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इजरायल ने कई जंगों में मदद की; जयशंकर ने बताई गहरी दोस्ती और ईरान पर चुप्पी की एक-एक वजह

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Source :- LIVE HINDUSTAN

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इजरायल के साथ नजदीकी रिश्तों पर दोटूक जवाब दिया। यही नहीं ईरान को लेकर भी कहा कि उससे हमारे संबंध पहले की तरह कायम हैं और दोस्ताना संबंधों के चलते ही उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से हमारे 4 जहाजों को गुजरने दिया, जबकि दूसरे देशों के जहाज फंसे हुए हैं।

अमेरिका और इजरायल के ज्यादा करीब जाने का फायदा क्या है? यह सवाल ईरान में चल रही जंग को लेकर अकसर पूछा जा रहा है। बुधवार को सर्वदलीय बैठक के दौरान भी ऐसा सवाल आया, जिस पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इजरायल ने कई युद्धों के दौरान हमें मदद की और वह हमारे लिए एक बड़ा डिफेंस पार्टनर है। उसके जरिए हमें रक्षा तकनीक के मामले में बड़ी मदद मिलती रही है। इस तरह उन्होंने इजरायल के साथ नजदीकी रिश्तों पर दोटूक जवाब दिया। यही नहीं ईरान को लेकर भी कहा कि उससे हमारे संबंध पहले की तरह कायम हैं और दोस्ताना संबंधों के चलते ही उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से हमारे 4 जहाजों को गुजरने दिया, जबकि दूसरे देशों के जहाज फंसे हुए हैं।

एनसीपी-एसपी की सांसद सुप्रिया सुले ने सर्वदलीय बैठक के दौरान एस. जयशंकर से पूछा था कि आखिर हमें इजरायल और अमेरिका से रिश्ते रखने में क्या फायदा है। इसी के जवाब में एस. जयशंकर ने जवाब दिया कि वह हमारा करीबी साझेदार है और कई जंगों में इजरायल ने हमारी मदद की है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जयशंकर ने कहा कि अमेरिका भारत का एक बड़ा कारोबारी साझेदार है और हाई एंड टेक्नॉलजी हम वहां से लेते हैं। इसके अलावा इजरायल भी एक बड़ा तकनीकी साझेदार है। उसने कई जंगों के दौरान हमारी मदद की थी।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने खुलकर नहीं बताया कि इजरायल ने कब और कैसे मदद की, लेकिन माना जा रहा है कि उनका इशारा पाकिस्तान से युद्धों के दौरान मिली सहायता से था। अब तक जंगों के दौरान इजरायल से मिलने वाली मदद के कयास ही लगा करते थे, लेकिन स्पष्ट रूप से कभी नहीं कहा गया कि उसने क्या मदद की है। पहली बार विदेश मंत्री ने इस तरह से इजरायल को लेकर खुलकर बात की। इसके साथ ही उन्होंने इस बात को भी खारिज किया कि भारत ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या पर चुप्पी साधे रखी और बहुत देरी से जवाब दिया।

विदेश मंत्री ने कहा कि ऐसे आरोप गलत हैं। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने उनकी मौत को लेकर शोक संवेदना प्रकट की थी और संदेश भी लिखा था। इस दौरान यह भी सवाल विदेश मंत्री से हुआ कि ईरान पर हमले की निंदा ना करने से शिया मुल्क के साथ हमारे रिश्ते कमजोर हुए। इस पर उन्होंने कहा कि सऊदी अरब और यूएई में ईरान की ओर से हमले किए गए थे। हमें वहां की भी चिंता थी क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय वहां भी रहते हैं। इन दो देशों में ही करीब 80 लाख भारतीय बसे हैं। ऐसे में वहां ईरानी ड्रोन्स और मिसाइलों से जो हमले हुए, हमें उसे लेकर भी चिंता थी और भारतीयों के लिहाज से हम सोच रहे थे।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN