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एक महीने का सीजफायर, परमाणु कार्यक्रम पर ब्रेक और… ट्रंप के 15 सूत्री प्लान में क्या-क्या? क्यों भरोसा नहीं करेगा ईरान

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान को पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिये युद्धविराम योजना सौंपी गई है। इससे पहले पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थता की पेशकश की थी।

इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला करने के करीब 25 दिन बाद अमेरिका अब सीजफायर की उम्मीद कर रहा है। बीते दिनों ईरान युद्ध में जीत का दावा करने वाले ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ उनकी बातचीत जारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप सरकार ने समझौते के लिए ईरान को एक 15-सूत्रीय युद्धविराम योजना की पेशकश की है, जिसमें युद्ध में एक महीने का सीजफायर का जिक्र है। इस घटनाक्रम से अवगत एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है।

अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखे जाने की शर्त पर बताया कि युद्धविराम योजना पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए ईरान को सौंपी गई। बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थता की पेशकश की थी। इसके बाद ट्रंप ने भी इसे हरी झंडी दे दी है और कहा है कि ईरानी नेतृत्व के ‘अच्छे लोगों’ के साथ उनकी बातचीत जारी है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने मंगलवार को अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि 15-सूत्रीय योजना ईरानी अधिकारियों को सौंप दी गई है।

ट्रंप की योजना में क्या?

हालांकि पूरा दस्तावेज अभी आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किया गया है, लेकिन कई रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि इस 15-सूत्रीय योजना का ढांचा तीन बड़ी मांगों पर आधारित है। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने की मांग की गई है। ट्रंप कई मौकों पर यह कह चुके हैं कि ईरान को अपनी परमाणु क्षमताओं को खत्म करना होगा। इसमें यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह रोकना, नतान्ज, फ़ोर्डो और इस्फहान जैसी अहम सुविधाओं को बंद करना और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण की अनुमति देना शामिल है।

प्रॉक्सी मॉडल को छोड़ने की बात भी

इसके अलावा अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों की मारक क्षमता और संख्या को सीमित करे। यह मांग ईरान की प्रतिरोधक क्षमता को निशाना बनाती है, ना कि सिर्फ उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को। एक और बड़ी मांग यह है कि ईरान हिजबुल्लाह और हूती जैसे क्षेत्रीय गुटों को पैसे देना और हथियार मुहैया कराना बंद करे और पूरे मिडिल ईस्ट में अपने प्रॉक्सी मॉडल को छोड़ दे। इसके अलावा प्लान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने, और सीजफायर की समय-सीमा तय करने की बात भी है। वहीं इन सब के बदले अमेरिका ईरान को प्रतिबंधों में पूरी तरह राहत दे सकता है।

मानेगा ईरान?

ईरान ने अब तक अमेरिका के साथ बातचीत की संभावना को खारिज ही किया है। ऐसे में इसकी बेहद कम संभावना है कि ईरान ट्रंप की इन मांगों को समर्थन देगा। इसकी वजह यह है कि यह प्रस्ताव किसी नई शांति पहल से ज्यादा, पहले नाकाम हो चुकी परमाणु वार्ताओं का ही एक नया रूप लगता है। ईरान का तर्क है कि पिछली बार बातचीत के बीच ही अमेरिका ने हमला कर दिया, जिससे नई गारंटियों पर विश्वास करना मुश्किल हो जाता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN