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यूएई ने यह भी सुझाव दिया है कि अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ द्वीपों जैसे अबू मूसा पर नियंत्रण करना चाहिए, जो पिछले कई दशकों से ईरान के कब्जे में हैं, लेकिन यूएई उन पर दावा करता है।
ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल के संघर्ष जारी है। इस बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने चौंकाने वाला बयान दिया है। यूएई ने अमेरिका-ईरान संघर्ष में सीधे शामिल होने की मंशा जता दी है। उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बलपूर्वक फिर से खोलने की अपनी योजना दुनिया के सामने रखी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूएई इसके लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य कार्रवाई को वैधता मिल सके। बताया जा रहा है कि यूएई ने अमेरिका के साथ-साथ यूरोप और एशिया के सैन्य शक्तियों से भी इस मिशन में शामिल होने का आग्रह किया है।
यदि यूएई सीधे इस युद्ध में शामिल होता है तो वह खाड़ी क्षेत्र का पहला देश होगा जो औपचारिक रूप से इस संघर्ष का हिस्सा बनेगा। इससे पहले तक यूएई मध्यस्थता की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, यूएई को उम्मीद है कि यदि UNSC से मंजूरी मिलती है तो एशिया और यूरोप के कई देश भी इस अभियान में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, रूस और चीन इस प्रस्ताव को वीटो कर सकते हैं। इससे इसे पारित कराना मुश्किल हो सकता है। इसके बावजूद खाड़ी देशों के अधिकारियों का कहना है कि यूएई बिना औपचारिक मंजूरी के भी सैन्य सहयोग देने को तैयार है।
यूएई ने यह भी सुझाव दिया है कि अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ द्वीपों जैसे अबू मूसा पर नियंत्रण करना चाहिए, जो पिछले कई दशकों से ईरान के कब्जे में हैं, लेकिन यूएई उन पर दावा करता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलना जरूरी
यूएई के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इस बात पर व्यापक सहमति है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखना बेहद जरूरी है। गौरतलब है कि यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और यहां किसी भी तरह का अवरोध विश्व अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
UAE का क्यों बदला स्टैंड?
युद्ध से पहले यूएई अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिश कर रहा था। यहां तक कि ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी की अबू धाबी यात्रा भी इसी प्रयास का हिस्सा थी। लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं और यूएई खुलकर अमेरिका के साथ खड़ा नजर आ रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सऊदी अरब समेत अन्य खाड़ी देश भी ईरान के खिलाफ अपना रुख सख्त कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने अभी तक सीधे सैन्य भागीदारी की घोषणा नहीं की है। वहीं बहरीन अमेरिका का करीबी सहयोगी है और वहां अमेरिकी नौसेना का फिफ्थ फ्लीट तैनात है, इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहा है।
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