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आर्थिक संकट के बीच US में लॉबिंग कर रहा पाक, ऑप. सिंदूर के पहले किया रिकॉर्ड खर्च

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ऑपरेशन सिंदूर के पहले पाकिस्तान सरकार ने ट्रंप प्रशासन में अपनी पहुंच को मजबूत करने के लिए करीब 6 लॉबिंग फर्म्स के साथ मिलकर काम करना शुरू किया था। अमेरिकी न्याय विभाग में दाखिल किए गए आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान इसके लिए करीब 6 लाख डॉलर हर महीने दे रहा था।

अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन में मजबूत पहुंच बनाने के लिए पाकिस्तान ने पिछले साल करोड़ों रुपए खर्च किए हैं। ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से ही पाकिस्तान ने यह कोशिश शुरू कर दी थी। अब सामने आ रहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान की तरफ से इन लॉबिंग फर्मों से धीरे-धीरे संबंध समाप्त किए जा रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की शहबाज सरकार ने 2025 में लॉबिंग के लिए हर महीने करीब 6 लाख डॉलर का खर्च किया था, जो कि पिछले कई दशकों से की गुना ज्यादा था। खासतौर पर लॉबिंग फंड में यह वृद्धि पहलगाम हमले के ठीक पहले देखी गई थी।

अमेरिकी न्याय विभाग में दाखिल आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान ने जेवलिन एडवाइजर्स, सीडन लॉ, ओर्चिड एडवाइजर्स, स्कवायर पैटन बोग्स और कॉनसाइंस प्वाइंट कंसल्टिंग के साथ मिलकर ट्रंप प्रशासन में अपने संपर्क बढ़ाने के लिए लॉबिंग करवाई थी। ताकि यह फर्म ट्रंप प्रशासन, अमेरिकी कांग्रेस और अमेरिका की जनता के मन में पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक बातें रख सकें। जैवलिन एडवाइजर्स, जिसकी स्थापना राष्ट्रपति ट्रंप के पूर्व बॉडीगॉर्ड कीथ शिलर ने की थी, उन्होंने खुलासा किया कि अक्तूबर 2025 से उन्होंने पाकिस्तान के लिए लॉबिंग करना बंद कर दिया था।

इससे पहले जैवलिन एडवाइजर्स ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि उन्होंने ट्रंप प्रशासन के साथ बढ़ती पाकिस्तान की नजदीकी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। नवंबर में किए गए आखिरी खुलासे में कहा गया कि लॉबिंग की अवधि के दौरान जैवलिन ने पाकिस्तान सरकार और अमेरिका के बीच खनिजों के प्रस्ताव पर महत्वपूर्ण सलाह दी और भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान भी मदद की। पाकिस्तान जैसे देश के लिए, जो दूसरे देशों से कर्जे और आईएमएफ के फंड पर निर्भर रहता है। उसके लिए यह रकम काफी ज्यादा है।

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने पिछले एक साल में इस काम के लिए काफी ज्यादा पैसे खर्च किए थे, लेकिन अब जबकि उसने काफी हद तक फंडिंग बंद कर दी है। फिलहाल पाकिस्तान ने कुछ लॉबिंग फर्म के साथ अपनी करीबी बरकरार रखी है। अभी पाकिस्तान इस काम के लिए करीब 1.5 लाख डॉलर प्रति महीने का खर्च कर रहा है, जबकि भारत शुरुआत से ही लगभग 2 लाख डॉलर का खर्च कर रहा है।

पूर्व राजनयिक क्या बोले?

एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक की पाकिस्तानी पूर्व राजनियकों ने कहा कि पाकिस्तानी सरकार एकदम से लॉबिंग फर्म से अलग होने का फैसला इस बात की तरफ इशारा करता है इस्लामाबाद ने ट्रंप प्रशासन के महत्वपूर्ण सदस्यों तक आवश्यक पहुंच बना ली है।

हालांकि एक पूर्व पाकिस्तानी राजनयिक ने इस बात को भी स्वीकार किया कि लॉबिंग पर पाकिस्तान द्वारा किया गया खर्च हमेशा उसकी मदद नहीं कर सकता। यह एक अल्पकालिक विकल्प हो सकता है लेकिन पाकिस्तान और भारत के बीच के मूल अंतर को कम नहीं कर सकता। और अमेरिका का रणनीतिक साझेदार भारत है, पाकिस्तान नहीं।

भारत कहां पीछे?

संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने भी इस मामले पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “अमेरिका में कोई भी बात या तथ्य अपने आप नहीं चलते। उन्हें एक माध्यम की जरूरत होती है और सरकार के लिए वह माध्यम आमतौर पर एक लॉबिंग फर्म होती है, जो कि आपके लिए एक नैरेटिव तैयार करती है।”

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हमने इसकी शुरुआत करने में थोड़ी देर कर दी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब संसदीय प्रतिनिधिमंडल भेजे गए थे, तब हमारी भावना भी यही थी। बहुत से लोगों ने कहा कि आपके पास बताने के लिए एक बेहतर कहानी है, लेकिन इस तरह के मामलों में समय का बहुत महत्व होता है, हम थोड़ा पीछे रहे और हमारे लिए समय चुनौतीपूर्ण हो गया।”

SOURCE : LIVE HINDUSTAN