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ईरान पर हमले की तैयारी में ट्रंप, मगर ब्रिटेन ने RAF बेस देने से कर दिया इनकार; आपस में ही तनातनी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर ने डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर हमले के लिए RAF ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। जानें कैसे इस फैसले से चागोस द्वीप डील और अमेरिका-ब्रिटेन के रिश्तों में दरार आ गई है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच ईरान के मुद्दे पर गहरा तनाव पैदा हो गया है। ब्रिटेन ने अमेरिका को अपने RAF (रॉयल एयर फोर्स) ठिकानों का इस्तेमाल ईरान पर बमबारी करने के लिए देने से मना कर दिया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने वाले समझौते पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।

चागोस द्वीप समझौता और ट्रंप की नाराजगी

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन के चागोस द्वीप समझौते से अपना समर्थन वापस ले लिया है। ट्रंप इस बात से नाराज हैं कि स्टार्मर सरकार ने अमेरिका को ब्रिटिश ठिकानों से हमले की अनुमति नहीं दी।

ट्रंप का रुख: उन्होंने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए ब्रिटेन को “वोकिज्म” के खिलाफ खड़े होने और चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को न सौंपने की सलाह दी है। इसी द्वीप पर डिएगो गार्सिया नाम बड़ा सैन्य एयरबेस स्थित है।

कीर स्टार्मर का समझौता: इस सौदे के तहत द्वीपों की संप्रभुता मॉरीशस को दी जानी है, जबकि डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को 99 वर्षों के लिए ब्रिटेन और अमेरिका को लीज पर वापस दिया जाएगा, जिसकी लागत लगभग £35 बिलियन होगी।

युद्ध की तैयारी और RAF फेयरफोर्ड का मुद्दा

अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका 2003 के इराक युद्ध के बाद से इस क्षेत्र में अपना सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा कर चुका है। ट्रंप को बताया गया है कि अमेरिकी सेना शनिवार तक हमले के लिए पूरी तरह तैयार होगी।

RAF Fairford: ट्रंप विशेष रूप से ग्लूस्टरशायर में स्थित RAF फेयरफोर्ड हवाई पट्टी का उपयोग लंबी दूरी के बमवर्षक विमानों के लिए करना चाहते हैं।

ब्रिटेन का इनकार: ब्रिटिश सरकार के वकीलों का मानना है कि इस तरह के ‘प्री-एम्प्टिव’ हमले में शामिल होना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है।

कानूनी पेंच और अंतरराष्ट्रीय दायित्व

ब्रिटेन को डर है कि 2001 के संयुक्त राष्ट्र के अध्यादेश के तहत, यदि वह अमेरिका को हमले के लिए अपने ठिकानों का इस्तेमाल करने देता है, तो उसे भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत कार्य के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

अटॉर्नी जनरल की सलाह: ब्रिटेन के अटॉर्नी जनरल लॉर्ड हरमर ने पहले ही चेतावनी दी है कि क्षेत्र में ब्रिटिश संपत्तियों की रक्षा करने के अलावा किसी भी अन्य हमले में शामिल होना गैरकानूनी होगा।

ट्रंप का तर्क: ट्रंप ने तर्क दिया है कि ईरान पर हमला ब्रिटेन और अन्य मित्र देशों की रक्षा के लिए जरूरी है, ताकि एक अस्थिर और खतरनाक शासन को खत्म किया जा सके।

ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने किसी भी संभावित ईरानी जवाबी कार्रवाई से निपटने के लिए क्षेत्र में अतिरिक्त टाइफून और F-35 लड़ाकू विमानों को तैनात कर दिया है। दिलचस्प बात यह है कि संधि की शर्तों के अनुसार, अमेरिका को डिएगो गार्सिया बेस का इस्तेमाल करने के लिए ब्रिटेन की ‘सहमति’ की आवश्यकता नहीं है, केवल ‘सूचना’ देना ही पर्याप्त है। हालांकि, ब्रिटेन की मुख्य भूमि पर स्थित RAF ठिकानों के लिए सरकार की अनुमति अनिवार्य है, जिसे स्टार्मर ने फिलहाल रोक रखा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN