Source :- LIVE HINDUSTAN
फिल्म अभिनेता राजपाल यादव करीब 15 साल पुराने चेक बाउंस मामले में सलाखों के पीछे पहुंचे हैं। बता दें कि जब कोई व्यक्ति भुगतान के लिए चेक बैंक में जमा करता है और खाते में पर्याप्त रकम नहीं होने के कारण बैंक उसे रिजेक्ट कर देता है, तो उसे चेक बाउंस कहा जाता है।
फिल्म अभिनेता राजपाल यादव के जेल जाने के बाद चेक बाउंस से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। दरअसल, राजपाल यादव करीब 15 साल पुराने चेक बाउंस मामले में सलाखों के पीछे पहुंचे हैं। आज हम इस केस के जरिए समझेंगे कि चेक बाउंस सिर्फ एक वित्तीय चूक है या गंभीर कानूनी अपराध। इसके साथ ही यह भी जानने की कोशिश करेंगे कि इस लापरवाही से कितना बड़ा नुकसान हो सकता है।
क्या होता है चेक बाउंस?
जब कोई व्यक्ति भुगतान के लिए चेक बैंक में जमा करता है और खाते में पर्याप्त रकम नहीं होने के कारण बैंक उसे रिजेक्ट कर देता है, तो उसे चेक बाउंस कहा जाता है। हालांकि, कई बार साइन के मेल नहीं खाने पर या फिर गलत या एक्सपायर्ड तारीख होने की वजह से भी चेक बाउंस हो जाता है। चेक का फटा या खराब होना या ओवरराइटिंग और अकाउंट नंबर गलत होने की स्थिति में भी चेक बाउंस हो जाते हैं।
कैसे पता चलता है?
चेक बाउंस के ज्यादातर मामलों में बैंक ग्राहक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी पर अलर्ट मैसेज भेजता है। इसके अलावा बैंक एक चेक रिटर्न मेमो जारी करता है, जिसमें बाउंस का कारण, तारीख और चेक नंबर दर्ज होता है। अगर चेक अपर्याप्त रकम के कारण बाउंस होता है, तो आरोपी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चल सकता है। चेक बाउंस होने पर पीड़ित पक्ष आरोपी को एक कानूनी नोटिस भेज सकता है। कोटक बैंक की वेबसाइट के मुताबिक यह नोटिस चेक बाउंस होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर भेजा जाना चाहिए।
भुगतान का मिलता है मौका
चेक बाउंस मामले में आरोपी को बचाव का मौका मिलता है। आरोपी अपने बचाव में बैंक स्टेटमेंट, स्टॉप पेमेंट निर्देश, तकनीकी त्रुटि पेश कर सकता है। हालांकि, इरादतन चेक बाउंस की स्थिति में आरोपी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पीड़ित की ओर से नोटिस मिलने के बाद चेक जारी करने वाले व्यक्ति को 15 दिन के भीतर भुगतान करना होता है। यदि तय समय में भुगतान नहीं किया जाता, तो पीड़ित अदालत में आपराधिक मामला दर्ज करा सकता है।
दोषी होने पर क्या है सजा?
चेक बाउंस की स्थिति में आरोपी को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत दोषी पाया जाता है। दोषी को चेक की राशि के दोगुने तक जुर्माना देना पड़ सकता है। इसके अलावा, दो साल तक की जेल या दोनों ही सजा हो सकती है।
क्या SIP/EMI जैसी ऑटो-डेबिट भी कानूनी अपराध?
SIP/EMI जैसी ऑटो-डेबिट या NACH mandate फेल होना कानूनी अपराध नहीं है लेकिन इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। इस स्थिति में बैंक आमतौर पर ₹250 से ₹750 तक का जुर्माना वसूलते हैं। अगर एक से ज्यादा ऑटो-डेबिट फेल होते हैं तो हर ट्रांजैक्शन पर अलग-अलग चार्ज लगता है। इसका सबसे गहरा असर क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है। भुगतान में चूक होने पर क्रेडिट स्कोर 50 से 70 अंकों तक गिर सकता है। एक बार खराब रिकॉर्ड बन जाने पर भविष्य में लोन या क्रेडिट कार्ड मिलना मुश्किल हो जाता है या फिर ऊंची ब्याज दरों पर ही विकल्प बचता है।
राजपाल यादव कैसे फंसे?
फिल्म अभिनेता राजपाल यादव ने वर्ष 2010 में अपने निर्देशन में बनी पहली फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से पांच करोड़ रुपये उधार लिए थे, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही। इसी से जुड़ा चेक बाउंस हुआ और यह मामला कानूनी रूप ले लिया। इसके बाद राजपाल यादव को कोर्ट में सरेंडर करना पड़ा और वह अब दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद हैं। राजपाल यादव को करीब नौ करोड़ रुपये का भुगतान करना है।
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