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कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई चीज नहीं है, साइबर ठगों से ICICI बैंक ने किया अलर्ट

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Source :- LIVE HINDUSTAN

साइबर ठगों की स्क्रिप्ट में कुछ आम क्राइम शामिल होते हैं। जैसे कस्टम में आपके नाम से कोई अवैध ड्रग्स या पार्सल पकड़ा जाना, बैंक खाते से संदिग्ध या धोखाधड़ी वाले लेन-देन होना, मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगना, आतंकी फंडिंग में शामिल होने का झूठा केस, या फिर टैक्स चोरी जैसे गंभीर मामलों में नाम जोड़ देना।

देश में डिजिटल अरेस्ट को आम जन से लेकर सुप्रीम कोर्ट भी चिंतित है। इसको लेकर सरकार और तमाम संगठन लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इसी क्रम में ICICI बैंक ने भी अपने ग्राहकों को अलर्ट किया है और मेल के जरिए साइबर ठगों के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया है। बैंक द्वारा भेजे गए मेल में कहा गया है कि डिजिटल अरेस्ट एक नए तरह का साइबर ठगी का तरीका है, जिसमें बदमाश खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर फोन या वीडियो कॉल करते हैं। वे आपको डिजिटल अरेस्ट की धमकी देते हैं और कहते हैं कि आपका नाम किसी बड़े अपराध में जुड़ गया है। असल में कानून में ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं है, यह महज डराने का हथियार है।

ठग आपको किन अपराधों में फंसाते हैं?

इन ठगों की स्क्रिप्ट में कुछ आम अपराध शामिल होते हैं। जैसे कस्टम में आपके नाम से कोई अवैध ड्रग्स या पार्सल पकड़ा जाना, आपके बैंक खाते से संदिग्ध या धोखाधड़ी वाले लेन-देन होना, आप पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगना, आतंकी फंडिंग में शामिल होने का झूठा केस, या फिर टैक्स चोरी जैसे गंभीर मामलों में नाम जोड़ देना।

कैसे पहचानें डिजिटल अरेस्ट के झांसे को?

इस ठगी को पहचानना बहुत जरूरी है। अचानक फोन पर गिरफ्तारी की धमकी मिलना, पहले डिजिटल और फिर फिजिकल अरेस्टिंग का डर दिखाना इसकी पहली निशानी है। ये लोग नकली अरेस्ट वारंट या कोर्ट के फर्जी आदेश भी भेजते हैं। अनजान नंबरों से अचानक वीडियो कॉल आना, बार-बार डराने और जल्दबाजी में फैसला लेने का दबाव बनाना इनकी आम चाल है। सबसे बड़ी निशानी यह कि ये तुरंत पैसे मांगते हैं। साथ ही ये आपको परिवार या दोस्तों से बात करने से रोकते हैं, ताकि आप किसी से सलाह न ले सकें। यहां तक कि बैंक से पैसे निकलवाने के लिए आपको शांत और सामान्य रहने की नसीहत भी देते हैं।

कैसे रहें सुरक्षित और बचें इस जाल से?

सबसे पहले तो घबराइए नहीं। याद रखिए, डिजिटल अरेस्ट जैसा कानून में कुछ नहीं है। पुलिस या जांच एजेंसी बनकर आई किसी भी अनचाही कॉल पर कभी भरोसा न करें। असली पुलिस या सरकारी अधिकारी कभी भी वीडियो कॉल पर पूछताछ नहीं करते और न ही पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं। किसी भी दबाव में आकर पैसे न चुकाएं। अगर कोई ऑनलाइन बातचीत आपसे पैसे मांगे, जल्दबाजी दिखाए या चुप्पी रखने को कहे, तो समझ जाइए यह लाल झंडी है।

कहां करें कंप्लेन

अगर आपके साथ ऐसा कुछ होता है तो तुरंत नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। आप ICICI बैंक के हेल्पलाइन नंबर 1800 2662 पर भी संपर्क कर सकते हैं। अगर आपको कोई संदिग्ध या फर्जी ईमेल या कॉल आया है, तो Sanchar Saathi पोर्टल sancharsaathi.gov.in और ICICI बैंक के ईमेल antiphishing@icicibank.com पर तुरंत सूचना दें।

हर घंटे 100 लोग बन रहे साइबर ठगी के शिकार

बता दें पिछले दिनों गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि देश में हर 37 सेकंड में एक व्यक्ति साइबर ठगों का शिकार बन रहा है। प्रति घंटे औसतन सौ लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। वर्ष 2021 में जहां 52 हजार शिकायतें थीं, वहीं अब यह संख्या 86 हजार हो गई है। गृह मंत्री ने कहा, जितनी तेजी से डिजिटल लेनदेन बढ़े हैं, उतनी ही तेजी से जोखिम बढ़ा है। पहले यह ‘लोन वुल्फ अटैक’ हुआ करता था, अब यह संगठित अपराध के रूप में सामने आ रहा है। अपराधी नई तकनीक अपना रहे हैं, इसलिए हमें सामूहिक प्रयास करने होंगे। उन्होंने पुलिस प्रमुखों से कहा, 1930 के कॉल सेंटर पर पर्याप्त संख्या में कॉल हैंडलर तैनात करें।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN