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आंखों के बार-बार फड़कने को ना करें नजरअंदाज, दे सकता है इन गंभीर समस्याओं को न्योता

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Source :- LIVE HINDUSTAN

आंख फड़कना असल में आंखों की पलकों या उसके आसपास की मांसपेशियों का अपने आप सिकुड़ना है, जिसे हम अपनी इच्छा से रोक नहीं पाते। अधिकांश मामलों में यह अल्पकालिक और हानिरहित होता है, लेकिन इसके कई साधारण और कुछ गंभीर कारण हो सकते हैं।

पलकों की वह हल्की सी हलचल, जिसे लोग अक्सर ‘आंख का फड़कना’ कहकर नजरअंदाज कर देते हैं, कभी-कभी शरीर का एक मौन संदेश होती है। अंधविश्वास की दुनिया में भले ही इसके कई तरह के मतलब निकाले जा सकते हैं, लेकिन विज्ञान की नजर में यह आपकी नसों और मांसपेशियों के बीच के तालमेल की एक छोटी सी चूक है। आमतौर पर यह मामूली नजर आने वाली समस्या लगती है, पर जब आंखों की यह फड़कन घंटों से दिनों और दिनों से हफ्तों में बदल जाए, तो समझ लीजिए कि आपका शरीर आपसे कुछ कहना चाहता है। यह महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि आपकी जीवनशैली के तनाव, आंखों की थकान या शरीर के भीतर छिपे किसी पोषण के असंतुलन की एक गंभीर दस्तक हो सकती है।

शारदाकेयर-हेल्थसिटी के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. पोनींदर कुमार डोगरा कहते हैं कि आंख का बार-बार फड़कना (eye twitching) एक आम समस्या है जिसे कई लोग हल्के में ले लेते हैं। लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी रहे, तो यह सिर्फ थकावट नहीं-कई बार बॉडी के अंदर चल रहे गंभीर कारणों का संकेत भी हो सकता है। आंख फड़कना असल में आंखों की पलकों या उसके आसपास की मांसपेशियों का अपने आप सिकुड़ना है, जिसे हम अपनी इच्छा से रोक नहीं पाते। अधिकांश मामलों में यह अल्पकालिक और हानिरहित होता है, लेकिन इसके कई साधारण और कुछ गंभीर कारण हो सकते हैं।

1. साधारण कारण

थकान और तनाव

आंख फड़कने के पीछे का सबसे कॉमन कारण थकान, यानी बहुत कम नींद या दिन भर की भारी गतिविधि हो सकती है। नींद की कमी मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र पर असर डालती है, जिससे पलकों में अनैच्छिक झटके होने लगते हैं। इसी तरह मानसिक तनाव और चिंता भी आंख फड़कने का प्रमुख कारण हैं। आज-कल की व्यस्त जीवनशैली में देर तक काम करना, कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन देखना, या किसी दबाव में रहना-ये सभी कारण आंखों पर अनजाने में भारी पड़ते हैं और पलक के छोटे-छोटे स्पैज़्म (तन्द्रा झटके) को उकसा सकते हैं।

2. स्क्रीन स्ट्रेन और आंख की थकावट

लंबे समय तक फोन, लैपटॉप या टीवी स्क्रीन पर नजर टिकाए रखने से आंखों की मांसपेशियां थक जाती हैं। इसे डिजिटल आंखों का तनाव कहते हैं। इससे आंखों में सूखापन और अस्थायी झटके महसूस हो सकते हैं। बिना ब्रेक के स्क्रीन टाइम लेना न सिर्फ आंखों की मांसपेशियों को थकाता है, बल्कि आंखों की लुब्रिकेशन (नमी) भी कम करता है, जिससे फड़कना और बढ़ सकता है।

3. अधिक कैफीन या शराब का सेवन

कॉफी, चाय, एनर्जी ड्रिंक आदि में मौजूद कैफीन और शराब दोनों ही तंत्रिका तंत्र को अधिक सक्रिय कर सकते हैं। जिसकी वजह से आंख की मांसपेशियों में झटके महसूस हो सकते हैं। यदि आपकी आंख फड़कती है, तो इनका सेवन कम करने पर असर कम हो सकता है।

4. पोषण की कमी और आंखों का सूखापन

शरीर में मैग्नीशियम, विटामिन B12 या पोटैशियम जैसे कुछ पोषक तत्वों की कमी नर्व और मांसपेशियों के कामकाज को प्रभावित करके आंख फड़कने और ड्राई आईज (dry eyes) का कारण बन सकती है।

5. गंभीर या न्यूरोलॉजिकल कारण

कभी-कभी आंख फड़कना एक गंभीर स्थिति का संकेत भी हो सकता है, जैसे:

ब्लेफरोस्पस्म – मांसपेशियों का लगातार संकुचन

हेमीफेशियल स्पैज़्म – चेहरे के एक हिस्से के नर्व पर दबाव

कुछ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स (जैसे पार्किंसंस, मल्टिपल स्क्लेरोसिस)

ये स्थितियां दुर्लभ हैं, लेकिन अगर फड़कना हफ्तों तक बना रहे, पूरी पलक बंद हो जाए, या चेहरे के अन्य हिस्सों में भी स्पैज़्म होने लगे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए अगर-

-आंख फड़कना 1 सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे।

-पलक पूरी तरह बंद हो जाए

-चेहरे के अन्य हिस्सों में कसाव या झटके आएं

-आंख में दर्द, लालिमा या दृष्टि में परिवर्तन हो

सरल उपाय जिनसे मदद मिल सकती है

-पर्याप्त नींद

-तनाव घटाने की गतिविधियां (जैसे योग, ध्यान)

-स्क्रीन पर ब्रेक लेना

-कैफीन/शराब कम करना

-आंखों को नम रखने वाले आर्टिफिशियल टियर्स

समय-समय पर आंखों का फड़कना आम है, लेकिन यदि यह बार-बार हो रहा है और इससे आपके रोजमर्रा के जीवन में दिक्कत हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें। सही कारण जानकर समय पर इलाज करवाने से आंखों की सेहत को सुरक्षित रखा जा सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN