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व्हाइट हाउस ने ईरान को चेतावनी दी है कि अमेरिका के साथ समझौता करना उसके लिए “बहुत समझदारी” होगी.
यह बयान ऐसे समय आया है जब खबरें हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस्लामी गणराज्य के खिलाफ नए सैन्य कदमों पर विचार कर रहे हैं.
प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक समाचार ब्रीफिंग में कहा कि ट्रंप अभी भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीतिक समाधान की उम्मीद कर रहे हैं.
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका क्षेत्र में दूसरा युद्धपोत भेज रहा है.
स्विट्ज़रलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति की खबर आने के एक दिन बाद यह बयान दिया गया.
अमेरिकी मीडिया ने बुधवार को रिपोर्ट किया कि ट्रंप ने अपने सलाहकारों के साथ हमले के विकल्पों पर चर्चा की है, और ईरान पर अमेरिकी हमला शनिवार तक हो सकता है.
पिछले साल गर्मियों में अमेरिकी सेना ने ईरान की तीन परमाणु सुविधाओं पर हमले किए थे.
सूत्रों ने बीबीसी के अमेरिकी सहयोगी सीबीएस न्यूज़ को बताया कि ट्रंप ने अभी तक हमले को लेकर अंतिम निर्णय नहीं लिया है और ईरान के साथ चल रही बातचीत को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप बताया गया है.
लेविट ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा कि “ईरान पर हमले के पक्ष में कई कारण और तर्क दिए जा सकते हैं.”
उन्होंने जून में हुए अमेरिकी हमलों का उल्लेख करते हुए कहा, “ईरान के लिए राष्ट्रपति ट्रंप और उनके प्रशासन के साथ समझौता करना बहुत समझदारी होगी.”
‘कई मुद्दों पर मतभेद’
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हालांकि मंगलवार को जिनेवा में हुई अप्रत्यक्ष वार्ता से कोई बड़ा समाधान सामने आता नहीं दिखा, फिर भी दोनों पक्षों ने संकेत दिया कि सही दिशा में कुछ कदम बढ़ाए गए हैं.
ईरान ने कहा कि उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद सुलझाने की दिशा में अमेरिका के साथ एक समझ बनी है.
लेकिन विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने यह भी कहा कि अभी और काम किया जाना बाकी है.
अमेरिका ने कहा कि “प्रगति हुई है” और ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी, जो इन वार्ताओं में मध्यस्थता कर रहे हैं, ने कहा कि साझा लक्ष्यों और तकनीकी मुद्दों पर “अच्छी प्रगति” के साथ बातचीत ख़त्म हुई.
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जिनेवा वार्ता के बारे में पूछे जाने पर व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने कहा कि अमेरिकाऔर ईरान में अब भी कुछ अहम मुद्दों पर ‘काफ़ी असहमति’ है.
लेविट ने कहा, “मुझे लगता है कि आपने कल प्रशासन और विदेश विभाग से सुना कि थोड़ी प्रगति हुई है, लेकिन कुछ मुद्दों पर हम अब भी बहुत दूर हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “मेरा मानना है कि अगले कुछ हफ्तों में ईरानी पक्ष और अधिक विवरण के साथ हमारे पास वापस आएगा, और राष्ट्रपति इस स्थिति पर नजर बनाए रखेंगे.”
लेविट ने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या अमेरिका के निर्णय में इसराइल शामिल होगा.
ईरान का कहना है कि वह अपनी परमाणु गतिविधियों और संभावित आर्थिक प्रतिबंधों में राहत पर चर्चा पर फ़ोकस करना चाहता है, जबकि अमेरिका पहले संकेत दे चुका है कि वह बातचीत में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को भी शामिल करना चाहता है.
अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों को संदेह है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में बढ़ रहा है, जिसे ईरान हमेशा से नकारता रहा है.
अमेरिका की सैन्य मौजूदगी, ईरान की तैयारी
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अमेरिका ईरान के पास के समुद्री क्षेत्रों में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है, और उपग्रह तस्वीरें दिखाती हैं कि इस्लामी गणराज्य ईरान भी संवेदनशील सैन्य ठिकानों को मजबूत कर रहा है.
बीबीसी वेरिफाई ने पुष्टि की है कि अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन, ईरान के क़रीब पहुंच चुका है.
ये पोत मिसाइल विध्वंसकों और दर्जनों लड़ाकू विमानों से लैस है.
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोत यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड को भी मध्य पूर्व भेजा है. इसके अगले तीन हफ्तों के भीतर क्षेत्र में पहुँचने की उम्मीद है.
सीबीएस को एक अमेरिकी अधिकारी और एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बताया कि क्षेत्र में तैनात सभी अमेरिकी सैन्य बलों के मार्च के मध्य तक पूरी तरह तैनात होने की संभावना है.
इस बीच ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह ख़ामेनेई ने एक्स पर एक के बाद एक कई पोस्ट कर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दी है.
उन्होंने एक्स पर लिखा, “अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि 47 सालों से अमेरिका इस्लामिक रिपब्लिक को ख़त्म नहीं कर पाया है. ये अच्छा क़बूलनामा है. मैं कहता हूं हमें ना ख़त्म कर पाए हो, ना ही आगे ख़त्म कर पाओगे.”
इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह शुक्रवार को कहा था कि ईरान में सत्ता परिवर्तन ‘सबसे अच्छी चीज़ हो सकती है.’ इस बयान को ईरान के धार्मिक शासन तंत्र को हटाने के संदर्भ में देखा जा रहा है.
उन्होंने कहा, “47 सालों से वे सिर्फ बातें ही करते रहे हैं. इस बीच हमने बहुत सी ज़िंदगियां खो दी हैं.”
ख़ामेनेई ने अमेरिकी युद्धपोत का भी ज़िक्र करते हुए एक्स पर पोस्ट किया, “अमेरिका लगातार कह रहा है कि उसने ईरान की ओर एक युद्धपोत भेजा है. निश्चित तौर पर युद्धपोत एक ख़तरनाक चीज़ है. लेकिन युद्धपोत से ज़्यादा ख़तरनाक वो हथियार है जो ऐसे युद्धपोत को मारकर समंदर के तल में भेज देगा.”
खामेनेई ने अमेरिका पर वार्ता के नतीजे को पहले से तय करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया और कहा कि यह “गलत और मूर्खतापूर्ण काम” होगा.
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के जवाब में सोमवार को ओमान और ईरान के बीच खाड़ी में स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य में एक समुद्री अभ्यास शुरू किया.
यह जलडमरूमध्य एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग और खाड़ी के अरब देशों से तेल निर्यात का प्रमुख मार्ग माना जाता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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