Source :- LIVE HINDUSTAN
अमेरिका और ईरान के युद्ध में समंदर में तेल के जहाजों पर जमकर अटैक हो रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे करीब 36 जहाजों पर हमला हुआ है जिनपर भारतीय क्रू मौजूद थे। वहीं 200 से ज्यादा भारतीय जहाज खाड़ी देशों के बंदरगाहों पर रुके हैं।
ईरान और अमेरिका में जंग के बीच समंदर में तेल के जहाज खतरे में पड़ गए हैं। अमेरिका और ईरान दोनों ही तेल के टैंकरों को निशाना बना रहे हैं। गुरुवार को अजरबैजान की सीमा में ईरान के ड्रोन ने एक पोत पर हमला कर दिया।जानकारी के मुताबिक इसमें कम से कम 10 भारतीय क्रू भी सवार थे। इस पोत पर बहामास का झंडा लगा हुआ था। इसके अलावा ईरान की रिमोट कंट्रोल वाली नाव से इराक के खोर अल जुबैर पोर्ट पर खड़े एक तेल के जहाज को निशाना बनाया गया। भारत के डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ शिपिंग के अलावा इस जहाज पर सवार सभी भारतीय सुरक्षित हैं।
इसके अलावा कुवैत के पोर्ट पर भी एक पोत पर हमला किया गया। इसके बाद समंदर में तेल ही तेल फैल गया। जानकारी के मुताबिक युद्ध छिड़ने के बाद अब तक कम से कम 9 तेल के जहाजों को निशाना बनाया गया है। इन सभी पर भारतीय क्रू भी मौजूद था। डायरेक्ट्रेट से मिली जानकारी के मुताबिक फारस की खाड़ी में कम से कम 36 भारतीय तेल के जहाज हैं। इन जहाजों पर किसी के हताहत होने या फिर पकड़े जाने की खबर नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक खाड़ी देशों के बंदरगाहों पर कम से कम 200 कार्गो शिप खड़े हैं। युद्ध की वजह से इन जहाजों ने बंदरगाह नहीं छोड़ा है। हालांकि पोर्ट पर भी जहाजों को पूरी तरह से सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। ईरान खाड़ी देशों के बंदरगाहों को भी निशाना बनाने में कसर नहीं छोड़ रहा है। भारत अमेरिका से इस बारे में बात कर रहा है कि समंदर में हमारे जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
अमेरिका ने ईरानी युद्धपोत को बनाया निशाना
श्रीलंका के तट के निकट अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी पनडुब्बी से किए गए हमले के कारण डूबे ईरानी युद्धपोत पर कोई हथियार नहीं था। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को यह दावा किया। उन्होंने जहाज को निशाना बनाये जाने को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया। ईरानी जहाज ‘आईरिस देना’ भारत द्वारा आयोजित मिलन बहुपक्षीय नौसैन्य अभ्यास में भाग लेने के बाद स्वदेश लौट रहा था कि तभी बुधवार तड़के उस पर हमला हुआ।
श्रीलंकाई अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नाविक मारे गए। ईरान के सर्वोच्च नेता के भारत में प्रतिनिधि अयातुल्ला डॉ. अब्दुल मजीद हकीमेलाही ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “ईरानी जहाज को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है, क्योंकि उनके पास किसी भी प्रकार के हथियार नहीं थे।”
उन्होंने कहा, “वे (ईरानी नाविक) यहां अभ्यास के लिए आए थे। अभ्यास समाप्त होने के बाद वे ईरान वापस जाना चाहते थे और उन पर अमेरिका ने हमला कर दिया।” हकीमेलाही ने कहा,”यह मानवता, नैतिकता और न्याय के विरुद्ध है।” उन्होंने मौजूदा संघर्ष पर कहा कि ईरान अपना बचाव कर रहा है।
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