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‘ईरान की ताक़त ख़त्म करने के लिए खाड़ी देशों ने अमेरिका पर दबाव बनाया’, अरब मीडिया में इस रिपोर्ट ये चर्चा

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Source :- BBC INDIA

अरब मीडिया

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ईरान जंग की वजह से अरब के इलाक़ाई और घरेलू मीडिया में खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर लगातार चर्चा जारी है और इसमें गल्फ़ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) देशों के अमेरिका को लेकर अलग अलग नज़रिए की बात भी सामने आ रही है.

कुछ मीडिया संस्थानों ने रॉयटर्स की एक रिपोर्ट को ख़ासी प्रमुखता दी है, जिसमें दावा किया गया है कि खाड़ी देशों ने अमेरिका पर “होर्मुज़ संकट गहराने के साथ ईरान को हमेशा के लिए निष्क्रिय करने” का दबाव डाला.

इसके उलट, कुछ अन्य मीडिया संस्थानों ने ईरान पर हमले के अमेरिकी फ़ैसले की आलोचना करते हुए रिपोर्टें कीं और वॉशिंगटन पर “खाड़ी देशों को निशाना बनाए जाने के हालात को नज़रअंदाज़ करने” का आरोप लगाया.

कुछ रिपोर्टों में खाड़ी के विश्लेषकों के हवाले से यह भी कहा गया कि जीसीसी देश अमेरिका पर अपनी लंबे समय से चली आ रही सुरक्षा निर्भरता की फिर से समीक्षा करेंगे. साथ ही नेटो की तर्ज पर साझा रक्षा सिस्टम बनाने की मांग भी दोहराई जा रही है.

इस बीच, कई मीडिया संस्थानों ने खाड़ी देशों की तनाव कम करने की कोशिशों पर भी रिपोर्ट जारी रखीं, जिसमें सैन्य टकराव रोकने और विवाद सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देने की अपील शामिल थी.

‘ईरान की क्षमताओं को नष्ट करने’ वाली अपील

ईरान हमला

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रॉयटर्स की यह रिपोर्ट, जो 16 मार्च को प्रकाशित हुई थी, कुछ अरब मीडिया माध्यमों की सुर्खियों में है.

बेथलेहम स्थित मान न्यूज़ वेबसाइट का शीर्षक था, “खाड़ी देशों का ट्रंप को पैग़ाम- जब तक ईरान की क्षमताएं नष्ट न हो जाएं, तब तक मत रुकिए.”

लेबनान के हिज़्बुल्लाह समर्थक दैनिक अल-अख़बार ने लिखा, “खाड़ी देश वॉशिंगटन पर ईरान पर हमले जारी रखने का दबाव बना रहे हैं: हम अकेले झेलने के लिए नहीं छोड़े जाना चाहते.”

रिपोर्ट में तीन खाड़ी स्रोतों के हवाले से कहा गया कि भले ही खाड़ी देशों ने “अमेरिका से ईरान के साथ जंग शुरू करने के लिए नहीं कहा, लेकिन अब कई देश यह चाहते हैं कि अमेरिका बीच में न रुके और इस्लामिक रिपब्लिक (ईरान) को इस स्थिति में न छोड़े कि वह खाड़ी के तेल आपूर्ति मार्ग और उस पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को ख़तरा पहुंचा सके.”

सऊदी अरब स्थित गल्फ़ रिसर्च सेंटर के चेयरमैन अब्दुलअज़ीज़ सगीर ने रॉयटर्स से कहा, “अगर अमेरिकी अपना काम पूरा होने से पहले पीछे हटते हैं, तो हमें अकेले ईरान का सामना करना पड़ेगा.”

क्या अमेरिका ने ख़तरे को ‘नज़रअंदाज़’ किया?

ट्रंप

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कुछ अन्य अरब मीडिया माध्यमों का रुख़ काफ़ी अलग रहा और उन्होंने अमेरिकी नीति की आलोचना की.

लंदन स्थित दैनिक अल-अरब ने रिपोर्ट किया कि अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसियों ने चेतावनी दी थी कि हमले की स्थिति में ईरान खाड़ी देशों को निशाना बना सकता है, लेकिन हो सकता है कि अमेरिका ने इस स्थिति को ‘नज़रअंदाज़’ किया हो.

रिपोर्ट में कहा गया कि यह या तो ईरानी प्रतिक्रिया के आकलन में चूक का नतीजा है या फिर यह संकेत है कि वॉशिंगटन ने ख़ुफ़िया चेतावनियों के बजाय अपने राजनीतिक हिसाब-किताब को प्राथमिकता दी.

ओमान के पत्रकार और शोधकर्ता सालेम अल-जाहौरी ने मिस्र के निजी चैनल योम7 से कहा कि जीसीसी देश अमेरिका पर अपनी “सुरक्षा निर्भरता” पर फिर से विचार करेंगे और साझा प्रतिरोधक सिस्टम बनाने की संभावना पर भी चर्चा करेंगे.

उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों को “जंग में घसीटा गया” और उनके इलाकों में मौजूद सैन्य ठिकानों से मिसाइलें दागने के लिए उनका इस्तेमाल किया गया, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी ज़ोर देकर कहा कि वे “किसी भी तरह से इस जंग में शामिल नहीं होंगे.”

अल-मदार सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज़ के प्रमुख सालेह अल-मुतैरी ने अल जज़ीरा से कहा कि जीसीसी देश “इस जंग की क़ीमत” अमेरिका से ज़्यादा चुकाएंगे, ख़ासकर इसके लंबे आर्थिक असर के कारण.

वहीं, ओमान के लेखक और शोधकर्ता मोहम्मद अल-अराइमी ने अल जज़ीरा से कहा कि ख़तरा सिर्फ़ ईरान नहीं है, बल्कि क्षेत्र के लिए “ख़तरनाक इसराइली परियोजना” भी ख़तरा है.

होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलने पर ट्रंप की अपील

होर्मुज़ स्ट्रेट

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खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख पैन-अरब टीवी चैनलों ने अमेरिकी सहयोगियों की प्रतिक्रियाओं को भी प्रमुखता से दिखाया, खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस अपील को, जिसमें उन्होंने होर्मुज़ स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने के लिए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की बात कही थी.

कतर के अल जज़ीरा टीवी ने कहा कि कई अमेरिकी सहयोगी “सावधान या हिचकिचाते” दिखे, और कुछ देशों ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए वैकल्पिक सुझाव भी दिए.

कुछ चैनलों ने ट्रंप के इस बयान को भी प्रमुखता दी कि इसराइल कभी भी ईरान के ख़िलाफ़ परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करेगा.

सऊदी अरब के अल-अरबिया और स्काई न्यूज़ अरेबिया ने रिपोर्ट किया कि पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुमान के मुताबिक़ इसराइल के पास करीब 90 परमाणु हथियार हैं.

रूस के आरटी ने कहा कि इसराइल ने आधिकारिक तौर पर परमाणु हथियार होने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उसके पास दर्जनों या सैकड़ों परमाणु हथियार हो सकते हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS