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अपनी सेना के लड़कर पाकिस्तान आए हैं गालिबाफ? ईरान में बड़ी कलह, झुकने को तैयार नहीं IRGC

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले ईरानी अधिकारियों और IRGC के बीच वार्ता दल के नेतृत्व व मिसाइल प्रोग्राम को लेकर भारी कलह। उधर, डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को सख्त चेतावनी दी है। पूरी खबर पढ़ें।

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता शुरू होने से ठीक पहले ईरान के अंदर गहरी फूट पड़ गई। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ अपनी ही सेना यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मौजूदा नेतृत्व से टकराव के बावजूद उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए शुक्रवार रात इस्लामाबाद पहुंच गए। हालांकि उनके पाकिस्तान रवाना होने से पहले शीर्ष अधिकारियों के बीच वार्ता दल के सदस्यों को लेकर तीखे मतभेद सामने आए हैं। ‘ईरान इंटरनेशनल’ ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कमांडर-इन-चीफ अहमद वाहिदी इस वार्ता दल में विदेश मंत्री अब्बास अरागची और संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर गालिबाफ के अधिकारों और प्रभाव को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं।

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ पहले से ही बहुत ताकतवर

इस बीच, वाहिदी ने मांग की है कि वार्ता दल में मोहम्मद बघेर जोलकद्र को भी शामिल किया जाए। गौरतलब है कि जोलकद्र को राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन पर IRGC के सीधे दबाव के चलते ही राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का सचिव नियुक्त किया गया था। हालांकि, मौजूदा वार्ता दल जोलकद्र को टीम में शामिल किए जाने का कड़ा विरोध कर रहा है। उनका तर्क है कि रणनीतिक और कूटनीतिक स्तर की बातचीत के लिए जोलकद्र के पास पर्याप्त अनुभव नहीं है। ईरान की सेना ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ पहले से ही बहुत ताकतवर थी, लेकिन अब देश की अर्थव्यवस्था और समाज पर इसका नियंत्रण और भी ज्यादा हो गया है।

ईरान-अमेरिका के बीच पिछले कुछ हफ्तों से चले युद्ध के बाद पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहा है। दोनों पक्षों के बीच सीजफायर की घोषणा बुधवार को हुई थी, लेकिन ईरान ने इस सीजफायर को लेबनान तक लागू करने और अपनी सीज संपत्तियों को छोड़ने की शर्त रखी है।

मिसाइल कार्यक्रम और युद्धविराम पर अलग-अलग दावे

IRGC के कमांडर-इन-चीफ और IRGC के एयरोस्पेस कमांडर ने इस बात पर जोर दिया है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल को किसी भी कीमत पर ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर कोई भी बातचीत नहीं करनी चाहिए।

संसद के स्पीकर गालिबफ ने गुरुवार और शुक्रवार को बार-बार यह दावा किया कि वार्ता शुरू करने के लिए जो युद्धविराम लागू किया गया है, उसमें लेबनान भी शामिल है। लेकिन, अमेरिका और इजरायल दोनों ने उनके इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

अमेरिका की प्रतिक्रिया: ट्रंप और वेंस के कड़े संदेश

अमेरिका की ओर से भी इस बातचीत से पहले सख्त रुख अपनाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के मुद्दे पर ईरान की कड़ी आलोचना की है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा: ईरान बहुत ही खराब और कुछ लोगों के शब्दों में कहें तो अपमानजनक काम कर रहा है। हमने ऐसा कोई समझौता नहीं किया था!

वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शुक्रवार को पाकिस्तान के लिए रवाना हो गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस वार्ता के लिए अमेरिकी समूह को कुछ बहुत ही स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। वेंस ने ईरान को संदेश देते हुए कहा: अगर ईरानी पूरी ईमानदारी के साथ बातचीत करने को तैयार हैं, तो हम भी निश्चित रूप से उनकी तरफ मदद का हाथ बढ़ाने को तैयार हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN