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ईरान युद्ध: कुर्द लड़ाकों की गुप्त महिला बटालियन कैसे काम करती है

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Source :- BBC INDIA

उत्तरी इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में, ईरानी सीमा के पास एक पहाड़ी पर पीजेएके सदस्यों का एक समूह

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युद्ध के शुरुआती हफ्तों में, जब अमेरिका और इसराइल की बमबारी जारी थी, यह अटकलें बढ़ने लगींं थीं कि इराक़ में मौजूद ईरानी कुर्द सशस्त्र समूह जल्द ही सीमा पार कर इस्लामी गणराज्य के ख़िलाफ़ लड़ाई में शामिल हो सकते हैं.

इसके जवाब में ईरान ने कई कुर्द समूहों पर हमले किए, जिनमें एक बैलिस्टिक मिसाइल हमला भी शामिल था, जिसमें एक लड़ाका मारा गया. इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 7 मार्च को कहा कि वे नहीं चाहते कि कुर्द ईरान में लड़ें.

बीबीसी को एक दुर्लभ मौके पर कुर्द गुरिल्ला समूहों में से एक तक पहुंच मिली. ये एक पूरी तरह महिला बटालियन है.

गहरी गुफाओं और भूमिगत सुरंगों में प्रवेश की अनुमति पाने के लिए कई दिनों तक इंतज़ार और बातचीत करनी पड़ी. ये जगहें उत्तरी इराक़ में ईरानी कुर्द गुरिल्लाओं के ठिकानों के रूप में इस्तेमाल होती हैं.

वे एक गुप्त संचार नेटवर्क चलाते हैं और अर्ध-स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्र में आधिकारिक तंत्र की नज़रों से दूर रहते हैं.

केवल एक महिला फोटोग्राफ़र को इस परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई और उसने कुर्दों के साथ दस दिन बिताए.

पिछले दशकों में, कई कुर्द विद्रोही समूह ईरान से सीमा पार कर इराक़ के पहाड़ों में जा बसे हैं.

वे ईरान की ख़ुफ़िया एजेंसियों, इराक़ में उसके शिया सहयोगी बलों और तुर्की की सेना से छिपकर रहते हैं.

हाल ही में, अमेरिका और इसराइल के ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध से पहले, उत्तरी इराक़ में प्रमुख ईरानी कुर्द समूहों ने एक गठबंधन बनाया. बाद में ऐसी अटकलें भी सामने आईं कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे उनके नेताओं से संपर्क किया और उनसे युद्ध में शामिल होने का अनुरोध किया. इसके जवाब में विभिन्न कुर्द समूहों ने कहा कि वे किसी भी देश की पैदल सेना नहीं बनेंगे.

ट्रंप ने 5 मार्च को रॉयटर्स को दिए एक टेलीफ़ोनिक इंटरव्यू में कहा कि वे कुर्दों के ईरान के भीतर हमले का समर्थन करते हैं और कहा: “मुझे लगता है कि अगर वे ऐसा करना चाहें तो यह शानदार होगा.”

हालांकि, बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति ने पत्रकारों से कहा कि वे नहीं चाहते कि कुर्द बल ईरान की जमीन पर मौजूद हों.

उन्होंने कहा: “हम नहीं चाहते कि युद्ध को जितना है उससे ज्यादा जटिल बनाया जाए.”

गुप्त सैन्य ठिकाने

आरियन का कहना है कि इस संघर्ष से उन्हें एक कुर्द महिला के रूप में अपनी पहचान फिर से हासिल करने का मौका मिलता है

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सबसे संगठित समूहों में से एक कुर्दिस्तान फ्री लाइफ़ पार्टी (पीजेएके) है, जो कहती है कि वह वर्षों से अपने बलों को ईरान की ज़मीन पर वापस भेजने की तैयारी कर रही है.

21 वर्षीय आरियन कहती हैं, “मैं अपने परिवार और कुर्द लोगों के लिए लड़ रही हूं, जो लंबे समय से उत्पीड़न का शिकार रहे हैं.”

वह पीजेएके की महिला रक्षा बलों की एक इकाई की सदस्य हैं.

आरियन का कहना है कि एक कुर्द के रूप में उन्होंने ईरान में अन्याय और भेदभाव का सामना किया है और उनके पास हथियार उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था. वह दो साल पहले पीजेएके में शामिल हुई थीं.

ये सुरंगें सुरक्षित शरणस्थल हैं, जिनमें खाद्य पदार्थ , नकदी और गोला-बारूद के भंडार मौजूद हैं.

पीजेएके अपने लड़ाकों की संख्या को पूरी तरह गोपनीय रखता है, लेकिन लगभग 60 लोग-जिनमें अधिकतर महिलाएं हैं. ये अमेरिका और इसराइल के ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध शुरू होने से पहले से ही इस ठिकाने पर ट्रेनिंग ले रहे हैं.

गुरिल्ला लड़ाके सैन्य अभ्यास करते हैं, वैचारिक बैठकों में हिस्सा लेते हैं और स्नाइपर शूटिंग तथा ड्रोन रणनीति जैसी विभिन्न स्किल्स का अभ्यास करते हैं.

उन्होंने मेडिकल टेस्ट भी करवाया है ताकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की स्थिति में उन्हें सीमा के करीब तैनात किया जा सके.

40 वर्षीय गालावीज़ आवरीन ने बीबीसी से कहा, “इस युद्ध के शुरू होने की लंबे समय से उम्मीद की जा रही थी.”

आवरीन ने 20 साल की उम्र में ईरान के उर्मिया शहर में भूगोल की पढ़ाई छोड़ दी थी और एक पैदल सैनिक के रूप में पीजेएके में शामिल हो गई थीं. बाद में वह इस समूह की प्रवक्ता बनीं.

गालावीज़ आवरीन, एक गुप्त गुफा के ठिकाने से बात कर रही थीं. वो कहती हैं कि उन्होंने अपनी आधी ज़िंदगी इन पहाड़ों में बिताई है और ईरान छोड़ने के बाद से अपने परिवार को नहीं देखा है.

उनका कहना है कि 2022 से पूरे ईरान में महिलाओं के नेतृत्व में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने, ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई की मौत से पहले ही, इस्लामी गणराज्य को कमजोर कर दिया था.

वह उन अशांति की घटनाओं का भी जिक्र करती हैं, जो 22 वर्षीय महसा अमीनी की मौत के बाद शुरू हुई थीं. एक कुर्द महिला, जिसे हिजाब से जुड़े नियमों का पालन न करने के आरोप में ईरानी पुलिस ने गिरफ्तार किया था.

अकेला विकल्प

पीजेएके के सदस्य टीवी पर न्यूज़ देखकर सुरंग के बाहर की घटनाओं पर नजर रखते हैं

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ये विरोध प्रदर्शन “महिला, जीवन, आज़ादी” के आंदोलन में बदल गए थे लेकिन अधिकारियों ने घातक दमन के साथ प्रतिक्रिया दी. ये वो पल था जब यही बात पीजेएके के कुछ नए सदस्यों के लिए प्रेरणा बन गई.

18 वर्षीय बिगेन पीजेएके में शामिल होने से पहले बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों में हिस्सा ले चुकी थीं और नियम न मानते हुए अपने स्कूल में हिजाब पहनने से इनकार कर दिया था.

बिगेन अपने एक साथी के बाल धीरे-धीरे गूंथते हुए कहती हैं: “महिलाओं के पास ज्यादा विकल्प नहीं होते.”

वह कहती हैं, “या तो हमें घरेलू हिंसा और सामाजिक पाबंदियों को सहना पड़ता है, या फिर हमें क्रांति के जरिए खुद को बचाना पड़ता है.”

कुर्द विद्रोही समूहों पर अक्सर बच्चों की भर्ती के आरोप लगते रहे हैं, और बिगेन जब तीन साल पहले इस समूह में शामिल हुईं, तब वह वास्तव में ईरान में स्कूल की छात्रा थीं. यहां मौजूद कई गुरिल्ला कहते हैं कि उनके लिए सशस्त्र प्रतिरोध ही बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता था.

डलाल, एक दंत चिकित्सक हैं और वो 23 साल की उम्र में गुरिल्ला बन गईं. वो कहती हैं: “मेरा संघर्ष अगली पीढ़ी के कुर्दों के लिए एक स्वतंत्र भविष्य सुनिश्चित करने के लिए है.”

वह जोड़ती हैं: “कुर्द लोगों के लिए… पिछले 200 साल दमन और हिंसा से भरे रहे हैं.”

पीजेएके की स्थापना 2004 में हुई थी और इसका संबंध कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) से रहा है, ये तुर्की का एक अलगाववादी समूह, जिसने पिछले साल तुर्की सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद चार दशकों के संघर्ष के बाद हथियार डाल दिए.

पीजेएके ने कहा है कि वह इस फ़ैसले का सम्मान करता है, लेकिन ईरान के कुर्द इस्लामी गणराज्य के ख़िलाफ़ अपने सशस्त्र प्रतिरोध को जारी रखेंगे.

तुर्की और ईरान, दोनों ही इस समूह को एक आतंकवादी संगठन मानते हैं.

तुर्की के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि वह “आतंकवादी समूह पीजेएके” की गतिविधियों पर नज़र रखे हुए है और उसे जातीय अलगाववाद को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता के लिए ख़तरा पैदा करने का आरोपी ठहराता है.

गृहयुद्ध का डर

इन गुरिल्लाओं को युद्ध के लिए प्रशिक्षित किया गया है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि उन्हें गृहयुद्ध का सामना करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा

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कुर्द गुरिल्ला इस बात से वाकिफ हैं कि उनके सामने कितनी बड़ी चुनौती है. यह भी संभव है कि उन्हें सीधे इस्लामी गणराज्य की सुसज्जित सेनाओं का सामना करना पड़े.

गलावीज़ आवरीन ने बीबीसी से कहा, “गृहयुद्ध वह चीज है, जिसका हम सामना नहीं करना चाहते.”

उन्होंने आगे कहा, “हमें जो कुछ भी संभव हो, करना होगा ताकि युद्ध को शासन के पतन की ओर ले जाया जाए, न कि यह हमारी ओर मुड़ जाए और भविष्य में हमें आपस में लड़ने के लिए मजबूर करे.”

वह कहती हैं, “मध्य पूर्व का नक्शा फिर से तैयार किया जा रहा है और ईरान के लोगों को एकजुट होकर अपने भविष्य के बारे में फ़ैसला करना चाहिए.”

ईरान सरकार के विरोधी समूह उम्मीद करते हैं कि इस युद्ध के बाद ईरान क्षेत्र में लोकतंत्र का एक मॉडल बन सकता है, लेकिन साथ ही उन्हें यह भी डर है कि अगर राष्ट्रवादी ताकतें हावी हो गईं, तो देश गिरावट के एक ख़तरनाक चक्र में फंस सकता है.

कुर्द, ईरान की 9 करोड़ की आबादी का लगभग 10 प्रतिशत हैं और दशकों से महसूस करते रहे हैं कि उन्हें इस्लामी गणराज्य द्वारा हाशिए पर धकेला गया है और उनके साथ भेदभाव हुआ है.

युद्ध की शुरुआत के बाद से तेहरान ने इराक़ के कुर्दिस्तान क्षेत्र में ईरानी कुर्द समूहों के ख़िलाफ़ हमले तेज़ कर दिए हैं.

बीबीसी ने नए गठबंधन के नेताओं से बातचीत की और डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनके संपर्क के बारे में पूछा, लेकिन उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और उन रिपोर्टों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि उनकी सेनाएं अब तक सीमा पार कर ईरान में दाखिल हो चुकी हैं.

हालांकि, पीजेएके का दावा है कि उसके “काफी संख्या में” सशस्त्र बल पहले से ही ईरान के भीतर मौजूद हैं, जो कार्रवाई के लिए सही समय का इंतज़ार कर रहे हैं.

इस समूह के एक नेता ने बताया, “हमारी सैन्य भागीदारी इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले दिनों में हालात कैसे आगे बढ़ते हैं.”

अमेरिका पर भरोसा करें या नहीं

डलाल अपने एक साथी के साथ अपने अड्डे के पास एक छोटी झील के किनारे आराम कर रहे हैं

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अन्य ईरानी कुर्द विपक्षी समूहों का कहना है कि वे स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहे हैं.

डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ ईरानी कुर्दिस्तान के एक नेता कहते हैं कि उनका मिशन “संक्रमण काल में ईरानी कुर्दिस्तान का प्रशासन चलाना” है और उन्होंने अपने समर्थकों से ऐसे किसी भी प्रतिशोधात्मक कदम से बचने की अपील की है, जो सुरक्षा को कमजोर कर सकता है.

इस बीच, कुछ कुर्द गुरिल्ला इस बात को लेकर संदेह में हैं कि आने वाले किसी भी संभावित युद्ध में क्या अमेरिका के समर्थन पर भरोसा किया जा सकता है या नहीं.

ईरानी कुर्द समूहों की स्थिति से परिचित एक सूत्र ने बीबीसी को बताया कि विपक्षी समूह तब तक अपनी सेनाओं को मैदान में नहीं उतारेंगे, जब तक उन्हें अमेरिकी वायु सेना का सुनिश्चित समर्थन नहीं मिल जाता.

उसका मानना है कि ईरान की सेना अब भी मजबूत है और अगर कुर्द गुरिल्ला ज़मीनी हमले शुरू करते हैं, तो उन्हें “विनाशकारी” परिणाम का सामना करना पड़ सकता है.

महिला रक्षा बलों की सदस्य लंबे समय से उस “आज़ादी” का इंतजार कर रही हैं, जिसकी वे इच्छा रखती हैं.

डलाल अब प्रशिक्षण स्थलों को छोड़कर सीमा के पास तैनात हो चुकी हैं. अगर कुर्द इस्लामी गणराज्य के ख़िलाफ़ युद्ध में शामिल होते हैं, तो यह कहना मुश्किल होगा कि यह संघर्ष कितने समय तक चलेगा या इसका परिणाम क्या होगा.

अतिरिक्त रिपोर्ट: वेलेंटीना सिनिस

महिला गुरिल्लाओं ने अपनी असली पहचान उजागर नहीं की है और सुरक्षा के मद्देनज़र उनके सैन्य नामों का इस्तेमाल किया गया है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS