Source :- LIVE HINDUSTAN
फिनलैंड ने संकेत दिया है कि वह अपने यहां परमाणु हथियारों की मेजबानी पर लंबे समय से चले आ रहे प्रतिबंध को हटाने पर विचार कर रहा है। यह बदलाव NATO की सामूहिक परमाणु रणनीति में सक्रिय रूप से भाग लेने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
यूरोप में सुरक्षा और परमाणु रणनीति को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। रूस ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि अगर पश्चिमी पड़ोसी देश फिनलैंड अपने क्षेत्र में परमाणु हथियारों की तैनाती की अनुमति देता है, तो इससे उसकी सुरक्षा और अधिक कमजोर हो जाएगी और रूस इसका जवाब देने के लिए आवश्यक और कड़े कदम उठाएगा। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता Dmitry Peskov ने कहा कि फिनलैंड का यह कदम यूरोप में तनाव को और बढ़ाने वाला है। उन्होंने कहा, “यदि फिनलैंड अपने क्षेत्र में परमाणु हथियार तैनात करता है, तो वह सीधे रूस के लिए खतरा पैदा करेगा। ऐसी स्थिति में रूस को भी उचित प्रतिक्रिया देनी पड़ेगी।”
दरअसल, फिनलैंड ने हाल ही में संकेत दिया है कि वह अपने यहां परमाणु हथियारों की मेजबानी पर लगे लंबे समय से चले आ रहे प्रतिबंध को हटाने पर विचार कर रहा है। यह बदलाव NATO की सामूहिक परमाणु रणनीति में सक्रिय रूप से भाग लेने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भारत दौरे के दौरान कहा कि यह निर्णय किसी तत्काल खतरे के कारण नहीं लिया जा रहा है, बल्कि इसका उद्देश्य नाटो की परमाणु योजना में पूरी तरह भागीदारी सुनिश्चित करना है।
यूरोप की बदलती सुरक्षा स्थिति
उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल फिनलैंड अपने क्षेत्र में स्थायी रूप से परमाणु हथियार तैनात करने का इच्छुक नहीं है, लेकिन वह अपने नॉर्डिक सहयोगियों की सुरक्षा नीति के अनुरूप चलना चाहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव यूरोप की बदलती सुरक्षा स्थिति को दर्शाता है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध ने पूरे यूरोप में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ हालिया बयानों और नीतिगत अनिश्चितताओं ने भी नाटो देशों को अपनी रक्षा रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है।
सुरक्षा संरचना में एक बड़ा बदलाव
इसी संदर्भ में फ्रेंच राष्टपति इमैनुएल मैक्रों ने हाल ही में प्रस्ताव दिया कि फ्रांस अपने परमाणु हथियारों की सुरक्षा छत्रछाया को अन्य यूरोपीय सहयोगी देशों तक विस्तारित कर सकता है। इसके तहत फ्रांस और जर्मनी ने परमाणु प्रतिरोधक क्षमता पर चर्चा के लिए एक संयुक्त संचालन समूह भी बनाया है।विश्लेषकों का मानना है कि फिनलैंड और स्वीडन जैसे देशों के इस तरह के कदम यूरोप की सुरक्षा संरचना में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकते हैं। दोनों देशों ने शीत युद्ध के दौरान दशकों तक तटस्थता की नीति अपनाई थी, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद उन्होंने NATO में शामिल होने का निर्णय लिया।
रूस के साथ लगभग 1,340 KM लंबी सीमा
गौरतलब है कि फिनलैंड की रूस के साथ लगभग 1,340 किलोमीटर लंबी सीमा साझा होती है, जिसके कारण उसकी सुरक्षा नीतियों का प्रभाव पूरे उत्तरी यूरोप की रणनीतिक स्थिति पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि फिनलैंड वास्तव में परमाणु हथियारों की मेजबानी की अनुमति देता है, तो इससे यूरोप में शक्ति संतुलन और भी जटिल हो सकता है और रूस-पश्चिम संबंधों में तनाव की एक नई परत जुड़ सकती है। हालात बिगड़ने पर रूस-फिनलैंड के बीच जंग का नया मोर्चा भी खुल सकता है।
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