखते थे। ईस्टर संडे आते-आते, घरों में खूब सारे अंडे जमा हो जाते थे। क्योंकि अंत में इन्हें फिर से खाने की इजाजत मिल जाती इसलिए ये अंडे ईस्टर सेलिब्रेशन का जरूरी हिस्सा बन गए।
कैसे मनाया जाता है ईस्टर संडे
ईसाई धर्म में माना जाता है कि प्रभू यीशु ने मानवता के पापों के लिए अपना बलिदान दिया और फिर दोबारा जीवित होकर लोगों को जीवन की आशा दी। इस दिन को शांतिपूर्ण तरीके से मनाया जाता है।
-ईस्टर की शुरुआत सुबह की प्रार्थना से होती है।
-अंडे को नए जीवन का प्रतीक माना जाता है। इसलिए लोग अंडों को पेंट करके सजाते हैं और फीस्ट में शामिल करते हैं।
-इस दिन बच्चों के लिए अंडे ढूंढने का खेल भी आयोजित किया जाता है।
-चर्च और घरों में मोमबत्तियां जलाई जाती हैं।
-लोग एक साथ मिलकर खाना खाते हैं और चॉकलेट एग्स बांटते हैं।
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