Source :- LIVE HINDUSTAN
पिछले कुछ समय में ईरान ने जासूसी के आरोप में लगभग 500 लोगों को हिरासत में लिया है। ताजा संघर्ष के बाद से यह संख्या बढ़ी है। इस महीने की शुरुआत में ही 85 लोगों को विदेशी ताकतों से सहयोग के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
ईरान ने रविवार को एक बड़े जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा बलों ने देशभर में 50 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि उन्होंने देश के अहम स्थानों के कोऑर्डिनेट्स विदेशी ताकतों को मुहैया कराए। ईरानी राज्य समाचार एजेंसी IRNA ने बताया कि ये संदिग्ध व्यक्ति फिक्स्ड और मोबाइल लोकेशन की जानकारी देते थे, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, चेकपॉइंट्स और सुरक्षा बलों की तैनाती शामिल थी। इस जानकारी का इस्तेमाल उन स्थानों पर टारगेटेड हमलों के लिए किया जा सकता था।
गिरफ्तारी के दौरान सुरक्षा बलों ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए। इनमें कम्युनिकेशन डिवाइसेज, सैटेलाइट आधारित टूल्स, हथियार और गोला-बारूद शामिल हैं। अधिकारियों ने इस जासूसी गतिविधि की समयसीमा या इसमें शामिल विदेशी तत्वों का साफ खुलासा नहीं किया है। हालांकि, ईरान अक्सर ऐसी जासूसी कार्रवाइयों के लिए अमेरिका या इजरायल को जिम्मेदार ठहराता है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब ईरान पहले ही जासूसी से जुड़े सैकड़ों मामलों में सख्ती बरत रहा है।
जासूसों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई
पिछले कुछ समय में ईरान ने जासूसी के आरोप में लगभग 500 लोगों को हिरासत में लिया है। फरवरी के अंत में शुरू हुए संघर्ष के बाद से यह संख्या बढ़ी है। इस महीने की शुरुआत में ही 85 लोगों को विदेशी ताकतों से सहयोग के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। अलग-अलग ऑपरेशन्स में इजरायल से जुड़े 97 व्यक्तियों को भी पकड़ा गया। ये घटनाएं ईरान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिशों का हिस्सा लगती हैं, जहां देश दुश्मन जासूसी नेटवर्क्स को लगातार निशाना बना रहा है।
यह घटना अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में बातचीत के विफल होने के तुरंत बाद सामने आई है। लगभग 21 घंटे चली वार्ता में परमाणु मुद्दे और होर्मुज स्ट्रेट जैसे मुद्दों पर असहमति बनी रही। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि कुछ मुद्दों पर समझ बनी, लेकिन दो-तीन मुख्य बिंदुओं पर अड़चन के कारण अंतिम समझौता नहीं हो सका। इस जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश ईरान की सुरक्षा एजेंसियों की ओर से बढ़ाई गई सतर्कता को दर्शाता है, जो क्षेत्रीय तनाव के बीच देश की रक्षा को प्राथमिकता दे रही हैं।
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