Source :- LIVE HINDUSTAN
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ अपनी रेड लाइन पर पूरी तरह अडिग हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका इस्लामी शासन को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति या अर्थव्यवस्थाओं को खतरे में डालने की इजाजत नहीं देगा।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ अपनी ‘रेड लाइन’ पर पूरी तरह अडिग हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका इस्लामी शासन को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति या अर्थव्यवस्थाओं को खतरे में डालने की इजाजत नहीं देगा। फॉक्स न्यूज से बात करते हुए कहा कि वाल्ट्ज़ ने होर्मुज स्ट्रेड की आभासी नाकाबंदी का जिक्र किया, जो पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच एक गंभीर चुनौती बन गया है। इस दौरान उन्होंने आईआरजीसी की भूमिका पर भी सवाल खड़ा किया और कहा कि वह ईरान की अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के बड़े हिस्से को नियंत्रित करता है तथा शासन अपने युद्ध प्रयासों को जारी रखने के लिए इन संसाधनों का इस्तेमाल कर रहा है।
वाल्ट्ज़ ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप इस शासन को होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ के बल पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को नियंत्रित नहीं करने देंगे। उन्होंने बताया कि यह जलडमरूमध्य एक महत्वपूर्ण पारगमन मार्ग है, जहां से प्रतिदिन औसतन 15 मिलियन बैरल कच्चा तेल और 5 मिलियन बैरल तेल उत्पाद गुजरते हैं, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का करीब 25 प्रतिशत है। उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि आईआरजीसी ईरान की प्रमुख संपत्तियों के जरिए अपने युद्ध प्रयासों को वित्त पोषित कर रहा है। राष्ट्रपति कोई ढिलाई नहीं बरत रहे हैं। पूर्ववर्ती प्रशासनों के विपरीत, वे अपनी निर्धारित सीमाओं पर दृढ़ हैं और इस नरसंहारकारी शासन को दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति या अर्थव्यवस्थाओं को बंधक बनाने की अनुमति नहीं देंगे।
इस दौरान अमेरिकी राजदूत ने परमाणु हथियारों के मुद्दे पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका लंबे समय से स्पष्ट कर रहा है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उन प्रस्तावों का हवाला दिया, जिनमें ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोका गया है। वाल्ट्ज़ ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के राजदूत के रूप में, मैंने सुरक्षा परिषद में पिछले दो दशकों के उन प्रस्तावों का जिक्र किया है, जिन पर दुनिया भर के देशों ने ईरान के पास परमाणु हथियार न होने को सुनिश्चित करने के लिए मतदान किया। लेकिन राष्ट्रपति केवल कड़े शब्दों वाले पत्रों से संतुष्ट नहीं होंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान 48 घंटों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से नहीं खोलता है, तो अमेरिका ईरानी बिजली संयंत्रों पर हमला कर उन्हें ‘नष्ट’ कर देगा। ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा कि अगर ईरान ठीक 48 घंटों के भीतर बिना किसी धमकी के जलडमरूमध्य को पूरी तरह नहीं खोलता, तो संयुक्त राज्य अमेरिका उनके विभिन्न बिजली संयंत्रों पर हमला कर उन्हें नष्ट कर देगा, शुरुआत सबसे बड़े संयंत्र से होगी।
बता दें कि यह तनाव 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए बढ़ते संघर्ष के बीच है, जिसमें अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों में ईरान के 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल और कई खाड़ी देशों में अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बनाया, जिससे जलमार्गों में व्यवधान पैदा हुआ और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों तथा वैश्विक आर्थिक स्थिरता प्रभावित हुई। क्षेत्रीय संघर्ष के कारण ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN



