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7 घंटे पहले
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ईरान के एक जहाज़ को भारत में शरण दिए जाने के सवाल पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में बयान दिया है. हालांकि उन्होंने हिंद महासागर में डुबोए गए ईरानी जहाज़ ‘आईआरआईएस डेना’ के बारे में कुछ नहीं कहा है.
बुधवार 4 मार्च को अमेरिका ने एक वीडियो जारी कर बताया था कि उसकी एक पनडुब्बी ने हिन्द महासागर में ईरान के एक युद्धपोत पर हमला किया और उसे डुबो दिया.
इस घटना की भारत में भी ख़ूब चर्चा हुई और विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि भारत का इस मुद्दे पर मौन रहना बिलकुल ग़लत है.
विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा था कि ये जहाज़ भारत का मेहमान था और इसे अमेरिका ने डुबो दिया. ये जहाज़ फ़रवरी में भारत के ‘मिलन युद्धाभ्यास’ में हिस्सा लेने आया था.
इसके साथ ही भारत की समुद्री सुरक्षा को लेकर कई गंभीर भी सवाल खड़े किए गए.
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अब इस घटना के बाद पहली बार विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में बयान दिया है.
सोमवार को शुरू हुए बजट सत्र के दूसरे भाग में राज्यसभा में बोलते हुए जयशंकर ने कहा, “28 फ़रवरी को ईरानी सरकार ने हमसे इस क्षेत्र में मौजूद तीन ईरानी जहाज़ों को शरण देने के लिए कहा. हमने एक मार्च को इसकी मंज़ूरी दे दी. चार मार्च को आईआरआईएस लावान को कोच्चि पोर्ट पर डॉक किया गया. जहाज़ में मौजूद सभी क्रू मेंबर हमारी देखरेख में हैं. मानवीय दृष्टिकोण से हमें यही सही लगा.”
एस जयशंकर ने ये भी कहा कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने ‘हमें इसके लिए शुक्रिया कहा.’
जयशंकर ने ये भी कहा कि, “मौजूदा हालात में ईरान की लीडरशिप से संपर्क करना मुश्किल हो रहा है लेकिन मैंने 28 फ़रवरी और 5 मार्च को अब्बास अराग़ची से बात की और आगे भी हम संपर्क में रहेंगे.”
आईआरआईएस डेना पर नहीं बोले जयशंकर
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एस जयशंकर ने अपने भाषण में तीन ईरानी जहाज़ों को शरण देने की बात की.
उन्होंने आईआरआईएस लावान नाम के ईरानी जहाज़ का भी ज़िक्र किया और बताया कि वो कोच्चि पोर्ट पर भारतीय अधिकारियों की देखरेख में है और उसके क्रू मेंबर सुरक्षित हैं.
लेकिन उन्होंने आईआरआईएस डेना पर हुए अमेरिकी हमले के बारे में कुछ नहीं कहा.
ना ही उन्होंने ये बताया कि जिन तीन ईरानी जहाज़ों को भारत में शरण देने के ईरानी सरकार के अनुरोध को एक मार्च को माना गया था, उनमें क्या आईआरआईएस डेना भी था.
हालांकि एस जयशंकर ने बीते शनिवार को रायसीना डायलॉग 2026 में ईरान के डुबोए गए जहाज़ पर एक बयान दिया था.

रायसीना डायलॉग के मंच से जयशंकर ने कहा, “हमें ईरान की तरफ से संदेश मिला कि उनके एक जहाज़ हमारे बंदरगाह में आना चाहता है. जहाज़ में तकनीकी समस्या थी और वह उस समय भारतीय सीमा के सबसे क़रीब था.”
उन्होंने बताया, “1 मार्च को भारत ने उन्हें अनुमति दी. यहां पहुंचने में कुछ दिन लगे, फिर वे कोच्चि में आकर रुके. जब वो यहां पहुंचे, तब स्थिति बिल्कुल अलग थी. वो लोग अपने बेड़े की समीक्षा के लिए आ रहे थे और फिर वो किसी तरह से घटनाओं के गलत पक्ष में फंस गए.”
जयशंकर ने शरण देने वाले जहाज़ का नाम नहीं लिया है लेकिन इसका नाम ‘आईआरआईएस लावान’ बताया जा रहा है.
इसके अलावा एस जयशंकर से रायसीना डायलॉग के उसी सत्र में डुबोए गए ईरानी जहाज़ से जुड़े सवाल का जवाब भी दिया.
जयशंकर ने कहा, “अन्य जहाज़ों में से एक की श्रीलंका में भी ऐसी ही स्थिति थी. लेकिन जहाज़ को बदकिस्मती से नहीं बचाया जा सका.”
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “हमने इस पूरे मामले को इंसानियत के नज़रिए से देखा, क़ानूनी मुद्दों से अलग होकर. मुझे लगता है कि हमने सही काम किया.”
मध्य-पूर्व के हालात और ऊर्जा संकट पर क्या बोले जयशंकर
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इसके अलावा एस जयशंकर ने ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमलों के बाद मध्य-पूर्व के देशों में जारी संकट पर भी बात की.
ईरान ने इन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है जिसके बाद से यहां की उड़ानों पर असर पड़ा है और कई भारतीय भी यूएई, सऊदी अरब और ओमान समेत कई खाड़ी देशों में फंसे हैं.
एस जयशंकर ने कहा कि भारत सरकार मध्य-पूर्व के इन देशों से लगातार संपर्क में है और वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षा उसकी पहली प्राथमिकता है.
उन्होंने ईरान युद्ध के बाद ऊर्जा संकट की आशंका के बारे में भी बात की.
कई विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि मौजूदा युद्ध के कारण भारत में तेल और ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है.
इस पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “हम ऊर्जा की उपलब्धता, लागत और एनर्जी मार्केट पर लगातार नज़र रखे हुए हैं. भारतीय उपभोक्ताओं का हित हमारे लिए सबसे ऊपर रहेगा.”
उन्होंने कहा, “भारत शांति के पक्ष में है. और सभी पक्षों से अपील करता है कि बातचीत पर ज़ोर दिया जाए. संयम बरता जाए और आम नागरिकों की सुरक्षा पर ज़ोर दिया जाए.”
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SOURCE : BBC NEWS


