Source :- LIVE HINDUSTAN
गौरतलब है कि 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद से क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। इस दौरान 300 से अधिक अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं, जिनमें से अधिकांश को इलाज के बाद वापस ड्यूटी पर भेज दिया गया है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि रूस ने सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे की उपग्रह तस्वीरें हमले से ठीक पहले कई बार ली थीं और यह जानकारी ईरान के साथ साझा की गई हो सकती है। इस दावे ने पहले से ही तनावपूर्ण अंतरराष्ट्रीय माहौल को और गंभीर बना दिया है। जेलेंस्की के अनुसार, यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में यह सामने आया है कि रूस के सैटेलाइट ने प्रिंस सुल्तान एयरबेस की 20 मार्च, 23 मार्च और 25 मार्च को तस्वीरें ली थीं। इसके ठीक एक दिन बाद 26 मार्च को ईरान ने इस एयरबेस पर हमला किया।
बताया गया है कि इस हमले में ईरान ने छह बैलिस्टिक मिसाइलें और 29 ड्रोन दागे। इस हमले में कम से कम 15 सैनिक घायल हुए, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई गई है। यह एयरबेस अमेरिका और सऊदी अरब दोनों की सेनाओं के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकाना है।
जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन के अनुभव के अनुसार, रूस द्वारा किसी स्थान की बार-बार सैटेलाइट इमेजिंग करना संभावित हमले का संकेत होता है। उन्होंने कहा, “अगर वे एक बार तस्वीर लेते हैं तो तैयारी होती है, दूसरी बार लेते हैं तो वह अभ्यास जैसा होता है और तीसरी बार का मतलब है कि एक-दो दिनों में हमला हो सकता है।”
हालांकि, इस दावे के समर्थन में अभी तक कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया गया है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि यूक्रेन ने यह जानकारी कैसे प्राप्त की। फिर भी इस बयान को वैश्विक स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है, क्योंकि इससे रूस और ईरान के बीच संभावित सैन्य सहयोग की आशंकाएं बढ़ती हैं।
जेलेंस्की इस समय खाड़ी देशों के दौरे पर हैं, जहां वे अपने देश की एयर डिफेंस प्रणालियों को साझा करने और सहयोग बढ़ाने के लिए समझौते करने की कोशिश कर रहे हैं। यूक्रेन की ये प्रणालियां रूस के साथ चल रहे युद्ध में परखी जा चुकी हैं और अब उन्हें ईरानी मिसाइल और ड्रोन खतरों का सामना कर रहे देशों के लिए उपयोगी बताया जा रहा है।
गौरतलब है कि 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद से क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। इस दौरान 300 से अधिक अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं, जिनमें से अधिकांश को इलाज के बाद वापस ड्यूटी पर भेज दिया गया है, जबकि कम से कम 13 सैनिकों की मौत हो चुकी है।
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