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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर उसके नेता युद्ध समाप्त करने के लिए उनकी शर्तों पर सहमत नहीं होते, तो ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों पर हमले किए जाएंगे.
यह बयान उस समय आया जब ईरानी मीडिया ने बताया कि गुरुवार को तेहरान के पश्चिम में स्थित करज शहर में निर्माणाधीन एक पुल पर बमबारी में आठ लोगों की मौत हो गई और लगभग 100 लोग घायल हो गए.
नौरोज़ की छुट्टियों के 13वें दिन, कई लोग बी1 सस्पेंशन ब्रिज के पास पिकनिक मना रहे थे, जब अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने इस पुल को दो बार निशाना बनाया.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “हमारी सेना, जो दुनिया में कहीं भी सबसे महान और सबसे ताक़तवर है (काफी ज़्यादा!), उसने ईरान में जो कुछ बचा है उसे नष्ट करना अभी शुरू भी नहीं किया है.”
“नया नेतृत्व जानता है कि क्या करना है, और उसे यह काम तेज़ी से करना होगा!”
हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने अपने एक्स अकाउंट पर कहा, “अधूरे पुलों समेत नागरिक ढांचों पर हमले करने से ईरानी आत्मसमर्पण नहीं करेंगे.”
उन्होंने कहा कि पुल पर किया गया हमला ‘अव्यवस्थित दुश्मन की हार और नैतिक पतन को ही दर्शाता है’,
और अमेरिका की वैश्विक साख को हुआ नुकसान ‘कभी भी ठीक नहीं हो पाएगा’.
अराग़ची ने ट्रंप के उस पहले के बयान का भी अलग से जवाब दिया, जिसमें ट्रंप ने बमबारी कर ईरान को ‘वापस पाषाण युग में भेज देने’ की धमकी दी थी.
उन्होंने पूछा कि क्या राष्ट्रपति वाकई ‘घड़ी को पीछे घुमाकर’ उस दौर में लौटना चाहते हैं, ‘जब मध्य पूर्व में तेल या गैस का उत्पादन ही नहीं होता था’.
‘कोई उनके ख़िलाफ़ खड़ा क्यों नहीं हो रहा?’
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ईरान के भीतर लोगों से संपर्क करना अब भी बेहद मुश्किल बना हुआ है, क्योंकि ईरानी अधिकारियों की ओर से लगाए गए इंटरनेट ब्लैकआउट के अब 35 दिन हो चुके हैं.
हालांकि, कुछ लोग सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं जैसे स्टारलिंक और अन्य तरीकों के ज़रिए संपर्क करने में सफल रहे हैं, लेकिन इसकी क़ीमत बहुत ज़्यादा है.
स्टारलिंक का इस्तेमाल करने या उसे अपने पास रखने पर दो साल तक की जेल हो सकती है.
ईरान के अंदर से बीबीसी फ़ारसी से बात करने वाले सभी लोग मौजूदा सत्ता प्रतिष्ठान के खिलाफ थे.
तेहरान में रहने वाली 20 वर्ष की उम्र की एक युवती ने करज में पुल पर हुए हमले को लेकर गहरी चिंता जताई और इसके साथ ही इस पर भी कि आगे क्या निशाना बनाया जा सकता है. वॉयस मैसेज के बीच में ही वह रोने लगी.
उसने कहा, “मैं बहुत बेबस महसूस कर रही हूं. हमारे पुल पर हमले को लेकर (ट्रंप) बेशर्मी के साथ पोस्ट कर रहे हैं. मुझे नहीं पता यह अभी कितने समय तक चलेगा.”
“कोई भी उनके खिलाफ़ खड़ा क्यों नहीं हो रहा? वह सचमुच हमें पाषाण युग में वापस ले जा रहे हैं.”
तेहरान में रहने वाले 20 साल के एक युवक ने कहा, “आख़िर में हमारे पास एक तबाह देश बच जाएगा. मुझे सबसे ज़्यादा निराशा और दुख इस बात का है कि मैं ऐसी स्थिति के बीच खड़ा हूं जहां मैं अपने देश को नष्ट होते देख रहा हूं और कुछ भी नहीं कर सकता. मेरा देश हर दिन और ज़्यादा तबाह हो रहा है.”
‘उनका मक़सद ईरान को तबाह करना है’
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करज में पुल पर हुए हमले ने एक ऐसे स्थानीय निवासी को भी चिंतित कर दिया, जो खुद को ‘युद्ध का समर्थक’ बताता है.
20 साल के उस युवक ने कहा, “यह पुल शहर में ट्रैफ़िक कम कर सकता. दूसरे हमले में इसे पूरी तरह नष्ट कर दिया गया. इस हमले ने मुझे परेशान कर दिया है. मुझे समझ नहीं आता कि उन्होंने इसे क्यों निशाना बनाया.”
अमेरिका‑इसराइल के सैन्य अभियान का समर्थन करने वाली 40 साल की एक तेहरान निवासी महिला ने कहा, “मुझे सच में हैरानी हुई कि उन्होंने एक पुल पर हमला किया.लेकिन मेरा मानना है कि इसके पीछे उनकी कोई वजह ज़रूर होगी.”
करज में हुए हमले और ट्रंप की टिप्पणियों की कट्टरपंथी और सत्ता समर्थक ईरानियों ने भी सोशल मीडिया पर निंदा की.
कई लोगों ने मांग की कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों वाले देशों के पुलों को निशाना बनाकर जवाबी हमला करें.
कुछ अन्य लोगों ने चेतावनी दी कि पुल पर हमला इस बात का एक और संकेत है कि अमेरिका और इसराइल का मक़सद ईरान की सैन्य क्षमताओं को नहीं, बल्कि ‘ईरान को तबाह करना’ है.
बीबीसी के अनुसार, मौजूदा इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद कुछ सरकारी अधिकारियों, सत्ता समर्थक सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और पत्रकारों के पास अब भी इंटरनेट की सुविधा है.
ट्रंप ने क्या कहा था?
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डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को धमकी दी थी कि अमेरिका आने वाले हफ़्तों में ईरान पर बमबारी करेगा और उसे ‘पाषाण युग’ में पहुँचा देगा.
गुरुवार की सुबह व्हाइट हाउस में अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “हम अगले दो से तीन हफ़्तों में उन (ईरान) पर बहुत बड़ा हमला करने जा रहे हैं. हम उन्हें वापस पाषाण युग में पहुँचा देंगे, जो उनकी जगह है.”
ट्रंप ने दोहराया था कि अमेरिका अगले दो-तीन हफ़्तों में ईरान से निकल जाएगा.
ट्रंप प्रशासन ने ईरान युद्ध शुरू होने के समय कहा था कि संघर्ष चार से छह हफ़्तों से ज़्यादा नहीं चलेगा.
ट्रंप ने अपने 19 मिनटों के संबोधन में ये दावा किया था कि ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध का मक़सद पूरा होने के बेहद क़रीब है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा था, “हम इसराइल का और मिडिल ईस्ट के अपने बाक़ी सहयोगियों जैसे सऊदी अरब, बहरीन, क़तर, कुवैत और यूएई को उनके सहयोग के लिए शुक्रिया अदा करते हैं.”
ट्रंप के मुताबिक़ बिना किसी उकसावे के ईरान ने इन देशों पर हमला किया इससे साबित होता है कि वो इस इलाक़े के लिए कितना बड़ा ख़तरा है.
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह यह संबोधन इसलिए दे रहे हैं ताकि लोगों को समझा सकें कि “एपिक फ़्यूरी” अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा के लिए क्यों ज़रूरी है.
अमेरिका ने ईरान के ख़िलाफ़ अपनी सैन्य कार्रवाई को ‘एपिक फ़्यूरी’ नाम दिया है.
ट्रंप ने कहा था कि पिछले 47 वर्षों में ईरान या उसके समर्थित समूहों ने कई चरमपंथी हमले और अन्य कार्रवाइयां कीं.
उन्होंने ईरान की सत्ता को ‘हत्यारी’ बताया. उन्होंने हाल ही में देश में हुए विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई का भी उल्लेख किया, जिसमें कई लोग मारे गए थे.
उन्होंने कहा था ऐसे नेताओं को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. “मैं ऐसा कभी नहीं होने दूँगा.”
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