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अमेरिका के खिलाफ जंग में कूदे रूस और चीन, ईरान का बड़ा खुलासा, कहा- हमें मिल रहा मिलिट्री सपोर्ट

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अराघची ने कहा है कि ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने खर्ग द्वीप पर ईरान के सैन्य ठिकानों पर हुए अमेरिकी हमले के बाद खाड़ी देशों पर भीषण हमलों की चेतावनी भी दी है।

पश्चिम एशिया में बीते दो सप्ताह से जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान ने बड़ा दावा कर दिया है। ईरान का दावा है कि अमेरिका और इजरायल के खिलाफ इस जंग में ईरान को रूस और चीन भी मिलिट्री सपोर्ट मिल रहा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दोनों ही देशों को अपना ‘रणनीतिक साझेदार’ बताते हुए, कहा है कि उसे पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष में इन दोनों देशों से ‘सैन्य सहयोग’ मिल रहा है।

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ईरानी विदेश मंत्री ने रविवार को एक अहम इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया है। अराघची ने अपने बयान में कहा, “चीन और रूस ईरान के ‘रणनीतिक साझेदार’ हैं, और वे इस संघर्ष में सहयोग दे रहे हैं। इसमें सैन्य सहयोग भी शामिल है,” उन्होंने कहा। “मैं इससे जुड़ा कोई भी विवरण नहीं दे सकता, लेकिन ईरान का इन देशों के साथ राजनीतिक, आर्थिक और यहां तक कि सैन्य स्तर पर भी अच्छा सहयोग है।”

ट्रंप ने जताया था शक

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह एक बयान में कहा था कि उन्हें शक है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन युद्ध में ट्रंप की थोड़ी बहुत मदद कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा था, “मुझे लगता है कि वह शायद थोड़ी मदद कर रहे होंगे और शायद वह यह भी सोचते हैं कि हम यूक्रेन की मदद कर रहे हैं।” ट्रंप का यह बयान उन रिपोर्ट्स के बाद सामने आया था जिसमें दावा किया गया है कि रूस ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी दे रहा है।

समझौते से इनकार

इस बीच अराघची ने बातचीत की संभावना से भी इनकार कर दिया है। ईरान ने कहा है कि मौजूदा युद्ध का अंत तभी संभव है जब इस बात की पुख्ता गारंटी दी जाए कि हमले दोबारा नहीं दोहराए जाएंगे। अराघची ने एक प्रमुख अरबी समाचार पत्र ‘अल-अरबी अल-जदीद’ से बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि युद्ध का अंत तभी संभव है जब इस बात की पुख्ता गारंटी दी जाए कि हमले दोबारा नहीं दोहराए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने संघर्ष के दौरान हुए नुकसान के लिए हर्जाने या मुआवजे के भुगतान की मांग भी उठाई है। अराघची ने क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर एक संयुक्त जांच समिति बनाने का प्रस्ताव भी दिया है जो क्षेत्र में हुए हमलों की बारीकी से जांच कर सके।

खाड़ी देशों पर हमले का बचाव

ईरानी विदेश मंत्री ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि तेहरान की सैन्य कार्रवाइयां केवल इस क्षेत्र में स्थित अमेरिकी ठिकानों और हितों तक ही सीमित रही हैं। उन्होंने इस बात का पुरजोर खंडन किया कि ईरान ने पड़ोसी देशों के किसी भी नागरिक या आवासीय क्षेत्र को निशाना बनाया है। अराघची ने आशंका जताई कि अरब देशों के नागरिक ठिकानों पर हुए हमलों के पीछे इजरायल का हाथ हो सकता है, जिसका उद्देश्य ईरान और उसके पड़ोसी अरब देशों के मधुर संबंधों में दरार पैदा करना है।

अराघची का सनसनीखेज दावा

अराघची ने यह भी सनसनीखेज दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के ‘शाहिद’ की तरह ही ‘लुकास’ नामक एक नया ड्रोन बनाया है, जिसका उपयोग अरब देशों में ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान के ऊर्जा केंद्रों या तेल सुविधाओं को निशाना बनाया गया, तो तेहरान इसका कड़ा जवाब देगा। ऐसी स्थिति में ईरान इस क्षेत्र में सक्रिय अमेरिकी कंपनियों की ठिकानों पर सीधा हमला करेगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN