Source :- LIVE HINDUSTAN
पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज सरन ने बताया, ‘अमेरिका पाकिस्तान को केवल संदेशों का माध्यम बनाकर इस्तेमाल कर रहा है। अगर जमीन पर कोई आक्रामक कार्रवाई होती है तो यूएस पाकिस्तान को अपने रास्ते में आने नहीं देगा।’
पश्चिम एशिया संघर्ष में पाकिस्तान मध्यस्थता की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। इसे लेकर पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज सरन ने साफ कहा कि इस्लामाबाद की भूमिका अभी तक केवल संदेश पहुंचाने तक सीमित है। अमेरिका ने साफ संकेत दिए हैं कि पाकिस्तान को आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी। सरन ने कहा कि अगर पाकिस्तान को शांति स्थापित करने का पूरा भरोसा होता तो उसे तीन अन्य देशों (मिस्र, तुर्की और सऊदी अरब) की मदद की जरूरत नहीं पड़ती। ये देश अनुभवी हैं और इनके साथ भारत के संबंध अच्छे हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक थिएटर करार दिया, जिसमें पाकिस्तान खुद को बीच में लाने की कोशिश कर रहा है।
पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज सरन ने एएनआई को दिए इंटरव्यू में बताया, ‘अमेरिका पाकिस्तान को केवल संदेशों का माध्यम बनाकर इस्तेमाल कर रहा है। अगर जमीन पर कोई आक्रामक कार्रवाई होती है तो यूएस पाकिस्तान को अपने रास्ते में आने नहीं देगा।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी नेतृत्व ट्रंप प्रशासन के साथ पुराने संबंधों का फायदा उठाना चाहता है, खासकर तालिबान सौदे के बाद। पाकिस्तान ने ईरान मुद्दे पर अपनी सेवाएं पेश की थीं, लेकिन वास्तविकता में उसकी भूमिका सीमित ही रहेगी।
पाकिस्तान के सामने कई चुनौतियां
पंकज सरन ने जोर दिया कि ईरान जैसे देश आसानी से नहीं झुकेंगे और संघर्ष जटिल है। सरन ने पश्चिम एशिया संकट की जटिलता पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि इजरायल-फिलिस्तीन समस्या दशकों से चली आ रही है और कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने इसे सुलझाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। चार देशों का समूह बनाना (सऊदी, मिस्र, तुर्की और पाकिस्तान) कोई चमत्कार नहीं करेगा। यह एक सुन्नी समूह है, जिसे ईरान स्वीकार नहीं करेगा।
पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने तुलना करते हुए कहा कि गाजा शांति बोर्ड बनते समय फिलिस्तीनियों के अधिकारों को नजरअंदाज किया गया था। उन्होंने भारत की भूमिका पर कहा कि नई दिल्ली वैश्विक मंच पर अहम खिलाड़ी है और पाकिस्तान से तुलना करना गलत है। भारत की भू-रणनीतिक स्थिति मजबूत है और आने वाले वर्षों में भारत-पाकिस्तान की प्रासंगिकता में असमानता बढ़ेगी। सरन ने कहा कि भारत दूसरा सबसे बड़ा ऊर्जा बाजार है और खाड़ी देशों के साथ उसके संबंध पाकिस्तान से कहीं बेहतर हैं। लाखों करोड़ डॉलर के व्यापार, तेल खरीद और प्रवासी भारतीयों के कारण खाड़ी देश भारत पर निर्भर हैं।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN



