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अमेरिका-ईरान युद्ध में अब और खून बहेगा! ट्रंप दे सकते हैं बड़ा आदेश; खतरनाक प्लान हो रहा तैयार

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Source :- LIVE HINDUSTAN

रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब ईरान ने अपने वरिष्ठ कमांडरों को खोने के बाद बदला लेने की कसम खाई है और इजरायल और आस पास के खाड़ी देशों पर लगातार हमले कर रहा है। ताजा हमलों में ईरान ने तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाया है।

ईरान और अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद पश्चिम एशिया में पिछले 19 दिनों से भीषण युद्ध जारी है। एक तरफ जहां इजरायल और अमेरिका ने देश के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाकर ईरान को गहरा जख्म दिया है, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने भी इजरायल और खाड़ी देशों पर मिसाइलों और ड्रोन की बरसात की है। ईरान ने बुधवार को सऊदी अरब, कतर और यूएई के तेल और गैस ठिकानों को भी निशाने पर लिया है। ऐसे में ईरान युद्ध का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। इस बीच अब एक और बड़ी खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द ही हजारों अमेरिकी सैनिकों को मिडिल ईस्ट भेज सकते हैं।

रॉयटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी और इस मामले से परिचित अन्य सूत्रों के हवाले से बताया कि ट्रंप प्रशासन मिडिल ईस्ट में अपने ऑपरेशन को मजबूत करने के लिए हजारों अमेरिकी सैनिक तैनात करने पर विचार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ जंग में अगले दांव की तैयारी कर रही है।

क्या है योजना?

रिपोर्ट की माने तो अमेरिकी सैनिकों की तैनाती ट्रंप को अतिरिक्त विकल्प देने में मदद कर सकती है। सूत्रों ने बताया कि इन विकल्पों में होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करना शामिल है। यह एक ऐसा मिशन होगा जिसे मुख्य रूप से हवाई और नौसेना की मदद से पूरा किया जाएगा। कुछ अन्य सूत्रों का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित करने का मतलब यह भी हो सकता है कि अमेरिका ईरान के तट पर ही अमेरिकी सैनिकों को तैनात कर दें।

खर्ग द्वीप पर सैनिक भेजेंगे ट्रंप?

मामले से परिचित तीन अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खर्ग द्वीप पर भी जमीनी सेना भेजने के विकल्पों पर भी चर्चा की है। बता दें कि यह द्वीप ईरान के 90 प्रतिशत तेल निर्यात का केंद्र है। हालांकि अधिकारियों ने कहा है कि ऐसा ऑपरेशन बहुत जोखिम भरा होगा क्योंकि ईरान के पास मिसाइलों और ड्रोन के जरिए इस द्वीप तक पहुंचने की क्षमता है। ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि ईरान की इस द्वीप पर अमेरिका ने बड़ा हमला किया है। इसके अलावा अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के समृद्ध यूरेनियम के भंडार को हासिल करने के लिए भी अमेरिकी सेना तैनात करने की संभावना पर चर्चा की है।

ट्रंप के लिए बढ़ सकता है जोखिम

जानकारों के मुताबिक अमेरिकी सैनिकों का कोई भी इस्तेमाल, भले ही वह किसी सीमित मिशन के लिए ही क्यों ना हो, ट्रंप के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अमेरिकी जनता के बीच ईरान जंग के लिए समर्थन बहुत कम है। वहीं ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान के दौरान खुद यह वादा किया था कि वह अमेरिका को मिडिल ईस्ट के नए संघर्षों में नहीं धकेलेंगे। हाल ही में ट्रंप के एक अधिकारी ने भी ईरान जंग को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए इस्तीफा दे दिया था। इसके अलावा ईरान में कोई सीधा टकराव ना होने के बावजूद, इस युद्ध में अब तक 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और लगभग 200 घायल हो गए हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN