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9 घंटे पहले
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उनके ख़िलाफ़ लाए गए विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव के गिरने के बाद लोकसभा में बोलते हुए अपना पक्ष रखा.
उन्होंने कहा, “मुझ पर प्रतिपक्ष की आवाज़ दबाने का आरोप लगा. संसदीय प्रक्रियाओं पर भी प्रतिपक्ष के माननीय सदस्यों ने अपना दृष्टिकोण रखा. मैं सभी की बातों का सम्मान करता हूं, जिन लोगों ने मेरे पक्ष में अपनी बात रखी उनका भी और जिन्होंने विपक्ष में बात रखी, उनका भी.”
ओम बिरला ने आगे कहा कि वो सदन के उन पर विश्वास जताने के लिए सदस्यों का धन्यवाद अदा करते हैं.
विपक्षी सांसदों ने चर्चा के दौरान आरोप लगाया था कि उनके कई सदस्यों के बोलने के दौरान माइक ऑफ़ कर दिया जाता है.
ओम बिरला पर ये आरोप भी लगा था कि सदन में चर्चा के दौरान नेता, प्रतिपक्ष राहुल गांधी का माइक भी बंद कर दिया जाता है.
इन आरोपों पर ओम बिरला ने कहा, “आसन के पास कभी भी किसी का माइक ऑन करने या ऑफ़ करने का बटन नहीं होता है.”
फ़रवरी के पहले सप्ताह में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान उस समय हंगामे की स्थिति बन गई थी जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सदन में भाषण जिस दिन होना प्रस्तावित था उस दिन वो भाषण नहीं हुआ था.
तब स्पीकर ओम बिरला ने कहा था कि पीएम मोदी उनके आग्रह पर सदन में उपस्थित नहीं हुए थे.
उस घटना का ज़िक्र करते हुए ओम बिरला ने गुरुवार, 12 मार्च को कहा कि वो सदन की सभी महिला सदस्यों का बेहद सम्मान करते हैं.
उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा कोशिश की कि मेरे कार्यकाल में महिला सदस्यों को बोलने की प्राथमिकता दी जाए. लेकिन उस दिन प्रतिपक्ष की कुछ सदस्य वेल क्रॉस करके ट्रेज़री बेंच के पास नारेबाज़ी कर रही थीं. कोई अप्रत्याशित स्थिति बन सकती थी. इसलिए मैंने सदन के नेता को ना आने की सलाह दी.”
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इससे पहले बुधवार, 11 मार्च को स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गया. हालांकि इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान काफ़ी हंगामा भी देखने को मिला.
अमित शाह के भाषण के दौरान सदन में हंगामा शुरू हो गया जिसके बाद पीठासीन अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने मतदान के लिए विपक्षी सांसदों को सीट पर वापस लौटने को कहा.
विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के बीच जगदंबिका पाल ने ध्वनिमत कराया जिसमें ये प्रस्ताव गिर गया, इसके बाद सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया.
अमित शाह ने विपक्ष पर स्पीकर ओम बिरला के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लाकर लोकतंत्र की नींव पर सवाल उठाने का आरोप लगाया.
वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उन्हें ‘सदन में बोलने नहीं दिया जाता’ है.
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लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए 118 विपक्षी सांसदों के समर्थन से अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था.
विपक्षी सांसदों का दावा था कि ओम बिरला ने “पक्षपातपूर्ण व्यवहार” दिखाया है और उनका कार्यालय अपेक्षित निष्पक्षता बनाए रखने में विफल रहा है.
मंगलवार को लोकसभा के पीठासीन बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने इस प्रस्ताव पर बहस की अनुमति दी और बहस के लिए 10 घंटे का समय दिया गया था.

अमित शाह ने क्या कहा?
बुधवार को लोकसभा में बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने अविश्वास प्रस्ताव को लेकर कहा कि ये कोई सामान्य घटना नहीं है.
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि “स्पीकर ओम बिरला को नैतिकता न सिखाई जाए क्योंकि जब कांग्रेस पार्टी थी तो उनके स्पीकर के ख़िलाफ़ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के दौरान तत्कालीन स्पीकर सदन में बैठते थे जबकि ओम बिरला इस अविश्वास प्रस्ताव के आने के बाद से यहां नहीं आए हैं.”
उन्होंने कहा, “क़रीब चार दशक के बाद एक बार फिर से लोकसभा अध्यक्ष के सामने अविश्वास प्रस्ताव आया है. एक तरह से मैं यह भी कहना चाहता हूं कि संसदीय राजनीति और सदन दोनों के लिए अफ़सोसजनक घटना है.”
“स्पीकर का पद पार्टी से ऊपर उठाकर संविधान ने उस पद को एक तरह से मध्यस्थ की भूमिका में रखा है. आपने (विपक्ष) मध्यस्थता करने वालों पर ही शंका के बादल उठा दिए. हम भी विपक्ष में रहे लेकिन कभी भी बीजेपी और एनडीए लोकसभा स्पीकर के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया. हमने स्पीकर के पद की गरिमा का संरक्षण करने का काम किया.”

राहुल गांधी का दावा
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी खड़े हुए. उन्होंने कहा कि कई बार लोकतांत्रिक प्रक्रिया और स्पीकर की भूमिका पर चर्चा हुई है और कई बार मेरा नाम लिया गया, मेरे बारे में गंदी बातें कही गईं.
“यह सदन भारत के लोगों की अभिव्यक्ति है. यह सदन किसी एक पार्टी का नहीं है, यह पूरे देश का प्रतिनिधित्व करता है. जब भी हम बोलने के लिए उठते हैं, हमें बोलने से रोक दिया जाता है.”
“पिछली बार जब मैंने बात की थी, तब मैंने हमारे प्रधानमंत्री के किए गए समझौतों के बारे में एक बुनियादी सवाल उठाया था. कई बार मुझे बोलने से रोका गया है. पहली बार लोकसभा के इतिहास में नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया गया है.”
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राहुल गांधी के दावे पर अमित शाह ने सदन में अपना बयान दिया. उन्होंने कहा, “मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि 18वीं लोकसभा में कांग्रेस पार्टी ने 157 घंटे 55 मिनट बोला, ये आपको तय करना है कि आपकी पार्टी की ओर से कौन बोलेगा. मगर बोलने का मौक़ा आता है तो जर्मनी और इंग्लैंड होते हैं. फिर शिकायत करते हैं. मैं विपक्ष के नेता से पूछना चाहता हूं कि आप क्यों नहीं बोले. किस स्पीकर ने आपको रोका था. लोकसभा को बदनाम करने के लिए ये ग़लत प्रचार किया जा रहा है.”
उन्होंने कहा, “राहुल गांधी चाहते हैं कि उनकी प्रेस कॉन्फ़्रेंस पर बहस हो जाए. ये स्टॉक मार्केट नहीं बल्कि लोकसभा है और यहां बहस के विषय तय होते हैं. आपके परनाना से लेकर दादी और पिताजी तक बड़े बड़े नेता में से किसी की भी प्रेस कॉन्फ़्रेंस पर सदन में बहस नहीं हुई. अगर ये अपेक्षा करते हैं कि इनकी महान प्रेस कॉन्फ़्रेंस पर सदन बहस करे तो इसकी अनुमति न देकर ओम बिरला जी ने सदन पर उपकार किया है.”
संसद परिसर के बाहर बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा, “राहुल जी के पास अवसर था वो जितना समय चाहे बोलते लेकिन उनके पास तथ्य, तर्क और आधार नहीं है. आज विपक्ष का सच पूरी तरह उजागर हो गया कि जो लोग टेबल पर खड़े होकर नाचते हैं, काग़ज़ फाड़कर स्पीकर पर फेंकते हैं उन्हें नियमानुसार सदन से निलंबित किया जाना चाहिए.”
एक दिन पहले भी हुई थी बहस
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अविश्वास प्रस्ताव पर मंगलवार को बहस शुरू हुई थी और तब भी बीजेपी और विपक्ष के बीच बहस सुनने को मिल थी.
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा था कि यह प्रस्ताव व्यक्तिगत रूप से स्पीकर को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि संसद की गरिमा की रक्षा के लिए लाया गया है.
वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पीकर ओम बिरला का बचाव करते हुए राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं की आलोचना की थी.
बीजेपी नेता और संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में कहा कि प्रियंका गांधी नेता प्रतिपक्ष होतीं तो शायद परफ़ॉर्मेंस अच्छी रहती.
किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, “मैंने पहली बार ऐसा देखा जब वो (राहुल गांधी) वहां से दौड़कर आए और प्रधानमंत्री को गले लगाने के लिए झपट पड़े. फिर अपनी कुर्सी पर बैठकर अपने सांसद को देखकर आंख मारते हैं. ऐसा नेता प्रतिपक्ष हमने पहली बार देखा है.”
किरेन रिजिजू ने स्पीकर से मुख़ातिब होकर कहा, “सभापति महोदय आप वहां बैठे हैं और विपक्षी सदस्य चेयर को ‘यार’ बोलते हैं. राज्यसभा में उपसभापति को ‘कलीग’ बताते हैं. जबकि राज्यसभा और लोकसभा के सभापति सदन के कस्टोडियन होते हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “प्रियंका गांधी पीछे बैठकर मुस्कुरा रही हैं, अगर इनको नेता प्रतिपक्ष बनाते तो शायद परफ़ॉर्मेंस थोड़ा अच्छा होता. वो कम से कम बैठती हैं, सुनती हैं और मुस्कुराती भी हैं. मैंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि बतौर संसदीय कार्यमंत्री, किसी भी सांसद का व्यवहार अच्छा है तो मुझे सराहना करनी चाहिए.”
दूसरी तरफ़, कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी ने कहा, “एक ही व्यक्ति है इस देश में, जो 12 साल में इनके सामने झुका नहीं है. वो नेता विपक्ष राहुल गांधी हैं. वो इस सदन में खड़े होकर बेझिझक सच बोलते हैं और सच इनसे पचता नहीं है.”
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