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इसराइल की घरेलू राजनीति के विवाद में घिरा पीएम मोदी का दौरा

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Source :- BBC INDIA

इसराइल

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24 फ़रवरी 2026, 12:57 IST

अपडेटेड 8 घंटे पहले

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इसराइल का विपक्ष बुधवार को संसद में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का बहिष्कार करने की योजना बना रहा है.

दरअसल यह वहाँ की घरेलू राजनीति में आपसी विवाद के कारण हो रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को इसराइल दौरे पर जा रहे हैं. इसराइली मीडिया का कहना है कि नरेंद्र मोदी इस दौरे में वहाँ की संसद को भी संबोधित करेंगे.

इसराइली न्यूज़ वेबसाइट हारेत्ज़ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ”केनेस्सेट (इसराइली संसद) स्पीकर ने विशेष सत्र में सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष आइज़ैक अमीत को आमंत्रित नहीं किया है. इस निर्णय को लेकर टकराव जारी है जबकि परंपरा के अनुसार उन्हें बुलाया जाता है.”

”इसराइल के सार्वजनिक प्रसारक कान के मुताबिक़ केनेस्सेट स्पीकर अमीर ओहाना ने कहा कि मोदी आधी ख़ाली संसद को संबोधित नहीं करेंगे और बहिष्कार करने वाले विपक्षी सांसदों की सीटें भरने के लिए पूर्व सांसदों को आमंत्रित करने की योजना है.”

न्यायिक प्राधिकरण के एक प्रवक्ता ने सोमवार को द टाइम्स ऑफ इसराइल को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष आइज़ैक अमीत को बुधवार को केनेस्सेट में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के लिए अब तक निमंत्रण नहीं मिला है.

निमंत्रण न भेजे जाने की पुष्टि केनेस्सेट स्पीकर अमीर ओहाना के एक प्रवक्ता ने भी की, जिन्होंने स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार, निमंत्रण भेजे जाने के बारे में पूछे जाने पर कहा कि “कोई नई बात नहीं है.”

इसराइल के विपक्षी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री येर लापिड ने 23 फ़रवरी को एक्स पर लिखा था , ”मैं प्रधानमंत्री नेतन्याहू से आग्रह करता हूँ कि वह संसद के स्पीकर को निर्देश दें कि सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष का बहिष्कार न करें और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में आयोजित औपचारिक सत्र में विपक्ष को भाग लेने दें. हम सत्र में रहना चाहते हैं, हमें सत्र में रहना है, प्रधानमंत्री नेतन्याहू को संसद के स्पीकर अमीर ओहाना को निर्देश देना चाहिए कि वे हमें सत्र में भाग लेने की अनुमति दें.”

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बहिष्कार की धमकी पर विवाद

हारेत्ज़ ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष आईज़ैक अमीत को आमंत्रित न करने का निर्णय नेतन्याहू सरकार के उस प्रयास का हिस्सा है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष और अटॉर्नी जनरल गाली बहारव-मिआरा के अधिकार को चुनौती दी जा रही है. साथ ही न्यायपालिका की शक्तियों में बदलाव के लिए क़ानून लाए जा रहे हैं.

येर लापिड ने पिछले हफ़्ते प्रस्तावित बहिष्कार की घोषणा करते हुए कहा था, “जस्टिस अमीत का बहिष्कार, विपक्ष का भी बहिष्कार है और इससे हमें सत्र में शामिल होने की अनुमति नहीं मिलेगी.”

हारेत्ज़ ने लिखा है, ”गुरुवार को केनेस्सेट में बोलते हुए उन्होंने कहा था कि विपक्ष, “भारत को शर्मिंदा नहीं करना चाहता, जहाँ डेढ़ अरब लोगों के देश का नेता आधी ख़ाली केनेस्सेट के सामने खड़ा हो. लापिड ने दावा किया कि भारतीय दूतावास घबराहट में है.”

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ओहाना ने 18 फ़रवरी को एक्स पर लापिड की इस धमकी को राजनीतिक टकराव में अवैध हथियार बताया था.

ओहाना ने लापिड से दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण शक्तियों में से एक के साथ इसराइल के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नुक़सान न पहुंचाने की अपील की.

उन्होंने एक्स पर लिखा था, ”लापिड को भारतीय दूतावास के साथ अपनी अगली बातचीत में यह समझाना चाहिए कि उन्होंने राष्ट्रपति जेवियर मिलेई और राष्ट्रपति ट्रंप के सम्मान में आयोजित विशेष सत्रों का बहिष्कार क्यों नहीं किया जबकि जस्टिस अमीत को उनमें भी आमंत्रित नहीं किया गया था. लेकिन अब वे भारत के प्रधानमंत्री का बहिष्कार करना चाहते हैं.”

मोदी की यह दूसरी इसराइल यात्रा है. पिछले महीने भी ओहाना की ओर से अमीत को आमंत्रित न करने के निर्णय के विरोध में विपक्षी दल केनेस्सेट की स्थापना वर्षगांठ के विशेष सत्र में शामिल नहीं हुए थे.

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सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष का बहिष्कार

जनवरी 2025 में अमीत के कोर्ट अध्यक्ष चुने जाने के बाद, न्याय मंत्री यारिव लेविन ने उनके अधिकार को मान्यता देने से इनकार कर दिया था और बाद में उनसे मिलने, उन्हें अदालत के प्रमुख के रूप में संबोधित करने के साथ क़ानून के अनुसार, राज्य राजपत्र में उनकी नियुक्ति प्रकाशित करने से भी इनकार किया था.

सरकार के कुछ अन्य सदस्यों ने भी इसी रुख़ का समर्थन किया और डायस्पोरा मामलों के मंत्री अमीहाई चिकली के अलावा संचार मंत्री श्लोमो करही ने कई मौक़ों पर सार्वजनिक रूप से सरकार से अहम अदालत आदेशों और फ़ैसलों का पालन न करने की अपील की.

इस बहिष्कार के परिणामस्वरूप अमीत को केनेस्सेट के कई कार्यक्रमों से बाहर रखा गया, जिनमें परंपरागत रूप से उन्हें आमंत्रित किया जाता है. जैसे कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य विश्व नेताओं के भाषण.

पिछले साल अक्तूबर में केनेस्सेट के 2025 शीतकालीन विधायी सत्र के उद्घाटन के दौरान, स्पीकर अमीर ओहाना ने अमीत को चीफ़ जस्टिस के बजाय केवल एक जज के रूप में संबोधित किया, जिस पर राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने आपत्ति जताई थी.

दो हफ़्ते पहले अमीत को आमंत्रित न किए जाने के विरोध में विपक्ष ने केनेस्सेट के 77वें स्थापना दिवस के मौक़े पर आयोजित सत्र का बहिष्कार किया. लापिड विपक्ष के एकमात्र सदस्य थे, जिन्होंने सभा को संबोधित किया और अपने भाषण में नेतन्याहू के कोर्ट अध्यक्ष के साथ किए गए व्यवहार की आलोचना की.

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मोदी का दूसरा दौरा

नरेंद्र मोदी का इसराइल दौरा तब हो रहा है, जब ट्रंप की नीतियों के कारण भारत को कई मोर्चों पर अलग-अलग चुनौतियों से जूझ रहा है.

हारेत्ज़ ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है, ”मोदी और नेतन्याहू ने ट्रंप के 2.0 के दौर के अनुरूप ख़ुद को ढालने की क्षमता दिखाई है, जिसमें कूटनीति व्यक्तिगत हो गई है और शासन का मूल मंत्र “स्टेट मैं ही हूँ” बन गया है. पुतिन ही रूस हैं, शी ही चीन हैं, बीबी ही इसराइल हैं और मोदी ही भारत हैं. हर एक ने अपने देश को अमेरिका के एक अनिवार्य सहयोगी के तौर पर भी स्थापित किया है-सैन्य, प्रौद्योगिकी और भू-राजनीतिक स्तर पर.”

हारेत्ज़ ने लिखा है, ”फिर भी इन समानताओं के साथ गहरे अंतर भी मौजूद हैं -न केवल उनके ऐतिहासिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक संदर्भों में, बल्कि इस बात में भी कि वे अपनी शक्ति को कैसे बनाए रखते और बढ़ाते हैं. कई विशेषज्ञों की मदद से हारेत्ज़ ने उस यात्रा के बाद मोदी के उदय और उनके कार्यकाल का अध्ययन करने का प्रयास किया, और यह समझने की कोशिश की कि एक ऐसे प्रधानमंत्री, जिन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में देश में एक भी पारंपरिक प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की, वे कैसे राजनीतिक रूप से इतने अहम बन गए.”

हारेत्ज़ से कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में सीनियर फेलो और साउथ एशिया प्रोग्राम के निदेशक मिलन वैष्णव ने कहा, “मोदी एक पीढ़ी में एक बार दिखने वाली राजनीतिक प्रतिभा हैं. वह बराक ओबामा जैसी भाषण कला को बिल क्लिंटन जैसी रीटेल राजनीतिक समझ के साथ जोड़ते हैं. आम तौर पर राजनेताओं में इनमें से कोई एक गुण होता है, दोनों में महारत बहुत ही दुर्लभ है.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिवन्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS