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इस बैंक में ICICI समूह की होगी बड़ी हिस्सेदारी, डिमांड में शेयर, चेक करें टारगेट प्राइस

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Source :- LIVE HINDUSTAN

संक्षेप:

ICICI प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड और ICICI बैंक लिमिटेड की समूह संस्थाओं को फेडरल बैंक में 9.95 फीसदी तक हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी मिली है। इस खबर से पहले फेडरल बैंक के शेयर में तेजी देखी गई।

ICICI प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड और ICICI बैंक लिमिटेड की समूह संस्थाओं को प्राइवेट सेक्टर के फेडरल बैंक में 9.95 फीसदी तक हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी मिली है। यह मंजूरी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से मिली है। स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में फेडरल बैंक ने बताया कि आरबीआई ने 11 फरवरी, 2026 को अपनी मंजूरी दी थी।

शेयर में उछाल

इस खबर से पहले फेडरल बैंक के शेयर में तेजी देखी गई। सप्ताह के तीसरे दिन बुधवार को बैंक के शेयर की कीमत 3% बढ़कर 290.80 रुपये तक पहुंच गई। शेयर का ट्रेडिंग रेंज 293.35 रुपये से 279.30 रुपये के बीच रहा। बता दें कि इसी फरवरी महीने में शेयर 298.40 रुपये तक गया था। यह शेयर के 52 हफ्ते का हाई है।

ब्रोकरेज हैं बुलिश

हाल ही में सेंट्रम ब्रोकिंग के अनुमानों के अनुसार फेडरल बैंक से वित्त वर्ष 2026-2028 के दौरान 25% की आय सीएजीआर दर्ज करने की उम्मीद है। सेंट्रम ने शेयर के लिए टारगेट ₹305 तय किया है। मोतीलाल ओसवाल ने वित्त वर्ष 2026 और वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने लाभ-आय (पीएटी) अनुमानों को क्रमशः 2.5% और 2.3% तक बढ़ा दिया है। कंपनी ने शेयर पर अपनी ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है और लक्ष्य मूल्य ₹310 प्रति शेयर निर्धारित किया है।

कैसे रहे दिसंबर तिमाही के नतीजे

वित्त वर्ष 2025-26 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में फेडरल बैंक का मुनाफा नौ प्रतिशत बढ़कर 1,041 करोड़ रुपये रहा। केरल स्थित निजी क्षेत्र के इस बैंक का 2024-25 की तीसरी (अक्टूबर-दिसंबर) तिमाही में मुनाफा 955 करोड़ रुपये रहा था। बैंक ने कहा कि शुद्ध ब्याज आय नौ प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 2,653 करोड़ रुपये हो गई। यह वृद्धि लोन में नौ प्रतिशत की बढ़ोतरी और शुद्ध ब्याज मुनाफे के 0.07 प्रतिशत बढ़कर 3.18 प्रतिशत होने के कारण हुई। दिसंबर तिमाही में गैर-ब्याज आय में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 1,100 करोड़ रुपये हो गई। मुनाफे में वृद्धि इसकी मुख्य वजह रही।

मार्च तिमाही के नतीजों पर दिखेगा असर?

दिसंबर तिमाही के नतीजे जारी करते वक्त फेडरल बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी के.वी.एस. मणियन ने बताया था कि इसकी 47 प्रतिशत ऋण संपत्तियां रेपो दर से जुड़ी हुई हैं। केंद्रीय बैंक के ब्याज दर में कटौती का प्रभाव मार्च तिमाही में दिखेगा जिसे शुद्ध लाभ एवं आय (एनआईएम) की रक्षा के लिए कम करने की जरूरत है। बैंक की ग्रॉस एनपीए घटकर 1.72 प्रतिशत रही जो एक साल पहले इसी तिमाही में 1.95 प्रतिशत थी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN