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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और जंग के बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब को हरसंभव सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के प्रवक्ता मोशर्रफ जैदी ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो पाकिस्तान सऊदी अरब के समर्थन में खड़ा होगा।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और जंग के बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब को हरसंभव सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के प्रवक्ता मोशर्रफ जैदी ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो पाकिस्तान सऊदी अरब के समर्थन में खड़ा होगा। ब्लूमबर्ग टीवी से बात करते हुए जैदी ने कहा कि चाहे हालात जैसे भी हों, पाकिस्तान सऊदी अरब की मदद के लिए तैयार रहेगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच पिछले साल सितंबर में हुए रक्षा समझौते से पहले भी दोनों देश हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में सबसे बड़ा सवाल यह है कि पाकिस्तान क्या कदम उठा रहा है, ताकि हालात इतने न बिगड़े कि उसके किसी करीबी सहयोगी को ऐसे संघर्ष में शामिल होना पड़े जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि को नुकसान हो सकता है।
दरअसल, अमेरिका और इजरायल के साथ जारी संघर्ष के दौरान ईरान खाड़ी के कई देशों पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है। सऊदी अरब ने हाल ही में दावा किया था कि उसने एक प्रमुख तेल क्षेत्र की ओर बढ़ रहे ड्रोन को मार गिराया है। इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ रहा है और कच्चे तेल तथा गैस की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है।
बातचीत के दौरान जैदी ने बताया कि संघर्ष शुरू होने के बाद से सऊदी अरब पाकिस्तान को तेल और डीजल की आपूर्ति में मदद कर रहा है। पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज़ मलिक के अनुसार, ईंधन की आपूर्ति लाल सागर स्थित सऊदी बंदरगाह यानबू के जरिए की जा रही है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से दूर है। पाकिस्तानी नौसेना ने भी घोषणा की है कि वह देश के वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान करेगी, ताकि ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो।
दूसरी ओर लाहौर के अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ राशिद अहमद खान के अनुसार, रक्षा समझौते के विवरण स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन इसके तहत पाकिस्तान को होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में भूमिका निभाने के लिए कहा जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान द्वारा ईरान के खिलाफ सीधे सैन्य कार्रवाई की संभावना बहुत कम है। इसके बजाय पाकिस्तान ड्रोन हमलों से बचाव और सऊदी अरब को तकनीकी सैन्य सहायता देने जैसे कदम उठा सकता है।
बता दें कि संघर्ष के बीच पाकिस्तान ने शनिवार को ईंधन की कीमतों में अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी की है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब देश की लगभग 29 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करती है। सरकार ने खर्च कम करने और ईंधन बचाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें मंत्रियों के वेतन पर रोक, स्कूल बंद करना और चार दिन का कार्य सप्ताह लागू करना शामिल है।
जैदी ने कहा कि इस सप्ताह तीन और अगले सप्ताह एक अतिरिक्त खेप आने के बाद ईंधन का भंडार ‘स्थिर से बेहतर’ स्थिति में है। उन्होंने यह भी बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के साथ लगातार संपर्क में हैं।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने सऊदी अरब का दौरा किया था। इस दौरान उनकी मुलाकात सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान अल सऊद से हुई। दोनों नेताओं ने सऊदी अरब पर संभावित ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकने के लिए संयुक्त उपायों पर चर्चा की।
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