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उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन को मिले 99.93% वोट, बाकी के कहां गए? जानिए

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Source :- LIVE HINDUSTAN

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 99.93 प्रतिशत लोगों ने किम जोंग उन की पार्टी के पक्ष में मतदान किया। हालांकि, सरकारी मीडिया ने वोटों का आंकड़ा थोड़ा ज्यादा, यानी 99.97 प्रतिशत बताया है।

उत्तर कोरिया के 2026 के चुनाव तानाशाह किम जोंग उन को जबरदस्त जीत मिली है। किम जोंग उन की वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया और उसके गठबंधन सहयोगियों ने कथित तौर पर 99.93 फीसदी वोट और हर उपलब्ध सीट पर कब्जा कर लिया। 15वीं सुप्रीम पीपल्स असेंबली के प्रतिनिधियों को चुनने के लिए 15 मार्च को चुनाव कराए गए थे।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 99.93 प्रतिशत लोगों ने किम की पार्टी के पक्ष में मतदान किया। हालांकि, सरकारी मीडिया ने वोटों का आंकड़ा थोड़ा ज्यादा, यानी 99.97 प्रतिशत बताया है। साथ ही, मतदाताओं की भागीदारी (वोटर टर्नआउट) 99.99 प्रतिशत रही। रजिस्टर्ड वोटर्स में से सिर्फ 0.0037 फीसदी लोग ही अपना वोट नहीं डाल सके, क्योंकि ये अपने देश में उस समय नहीं थे। या तो ये लोग विदेश में किसी काम से थे या फिर समुद्र में काम कर रहे थे।

अब सवाल उठता है कि आखिर किम जोंग उन की पार्टी को जो 0.07 फीसदी वोट नहीं मिले, वो किसे मिले या कहां गए। ऐसे में बता दें कि वहां पर कोई भी विपक्षी कैंडिडेट चुनाव नहीं लड़ता। हर सीट पर वोटर्स को सिर्फ एक ही उम्मीदवार का नाम दिया जाता, जिसमें उन्हें कहा जाता है कि या तो उसे स्वीकारें या फिर अस्वीकार कर दें। इस तरह इतने फीसदी लोगों ने अस्वीकार कर दिया। 0.07 फीसदी वोट किसी उम्मीदवार या विपक्षी पार्टी को नहीं मिले।

चुनाव परिणामों के बाद, प्योंगयांग में नई असेंबली का उद्घाटन सत्र आयोजित किया जाना है, जिसमें नेतृत्व के चुनाव पर फैसला लिया जाएगा और संविधान में एक बड़े संशोधन पर विचार-विमर्श किया जाएगा। यह आगामी विधायी बैठक पिछले महीने आयोजित सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया की नौवीं कांग्रेस के बाद हो रही है। कोरियन सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी (KCNA) की रिपोर्ट के अनुसार, असेंबली औपचारिक रूप से डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ कोरिया के स्टेट अफेयर्स के राष्ट्रपति के चुनाव और समाजवादी संविधान के संशोधन और पूरक पर चर्चा करेगी। योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस सत्र का एक मुख्य केंद्र-बिंदु यह है कि क्या उत्तर कोरिया दक्षिण कोरिया के प्रति अपने शत्रुतापूर्ण रवैये को आधिकारिक तौर पर कानूनी रूप देगा, और अपने संस्थापक दस्तावेज में दोनों कोरियाई देशों को एक-दूसरे के प्रति शत्रुतापूर्ण दो देशों के रूप में परिभाषित करेगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN