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ईरान में चल रही ‘महाभारत’ के 18 दिन बीते, अब भी जारी; कैसे फंसता दिख रहा अमेरिका

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Source :- LIVE HINDUSTAN

जंग ने पहले ही दिन जोर पकड़ लिया, जब ईरान ने आसपास के सुन्नी मुल्कों पर भी हमले तेज किए और पूरा मिडल ईस्ट ही जंग की चपेट में आ गया। फिलहाल हालात ऐसे हैं कि भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत दुनिया के कई देशों में इस जंग के कारण गैस का संकट पैदा हो गया है।

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले होते हुए 18 दिन बीत गए हैं। 28 फरवरी को पहला हमला दोनों मुल्कों ने ईरान पर किया था और उसके शीर्ष नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई मारे गए थे। ईरान को नुकसान में जो सबसे बड़ा नुकसान हो सकता था, वह पहले ही दिन हो गया। इस तरह जंग ने पहले ही दिन जोर पकड़ लिया, जब ईरान ने आसपास के सुन्नी मुल्कों पर भी हमले तेज किए और पूरा मिडल ईस्ट ही जंग की चपेट में आ गया। फिलहाल हालात ऐसे हैं कि भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत दुनिया के कई देशों में इस जंग के कारण गैस का संकट पैदा हो गया है।

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ही बाधित कर दिया है, जहां से दुनिया की तेल आपूर्ति का 20 फीसदी हिस्सा निकलता है। इसके बाद उसने बुधवार की रात को कतर में स्थित दुनिया के सबसे बड़े नेचुरल गैस प्लांट ‘रास लफान’ को निशाना बनाया है। यही नहीं अब इसके जवाब में अमेरिका का कहना है कि वह ईरान के सबसे बड़े गैस प्लांट फार्स को टारगेट कर सकता है। यदि ऐसा हुआ तो फिर दुनिया में सप्लाई प्रभावित होने से पैदा गैस संकट अब उत्पादन में बाधा की ओर भी बढ़ सकता है। ऐसे ही कारण हैं, जिनके चलते अब माना जा रहा है कि क्या ईरान की जंग अमेरिका की उम्मीद से परे जा चुकी है।

ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि अमेरिका को लगता था कि उसके टॉप लीडर के कत्ल के बाद हालात बदल जाएंगे और वहां सत्ता परिवर्तन हो जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और ईरान के तेवर पहले से ज्यादा सख्त हो गए। उनके बेटे मुजतबा खामेनेई अब शीर्ष नेता हैं और खुफिया मंत्री, सैन्य कमांडरों के मारे जाने के बाद भी ईरान जंग में डटा हुआ। फिलहाल ऐसा लगता है कि किसी भी हाल में ईरान इस जंग को खींचना चाहता है। जानकार मानते हैं कि भले ही ईरान को बड़ा नुकसान हुआ है, लेकिन उसका हित अब यही है कि जंग लंबी खिंचे। उसे इसका फायदा भी मिलता दिख रहा है।

ईरान के किस ऐक्शन से सबसे ज्यादा चोट

ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित किए जाने से कई देशों में संकट है। कच्चे तेल के दाम 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। यहां तक कि अमेरिका अब खुद सहयोगी देशों से अपील कर रहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने में मदद करें। पेंटागन का कहना है कि पहले एक सप्ताह में ही जंग में 11 अरब डॉलर खर्च हो गए थे। कहा जा रहा है कि प्रति दिन करीब 2 अरब डॉलर की पूंजी इसमें खप रही है।

मिडल ईस्ट के देशों का भी अमेरिका पर कमजोर होगा भरोसा?

इसके अलावा मिडल ईस्ट के देशों सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों का भरोसा भी अमेरिका पर कमजोर हुआ है। यह स्थिति भी अमेरिका के लिए सही नहीं है। लेकिन ईरान को इस जंग खींचने में फायदा दिखता है ताकि अमेरिका खुद नरम पड़े और वह अपनी शर्तों पर समझौते की स्थिति में आ जाए। अब देखना होगा कि किस मोड़ पर जाकर समझौते की स्थिति बनती है। अब तक रूस, चीन और भारत जैसे देशों ने इस मामले में दूरी ही बनाकर रखी है। ऐसे में वैश्विक शक्तियों के रुख पर भी नजर रहेगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN