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कीर्ति आज़ाद ने वर्ल्ड कप ट्रॉफी को मंदिर ले जाने पर उठाये सवाल, क्रिकेटर्स और नेताओं ने क्या कहा

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Source :- BBC INDIA

कीर्ती आज़ाद और ईशान किशन

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2 घंटे पहले

पढ़ने का समय: 5 मिनट

पूर्व क्रिकेटर और अब तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आज़ाद ने टी-20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी को मंदिर में ले जाने की आलोचना की है. उनके इस बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है.

1983 में वर्ल्ड कप विजेता भारतीय टीम के सदस्य रहे कीर्ति आज़ाद ने कहा है कि जीतने वाली टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी थे लेकिन ट्रॉफी मंदिर ले जाई गई. इंडियन टीम को इस पर शर्म आनी चाहिए.

आज़ाद के इस बयान के बाद चैंपियन टीम में शामिल ईशान किशन समेत कई पूर्व खिलाड़ियों और राजनीतिक नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है.

रविवार को भारत ने टी-20 वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड को 96 रन से हरा दिया था.

टी20 वर्ल्डकप की ट्रॉफी जीतने के बाद भारतीय टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव, कोच गौतम गंभीर और आईसीसी चेयरमैन जय शाह अहमदाबाद के एक हनुमान मंदिर पहुंचे थे. इस पर कीर्ति आज़ाद ने कमेंट किया था.

उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “शेम ऑन टीम इंडिया. हमने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में वर्ल्ड कप जीता था, हमारी टीम में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और सिख थे. हम ट्रॉफी को अपनी धार्मिक जन्मभूमि, अपनी मातृभूमि भारत हिंदुस्तान में लेकर आए. आख़िर भारतीय क्रिकेट ट्रॉफी को क्यों घसीटा जा रहा है?”

उन्होंने आगे लिखा, “मस्जिद क्यों नहीं? चर्च क्यों नहीं? गुरुद्वारा क्यों नहीं? यह टीम भारत का प्रतिनिधित्व करती है- सूर्यकुमार यादव या जय शाह के परिवार का नहीं! सिराज ने इसे कभी मस्जिद में प्रदर्शित नहीं किया. संजू इसे कभी चर्च में नहीं ले गए. यह ट्रॉफी हर धर्म के 140 करोड़ भारतीयों की है. यह किसी एक धर्म की जीत का जश्न नहीं है!”

ईशान किशन ने आज़ाद के कमेंट पर क्या कहा

ईशान किशन ने टी-20 वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में 25 गेंदों पर 54 रन बनाए थे

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पटना पहुंचे ईशान किशन ने एयरपोर्ट पर मीडिया से बात की. इस दौरान उनसे कीर्ति आजाद के कमेंट को लेकर सवाल किया गया, जिस पर उन्होंने कहा, “इतना अच्छा वर्ल्ड कप जीते. अच्छे सवाल आप लोग करिएगा. ये कीर्ति आज़ाद क्या बोले? इस पर मैं क्या बोलूं? कुछ अच्छा सवाल करिए.”

कांग्रेस सांसद तारिक़ अनवर ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “कीर्ति आज़ाद बिल्कुल सही हैं. जो कुछ उन्होंने कहा है उससे मैं पूरी तरह सहमत हूँ. ये हमारे यहां परंपरा नहीं रही है कि ट्रॉफी को लेकर मंदिर या मस्जिद या दूसरी जगह जाएं. ये गलत परंपरा की शुरुआत है.”

अहमदाबाद में हनुमान मंदिर के महंत ईश्वरदास महाराज ने कहा, “मैं कहना चाहता हूँ कि ये हमारी आस्था, श्रद्धा और दर्शन से जुड़ा है. लेकिन जो ये नहीं समझते वो इस पर सवाल उठाते हैं.”

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, “मैं नहीं जानता कि ये किसने किया, लेकिन भारत सनातनियों से जुड़ा है. भारत की पहचान क्रिश्चियन और मुसलमानों से नहीं है.”

शिव सेना के नेता कृष्णा हेगड़े ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “इसे धर्म से जोड़ना ठीक नहीं है. भारतीय टीम को ये आज़ादी है कि वे जहाँ ट्रॉफी ले जाना चाहते हैं, ले जा सकते हैं. उन्हें कीर्ति आज़ाद से परमिशन लेने की ज़रूरत नहीं है. कीर्ति आज़ाद को ऐसे भड़काऊ भाषण देकर समुदायों के बीच बंटवारे की कोशिश नहीं करनी चाहिए.”

पूर्व भारतीय स्पिन गेंदबाज और आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद हरभजन ने कहा कि भारतीय कप्तान और कोच के मंदिर जाने पर इस तरह के सवाल नहीं खड़े किए जाने चाहिए और यह उनकी आस्था है.

हरभजन ने कहा, ”उनकी बातें मत सुनिए. देखिए खेल और राजनीति को अलग रखिए. आपकी आस्था है आप मंदिर जाइए, गुरुद्वारे जाइए या कहीं भी जाइए. अगर वह कहीं गए भी हैं, तो यह उनकी इच्छा है.’

कौन हैं कीर्ति आज़ाद

कीर्ति आज़ाद

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ईएसपीएन क्रिकइंफो के मुताबिक दाएं हाथ के बल्लेबाज़ और ऑफ़ ब्रेक गेंदबाज़ कीर्ति आज़ाद ने भारत के लिए 7 टेस्ट मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने 135 रन बनाए.

आज़ाद ने 1981 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ वेलिंगटन में अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की थी.

वनडे मुक़ाबलों की बात करें तो उन्होंने टीम इंडिया की तरफ से पहला मुक़ाबले 6 दिसंबर 1980 को ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ खेला था.

उन्होंने 25 वनडे मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और 269 रन बनाए. वनडे में उनका सर्वोच्च स्कोर 39 रन (नाबाद) रहा.

कीर्ति आज़ाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज़्यादा कामयाबी नहीं मिली, पर वे 1980 लेकर 1990 के मध्य तक दिल्ली क्रिकेट के आधार स्तंभ रहे.

उनके नेतृत्व में ही दिल्ली ने 1991-92 में 16 साल के अंतराल के बाद रणजी ट्रॉफ़ी जीतने का कारनामा दिखाया था.

यह भी संयोग है कि दिल्ली जिन पांच मौक़ों पर रणजी चैंपियन बनी, उनमें खेलने वाले कीर्ति अकेले खिलाड़ी हैं.

कीर्ति आज़ाद 2002 से 2006 के बीच उत्तर क्षेत्र की ओर से राष्ट्रीय चयनकर्ता भी रहे.

यह वो दौर था जब एमएस धोनी, पार्थिव पटेल, एल बालाजी, आकाश चोपड़ा, इरफ़ान पठान, गौतम गंभीर और श्रीसंत जैसे क्रिकेटरों ने अपना डेब्यू किया था.

इसके अलावा कीर्ति आज़ाद इंडियन प्रीमियर लीग के भी कटु आलोचक रहे हैं.

उन्होंने इसे मैच फ़िक्सिंग को बढ़ावा देने वाला टूर्नामेंट बताया था. आईपीएल से जुड़े विवादों में उन्होंने यह भी कहा था कि बीसीसीआई से जुड़ाव होने पर उन्हें ग़ुस्सा भी आ रहा है और शर्म भी.

क्रिकेट से रिटायरमेंट लेने के बाद कीर्ति आज़ाद राजनीति में आ गए थे.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS