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ईरान के साथ बात नहीं बनने के बाद ट्रंप की नई धमकी का क्या है मतलब, आगे क्या होगा?

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Source :- BBC INDIA

डोनाल्ड ट्रंप

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12 अप्रैल 2026, 19:31 IST

अपडेटेड 2 घंटे पहले

पढ़ने का समय: 6 मिनट

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध ख़त्म करने को लेकर बातचीत के ख़त्म होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि अब अमेरिका होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने वाले हर एक जहाज़ की नाकेबंदी करेगा.

बता दें कि इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार देर रात तक चली कई दौर की बातचीत बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई थी.

इस्लामाबाद में रविवार सुबह 6 बजे के बाद की गई प्रेस कॉन्फ़्रेस में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि “कोई समझौता नहीं हुआ है और हम अमेरिका वापस लौट रहे हैं.”

पाकिस्तान के कहने पर अमेरिका और ईरान दो हफ़्ते के संघर्ष विराम पर राज़ी हुए थे और दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए इस्लामाबाद आए थे. दोनों पक्षों के बीच बातचीत इस्लामाबाद के सेरेना होटल में हुई थी.

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‘टोल देने वाले को सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अमेरिका हॉर्मुज़ स्ट्रेट में दाख़िल होने या वहां से बाहर जाने की कोशिश करने वाले ‘किसी भी और हर एक जहाज़’ की नाकेबंदी शुरू करने जा रहा है.

ट्रुथ सोशल पर की गई एक लंबी पोस्ट में उन्होंने लिखा, “बैठक अच्छी रही, ज़्यादातर बिंदुओं पर सहमति बन गई, लेकिन जो एकमात्र बिंदु सच में मायने रखता था- परमाणु- उस पर बात नहीं बन पाई.”

इसी पोस्ट में ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने “अपनी नौसेना को निर्देश दिया है कि वो अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हर उस जहाज़ को रोके और उसकी तलाशी ले, जिसने ईरान को टोल दिया है”, और यह अमेरिकी नौसेना “स्ट्रेट में ईरानियों द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों को नष्ट करना शुरू करने जा रही है.”

उन्होंने कहा, “जो कोई भी अवैध शुल्क देता है, उसे खुले समुद्र में सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा,” और यह भी जोड़ा, “कोई भी ईरानी जो हम पर या शांतिपूर्ण जहाज़ों पर गोली चलाएगा, उसे नरक भेज दिया जाएगा.”

उन्होंने कहा कि “नाकेबंदी जल्द ही शुरू हो जाएगी.”

'ईरान ने हॉर्मुज़ स्ट्रेट खोलने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया'

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‘ईरान ने जानबूझकर होर्मुज़ स्ट्रेट नहीं खोला’

ट्रुथ सोशल पर एक दूसरी पोस्ट में ट्रंप ने कहा, “ईरान ने हॉर्मुज़ स्ट्रेट खोलने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया.”

उन्होंने कहा, “इस वजह से दुनिया भर में बहुत से लोगों और देशों को चिंताएं, अव्यवस्था और तकलीफ़ झेलनी पड़ी.”

उन्होंने आगे लिखा, “जैसा कि उन्होंने वादा किया था, उन्हें अब इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को खोलने की प्रक्रिया तेज़ी से शुरू कर देनी चाहिए.”

इसके बाद इस्लामाबाद में हुई बातचीत का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और वार्ताकार जैरेड कुश्नर ने पूरी जानकारी दी है. साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना भी की.

ट्रंप ने कहा कि ‘क़रीब 20 घंटे’ की बातचीत के बाद “सिर्फ़ एक ही बात मायने रखती है कि ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षा छोड़ने को तैयार नहीं है.”

उन्होंने कहा, “कई मायनों में जिन बिंदुओं पर सहमति बनी, वे हमारे सैन्य अभियानों को आख़िर तक जारी रखने से बेहतर हैं, लेकिन ऐसे अस्थिर, कठिन और अप्रत्याशित लोगों के हाथों में परमाणु ताक़त जाने देने के मुक़ाबले वे सारे बिंदु कोई मायने नहीं रखते.”

डोनाल्ड ट्रंप

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ट्रंप के ताज़ा बयान का मतलब

जो इनवुड

वर्ल्ड न्यूज़ कॉरेस्पॉन्डेंट

डोनाल्ड ट्रंप की पहचान यह है कि वह जल्दी समझौते चाहते हैं. इस्लामाबाद में किसी समझौते पर सहमति न बन पाने के बाद वह कैसी प्रतिक्रिया देंगे, इसको लेकर अटकलें थीं… अब उनकी पहली प्रतिक्रिया सामने आ गई है.

सोशल मीडिया पर की गई दो लंबी पोस्टों में उन्होंने कहा है कि वह उन कुछ जहाज़ों को रोक देंगे, जो हॉर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़र रहे हैं.

इन पोस्टों में यह साफ़ नहीं किया गया है कि सुरक्षित ‘रास्ता’ किस तरह से रोका जाएगा, लेकिन यह याद दिलाना ज़रूरी है कि अमेरिका ने हाल के महीनों में ही वेनेज़ुएला जाने या वहां से आने वाले जहाज़ों पर चढ़ाई की है.

एक अहम बात यह भी है कि ट्रंप ने कहा है, “इस नाकेबंदी में दूसरे देश भी शामिल होंगे”, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वे कौन से देश होंगे.

दुनिया के सबसे अहम जलमार्गों में से एक पर ईरान की सीमित, लेकिन असरदार नाकेबंदी को आमतौर पर सिर्फ़ वही जहाज़ पार कर पाए हैं, जो या तो ईरान के साथ हैं, या उन देशों के हैं जिन्हें ईरान दोस्त मानता है, या फिर वे जहाज़ जिनके बारे में माना जा रहा है कि उन्होंने टोल दिया है- जो लगभग 20 लाख डॉलर बताया जा रहा है.

ट्रंप यह भी इशारा करते हैं कि ईरान ने स्ट्रेट खोलने का वादा किया था.

लेकिन ईरान के सार्वजनिक बयानों को देखें तो उन्होंने बार-बार इसके उलट ही कहा है, और इसे शायद अपने सबसे अहम रणनीतिक दबाव के औज़ार के तौर पर औपचारिक मान्यता दिलाने की कोशिश की है.

अगर राष्ट्रपति की यह धमकी अमल में आती है, तो इससे वैश्विक बाज़ारों तक पहुंचने वाला तेल और कम हो जाएगा, जिसके आर्थिक असर भी होंगे.

ये संदेश भले ही वे पूरी तरह जंग दोबारा शुरू होने जैसी स्थिति नहीं हैं, जिनके पैदा होने की आशंका थी, लेकिन यह निश्चित रूप से तनाव को एक और स्तर तक बढ़ाने वाला कदम है.

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (बाएं), पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ (बीच में) और ईरान के स्पीकर बाक़र क़ालीबाफ़ (दाएं)

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क्या भविष्य में बातचीत फिर शुरू हो सकती है?

सेबेस्टियन अशर

बीबीसी के वैश्विक मामलों के संवाददाता

इस्लामाबाद में चली लंबी चौड़ी बातचीत के दौरान जो उम्मीदें जगी थीं, उन पर फ़िलहाल विराम लग गया है.

ऐसा लगता है कि दोनों पुराने दुश्मनों के बीच ज़रूरी भरोसा अभी कायम नहीं हो पाया है. जिन अहम मुद्दों पर अड़चन थी, वे भी दूर नहीं हो सके हैं.

लेकिन जैसा कि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है, कोई भी यह उम्मीद नहीं कर रहा था कि एक ही बैठक में समझौता हो जाएगा, चाहे बातचीत कितनी ही गंभीर, उच्च स्तर की और लंबी क्यों न हो.

फिलहाल यह साफ़ नहीं है कि दो हफ्ते के युद्धविराम के बचे हुए समय में बातचीत आगे बढ़ाने के लिए कोई ठोस आधार तैयार हो पाया है या नहीं.

यह भी साफ़ नहीं है कि दोनों पक्ष एक ऐसा समझौता करने के लिए कितनी रियायतें दे सकते हैं जो इनके साथ ही दुनिया के बाकी हिस्सों के हित में भी दिखाई देता है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS